दो जिलों को जोड़ने के लिए पुल तो बना, मगर सड़क नहीं

दो जिलों को जोड़ने के लिए पुल तो बना, मगर सड़क नहींदो ज़िलों को जोड़ने का काम करती है यह सड़क।

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

मानिकपुर (प्रतापगढ़)। दो जिलों की दूरी कम करने के लिए पुल का निर्माण तो करा दिया गया, लेकिन सड़क न बन पाने की वजह से अभी लोगों को लंबी दूरी का रास्ता अपनाना पड़ता है।

प्रतापगढ़ जिले से कौशांबी जिले तक जाने के लिए लगभग 50 किमी. गंगा ब्रिज होकर जाना पड़ता है। इस दूरी को कम करने के लिए कुंडा तहसील के मानिकपुर बाजार और कौशाम्बी के सैनी बाजार को जोड़ते हुए एक पुल का निर्माण कराया गया है। इससे दोनों की दूरी सिर्फ 18 किमी. की हो गयी है। लेकिन पुल तक जाने के लिए मानिकपुर की ओर से रास्ता अभी तक नहीं बन पाया है। जबकि कौशांबी की तरफ से पुल बना दिया गया है।

पुल तक जाने के लिए रास्ता न होने से पुल बनने का फायदा अभी भी लोगों को नहीं मिल पा रहा है। मानिकपुर के रहने वाले अरविंद सिंह (3) कहते हैं, “कौशाम्बी जिले में कड़ा धाम पर हर हफ्ते मेला लगता है, जिसमें कई जिलों के लोग आते हैं। मानिकपुर के कई दुकानदार वहां पर दुकान लगाते हैं, जब पुल बनना शुरु हुआ तो लोगों को लगा कि अब ज्यादा दूर तक नहीं जाना पड़ेगा। लेकिन अभी तक सड़क नहीं बन पायी।”

प्रतापगढ़, कौशाम्बी, फतेहपुर, बांदा, चित्रकूट को मिलाने के लिए यह पुल बनाया गया था। कौशाम्बी जिले में पुल तक लोक निर्माण विभाग ने सड़क बनवा दी है, लेकिन प्रतापगढ़ की ओर अभी तक कोई भी रास्ते का निर्माण नहीं किया गया। ऐसे में राहगीरों को अब भी इस पुल का लाभ नहीं मिल पा रहा है। इलाहाबाद-लखनऊ मुख्य मार्ग से करीब दो किमी. की दूरी पर बने इस पुल तक सड़क बनवाने के लिए स्थानीय लोगों ने कई बार जिले के अधिकारियों से कहा भी, लेकिन बजट का अभाव बताकर सड़क का निर्माण करने से मना कर दिया गया।

मानिकपुर के उदय गुप्ता (40 वर्ष) कहते हैं, “कई बार हम लोगों ने जिला मुख्यालय पर सड़क बनाने के लिए कहा भी, लेकिन अभी तक नहीं बन पाया है। जब सड़क नहीं बनायी गयी तो हम सब लोगों ने मिलकर जेसीबी लगाकर कच्चे रास्ते पर मिट्टी डलवा दी है, जिससे कुछ हद तक आसानी हो गयी है।”

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