आंगनबाड़ी केन्द्र बना कूड़ा घर 

आंगनबाड़ी केन्द्र बना कूड़ा घर रख रखाव के अभाव में आंगनबाड़ी की हालत बिगड़ी।

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

लखनऊ। प्रदेश में बच्चों के पोषण और प्रारम्भिक शिक्षा के लिए आंगनबाड़ी केन्द्रों की शुरुआत तो की गयी, लेकिन देख-रेख के आभाव में इन केन्द्रों की हालत खराब हो गयी है।

जिला मुख्यालय से लगभग 20 किलोमीटर दूरी पर स्थित बख्शी का तालाब ब्लॉक के बाना गाँव के आंगनबाड़ी केंद्र की हालत ग्रामीणों ने खराब कर रखी है। ग्रामीण केंद्र के बाहर ही बालू-मौरंग फेंकते हैं, जिससे वहां बहुत ज्यादा गंदगी फैली रहती है। इससे आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के साथ ही बच्चों को भी काफी परेशानी होती है।

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नाम न बताने की शर्त पर बाना आंगनबाड़ी केद्र की कार्यकत्री ने बताया, “हमारे केंद्र पर 101 बच्चे हैं। केंद्र के बाहर इतनी गंदगी रहती है कि बैठना मुश्किल हो जाता है। गाँव के लोगों ने इसे बालू-मौरंग डालने का अड्डा बना दिया है। आंगनबाड़ी केंद्र के चारों ओर बाउंड्री न होने कारण लोग इसे प्रयोग करते हैं। लोग बालू-मौरंग के साथ भी शौच के लिए इसका प्रयोग करते हैं।’’

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, भारत सरकार के तहत मनाए जाने वाले आईसीडीएस कार्यक्रमों में वजन दिवस, आयरन की गोली बंटना, मातृ-शिशु टीकाकरण और मातृत्व सप्ताह मनाए जाते हैं। इन कार्यक्रमों में शामिल आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को उनके खाते में ड्यूटी का पैसा सीधे मिलता है। प्रदेश में एक लाख से अधिक आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां हैं। “आंगनबाड़ी केंद्र के चारों तरफ बाउंड्री बन जाए तो ये मुसीबत हट जाएगी। इसके लिए मैंने कई बार शिकायत भी की लेकिन अभी तक कोई निवारण नहीं हुआ है।’’ कार्यकत्री ने आगे बताया।

आंगनबाड़ी की सहायिका रानी मौर्य (45 वर्ष) ने बताया, “हम रोज यहां पर सफाई करते हैं, लेकिन गाँव वाले इस कदर की गंदगी करते हैं जो साफ़ कर पाना बहुत मुश्किल है। जितनी सफाई सम्भव है उतनी करते हैं। गाँव वालों से कुछ कहो तो लड़ाई पर उतर आते हैं। सफाईकर्मीं भी आता नहीं है, जो उससे ही सफाई करवा लें। सबसे बड़ी परेशानी बाउंड्री ही है, वो बन जाए तो अपने आप लोग गंदगी करना बन्द कर देंगे।”

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