बच्चों में तनाव कम कर रहा ‘डांस विद कलर्स’ अभियान 

Devanshu Mani TiwariDevanshu Mani Tiwari   1 March 2017 7:53 PM GMT

बच्चों में तनाव कम कर रहा ‘डांस विद कलर्स’ अभियान ‘डांस विद कलर्स’ अभियान के माध्यम से बच्चों में तनाव को कम किया जा रहा हैं।

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

वाराणसी। बच्चों पर परीक्षा में नम्बर लाने, पढ़ाई का दबाव बढ़ाने और उन्हें बार-बार अनसुना कर देने से बच्चों में तनाव बढ़ जाता है। जिले के छोटे कस्बों में रहने वाले बच्चों में ऐसे ही तनाव को कम कर नई-नई रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ने की पहल ‘डांस विद कलर्स’ अभियान शुरू किया गया है।

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जिले में बाल अधिकारों के संरक्षण और उन्हें बढ़ावा देने के उद्देश्य पर काम कर रही संस्थाएं (मानवाधिकार जननिगरानी समिति, जन मित्र न्यास और बनारस स्कूल ऑफ़ फ़ाईन आर्ट्स, कलागंन फाउन्डेशन) के साझे प्रयासों से गाँवों व कस्बों में जाकर ‘डांस विद कलर्स’ के माध्यम से बच्चों में बढ़ते तनाव को कम किया जाता है।

इस प्रयास के बारे में बनारस की मानवाधिकार जननिगरानी समिति की मैनेजिंग ट्रस्टी श्रुति नागवंशी बताती हैं, ‘’आज के समय में समाज में तेज़ी से बदलाव आया है, जिससे लोगों के जीवन में बहुत भागा-दौड़ी शुरू हो गई है। अपने कामकाज से परेशान होकर लोग तनाव में आकर घर वालों पर चिल्ला देते हैं। इसके अलावा बच्चों को डांटते रहते हैं। इसका बुरा प्रभाव उनके व्यक्तिगत जीवन के साथ साथ उनके बच्चों पर भी पड़ता है।’’ डांस विद कलर्स अभियान जिले में अभी तक 50 से अधिक छोटे कस्बों और बस्तियों में चलाया जा चुका है।

इनमें बजरडीहा के 20 मदरसे भी शामिल हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की वर्ष 2016 की रिपोर्ट के मुताबिक बच्चों में सबसे ज़्यादा अवसाद की बड़ी वजह मोटापा, घर का विपरीत माहौल और अन्य बच्चों से तुलना किया जाना होता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की वर्ष 2016 की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले पांच में 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में 22 फीसदी बच्चे मोटापे के कारण गहरे अवसाद का शिकार हो चुके हैं।

मानवाधिकार जननिगरानी समिति के सीईओ डॉ. लेनिन रघुवंशी ने बताया कि इस तरह के कार्यक्रमों से बच्चों की प्रतिभा को एक मंच उपलब्ध कराया जाता है। बच्चों से अलग-अलग तरह के रंगों का इस्तेमाल कराकर उनके जीवन से तनाव को घटाया जाता है।

आजकल लोग समय की कमी के कारण बच्चों के अंदर के तनाव को नहीं समझ पाते हैं, जिसके कारण बच्चों को उस कुंठा से बाहर निकलने का कोइ विकल्प नहीं मिल पाता है। ऐसे में हम कस्बों में जाकर बच्चों को संगीत और कला के माध्यम से खुशियां बांटते हैं।
श्रुति नागवंशी, मैनेजिंग ट्रस्टी, मानवाधिकार जननिगरानी समिति

बच्चों में छिपी प्रतिभा को लाया जाता है सामने

इस अभियान के अंतर्गत बच्चों से पेंटिंग बनवाना, बच्चों के सामने बाल विवाह, बाल मजदूरी, बाल यौन हिंसा, शिक्षा अधिकार, बाल अधिकार व बाल भागीदारी पर आधारित कलाकृतियाँ तैयार करवाई जाती हैं, जो संगीत और मौज-मस्ती से पूरी की जाती है, जिससे बच्चों के अंदर छिपी कला बाहर आती है और उनके भीतर पल रहा तनाव कम होता है।

This article has been made possible because of financial support from Independent and Public-Spirited Media Foundation (www.ipsmf.org).

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