मनरेगा मजदूरों के 87 लाख जॉब कार्ड रद‍्द 

Swati ShuklaSwati Shukla   23 March 2017 5:04 PM GMT

मनरेगा मजदूरों के 87 लाख जॉब कार्ड रद‍्द 87 लाख जॉब कार्डों को ग्रामीण विकास मंत्रालय ने रद्द कर दिया गया है।

स्वाती शुक्ला/अरविन्द परमार, स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

लखनऊ। मनरेगा के तहत फंड का दुरुप्रयोग को रोकने के लिए 87 लाख जॉब कार्डों को ग्रामीण विकास मंत्रालय ने रद्द कर दिया गया है। उत्तर प्रदेश में बहुत से ऐसे मनरेगा मजदूर है जिन्होने जॉब कार्ड तो बनवा लिए थे पर काम करने के लिए एक दिन भी नहीं आए, ऐसे मजदूरों के जॉब कार्ड रद्द हो जाएंगे।

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मनरेगा अपर आयुक्त पीसी जायसवाल ने बताया, “बहुत से ऐसे मनरेगा मजदूरों जिसने मनरेगा के तहत पंजीकरण तो करवा लिया पर काम करने के लिए एक दिन भी नहीं आए है, ऐसे लोगों के जॉब कार्ड रद्द किए जाएंगे। कुछ मनरेगा मजदूरों की मृत्यु हो गई है जिनके नाम अभी तक दर्ज हैं। उनके नाम भी हटवाए जाएंगे।”

उत्तर प्रदेश में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी (मनरेगा) के तहत 157.26 लाख जॉब कार्डधारक मजदूर हैं, जिसमें 1 से 10 दिन के बीच काम करने वाले मनरेगा मजदूरों की संख्या 7 लाख 61 हजार है। केंद्र सरकार ने सूखाग्रस्त जिलों में 100 दिन की बजाय 150 दिन के रोजगार देने का आदेश दिया है। इस स्कीम के तहत जल संरक्षण, भूमि विकास और सिंचाई कार्यों को अंजाम दिया जाता है। इसके अलावा बांध, चेक डैम्स, तालाबों, कुओं और आंगनबाड़ी केंद्रों का निर्माण भी इसी योजना के कार्यों में शामिल है।

ललितपुर में पिछले साल 1.77 लाख पंजीकृत जॉब कार्ड धारक थे, जिसमें से निष्क्रिय जॉब कार्ड धारी रद्द होने के बाद अब 1.54 लाख जॉब कार्ड बचे हैं, जिसमें 23 हजार से ज्यादा जॉब कार्डों को रद्द कर दिया गया है।

जॉब कार्ड बनते समय ये नहीं देखा गया कि कौन काम करेगा! दबाव के चलते जॉब कार्ड तो बन गये, कई वर्षों से ऐसे मजदूरों के जाँब कार्ड कोरे के कोरे है, क्योंकि इन्होंने आज तक मनरेगा में न ही काम मांगा, न ही काम किया!
धनीराम वर्मा, मनरेगा ब्लाँक को-ऑर्डिनेटर, महरौनी

धनीराम वर्मा आगे बताते हैं कि शासन से बार-बार समीक्षा होती रही है कि मजदूर काम क्यों कम करते हैं। इसके बाद सर्वे हुआ, सर्वे से स्थिति क्लीयर हुई कि जॉब कार्ड धारक बड़े किसान, ट्रैक्टर वाहन स्वामी के जॉब कार्डों को नवीनीकृत ना किया जाये।”

केंद्रीय मंत्री रामकृपाल यादव ने संसद में जानकारी दी थी कि, ‘ग्रामीण विकास मंत्रालय ने मनरेगा के फंड का दुरुप्रयोग रोकने के लिए अभियान चलाया है और इसके तहत अब तक 87 लाख फर्जी जॉब कार्ड्स को रद्द कर दिया गया है। मंत्रालय ने इन कार्ड्स को फर्जी पाया या फिर लाभार्थियों की मौत हो चुकी थी। मनरेगा एक्ट के तहत कुल जारी 12.49 जॉब कार्ड्स में से अब तक 63 पर्सेंट कार्ड्स का वेरिफिकेशन किया जा चुका है। तमाम कार्ड फर्जी नामों पर बनाए गए। कुछ कार्ड नकली पाए गए तो तमाम लोग मर चुके थे।’’

2006 में शुरू हुई थी योजना

2 फरवरी, 2006 को 200 जिलों से शुरू हुई मनरेगा योजना ने 1 अप्रैल, 2008 से भारत के सभी जिलों को कवर किया। विश्व विकास रिपोर्ट 2014 में विश्व बैंक ने इसे ग्रामीण विकास का तारकीय उदाहरण कहा। राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम 2005 के अनुसार, योजना का लक्ष्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोज़गार की सुरक्षा को बढ़ाने के लिए एक वित्तीय वर्ष में कम से कम 100 दिन की मजदूरी रोजगार प्रदान करना है।

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