कैश की कमी और सटीक जानकारी के अभाव में अफवाहों का बाजार गर्म, खेती पर भी पड़ा असर 

कैश की कमी और सटीक जानकारी के अभाव में अफवाहों का बाजार गर्म, खेती पर भी पड़ा असर कानपुर रोड स्थित उन्नाव के पास बने टोल प्लाजा पर लगी गाड़ियों की लंबी कतारें। फोटो: गाँव कनेक्शन

लखनऊ। लखनऊ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को आधी रात के बाद 500 और 1000 के पुराने नोट क्या बंद कर दिए पूरे देश का माहौल बदल गया। टोल प्लाजा पर भीड़ उमड़ आई और पेट्रोल पंप व सीएनजी स्टेशन पर लोगों की लंबी-लंबी कतारें लग गई हैं। वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में मिला-जुला असर देखने को मिल रहा है। अफवाहों का बाजार गर्म है। इस समय गेहूं, सरसों, मसूर जैसी फसलों की बुवाई का समय है। उर्वरक व बीज केन्द्र संचालकों ने केन्द्रों को बंद कर दिया है। किसान निराश और हताश हैं। देशभर में इस फैसले का व्यापक असर देखने को मिल रहा है।

टोल प्लाजा व पेट्रोल पंप पर लगी लंबी कतार

लखनऊ के लोहिया पथ स्थित पेट्रोल पंप मंगलवार की रात से ही लगातार लगा गाड़ियों का जमावड़ा।

जानकारी के अभाव में लोग 500 और 1000 के नोट नहीं ले रहे हैं। इस बीच छोटी नोटों की मांग बढ़ गई है। खासकर, घर से बाहर कहीं सफर पर निकले लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। यही कारण है कि कई टोल प्लाजा या तो फ्री कर दिए गए हैं या फिर वहां हंगामे सा नजारा देखने को मिल रहा है। जितने मुंह उतनी बातों के आधार पर लोग तथ्यों पर कम और अफवाहों की ज्यादा चर्चा कर रहे हैं।

बुवाई में हो रही है दिक्कत, न मिल रहा बीज और न ही किसान मजदूर

500 और 1000 की नोटों को बंद किए जाने के बाद से गाँवों में होने वाली बुवाई को लेकर असमंजस की स्थिति बन गई है। बड़े किसान अपने मजदूर किसानों को काम के बदले दाम कहां से देंगे। इसे लेकर असमंजस का माहौल बना हुआ है। आशंका जताई जा रही है कि संभवत: इस बार बुवाई में देरी हो जाएगी।

सीतापुर ज़िले के काजी कमालपुर के केंद्र पर खड़े किसान रामदुलारे बताते हैं, " खेत तैयार है आज खाद डालकर बीज बोना था, लेकिन अब तो लगता है कि तीन-चार दिन तक बोनी नहीं हो पाएगी क्योंकि बैंक में भी एक ही दिन में सबको पैसा नहीं मिल पायेगा। जब बैंक खुलेगा तो वहां पर बहुत भीड़ होगी।" वे कहते हैं, “मेडिकल स्टोर पर भी दवा नही मिल पा रही क्योंकि ज्यादातर का वैट नं नहीं जिससे डर बना है की कैसे पैसे जमा होंगे। पेट्रोल पंप पर भी मुश्किल से ही ईंधन मिल पा रहा है। कई पंप बंद कर दिये।”

500 और 1000 की नोट बंद होने के बाद संशय में पड़े देशभर के किसान। (साभार: गूगल इमेज)

उधर, सिद्धार्थनगर के नौगढ़ में युवा किसान अखिलेश पाण्डेय (36 वर्ष) कहते हैं, “सबसे ज्यादा परेशानी किसान को हो रही है। एक ओर धान की तैयार फसल बेचनी है और दूसरी ओर गेहूं की बुवाई करनी है लेकिन नया नोट मिलने तक इंतज़ार करने के अलावा कोई चारा नहीं है। कल बैंक जाऊंगा लेकिन लग रहा है कि खेती पिछड़ जाएगी। हालांकि सरकार का फैसला सराहनीय है।”

इस बारे में ललितपुर जनपद से 52 किमी दूर स्थित महरौनी तहसील के धनीराम राजपूत (32 वर्ष) बताते हैं, "रबी की फसल की तैयारी चल रही है। रुपयों की जरूरत है। 20 कुंतल सोयाबीन 2700 रुपया रुपया प्रति कुंतल के भाव में बेचा था। सोचा था कि रबी की फसल के लिए बीज, खाद और डीजल के लिए पैसे हो जाएंगे। मगर बुधवार की सुबह से कोई भी उन रुपयों को नहीं ले रहा है। कुछ समझ नहीं आ रहा।” वे आगे कहते हैं, “खेती के लिए 200 लीटर डीजल लेना था, लेकिन प्रेट्रोल पम्प वाले ने रुपया लेने से मना कर दिया। उसने कहा कि अगर 200 लीटर तेल पर एक हजार रुपए का कमीशन दोगे तभी नोट लेंगे नहीं तो सौ के नोट ले आओ। ऐसे में खेत में पानी कैसे डालें। कैसे करें बुबाई।” उधर जनपद के मण्डी रोड महरौनी के दीपान्सू (उम्र - 23वर्ष) बताते हैं, "मेरे पास 500 रुपया के नोट थे। रोजमर्रा की किराने का सामान खरीदना था, बाजार में सभी की दुकानों पर गया। किसी ने सामान नहीं दिया। दुकानदार कहते हैं, “500 का सामान लेना पड़ेगा तभी सामान देंगे। अन्यथा नहीं देंगे या फिर खुल्ला रुपया लेकर आओ।”

वहीं, जनपद के बार ब्लॉक के दरौनी गाँव के अवनेश कुमार तुमारी (28 वर्ष) बताते हैं, "इस देश की सम्पूर्ण अर्थव्यवस्था खेती पर निर्भर है। खेती का समय चल रहा है। नोट बंद हो जाने के बाद न तो कोई डीजल दे रहा और न ही खाद।” वे आगे बताते हैं, "प्रधानमंत्री मोदी ने हर क्षेत्र का ध्यान रखा लेकिन किसानों को कोई मौका नहीं दिया।”

हालांकि, जानकारी के अभाव में लोग 500 और 1000 के नोट नहीं ले रहे हैं। इस बीच छोटी नोटों की मांग बढ़ गई है। खासकर, घर से बाहर कहीं सफर पर निकले लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। यही कारण है कि कई टोल प्लाजा या तो फ्री कर दिए गए हैं या फिर वहां हंगामे सा नजारा देखने को मिल रहा है। जितने मुंह उतनी बातों के आधार पर लोग तथ्यों पर कम और अफवाहों की ज्यादा चर्चा कर रहे हैं।

प्रतीकात्मक तस्वीर (साभार: गूगल इमेज)

शादी-ब्याह के घरों में संशय का माहौल

इस बीच प्रदेश के तमाम जिलों में एक समस्या देखने को मिली कि जिन घरों में शादी की तैयारियां जोरों पर चल रही हैं वहां सारे काम ठप्प से पड़ गए हैं। शादियों में अघोषित मगर खुलेआम तरीके से लिए जाने वाले दहेज को लेकर चर्चाएं शुरू हो चुकी हैं। हालांकि, कहीं भी किसी के पास पुख्ता समाधान नहीं है। फिर लोग इस बात को स्वीकार कर रहे हैं कि भले ही यह दिक्कत कुछ दिनों की हो लेकिन इसके बाद देश में भ्रष्टाचार और कालाधन का कारोबार कूड़ा हो जाएगा।

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कहीं दुकान बंद तो कहीं तो नहीं हुई बोहनी

फैजाबाद नगर के बाजार में बैठे पटरी दुकानदारों से बात करने पर उन्होंने बताया, “शहर में सब्जी की दुकानों पर सन्नाटा पसरा हुआ है। सुबह से कोई खास बिक्री नहीं हुई। लोग बंद की जा चुकी नोटों को दे रहे हैं। ऐसे में परिवार कैसे चलेगा, ये समझ में नहीं आ रहा है।” वहीं, झारखंड के जमशेदपुर के संवाददाता ने बताया कि बड़ी दुकानों और पेट्रोल पंप पर कार्ड से पेमेंट ज्यादा हो रहे हैं। मगर सब्जी और ठेले वाले बहुनी तक नहीं कर पा रहे हैं। यही नहीं कानपुर के प्रमुख बाजारों में बैठे दुकानदारों ने अपनी दुकानें बुधवार को खोली ही नहीं। इससे उन लोगों पर ज्यादा प्रभाव पड़ा है जिनके घरों में कोई आयोजन किया जा रहा हो। आलम यह है कि कानपुर में बिरहाना रोड, नयागंज, कलक्टरगंज सहित शहर की कई प्रमुख मार्केट बंद कर दी गई हैं। खासकर सोनारों ने अपनी दुकानों के शटर गिरा रखे हैं।

उधर, सिद्धार्थनगर के नौगढ़ में आज रोज़ की अपेक्षा 50 प्रतिशत तक भीड़ कम दिखी। इससे सड़क, बाजार व दुकानों पर वीरानगी नज़र आ रही है। किराना की दुकान चलाने वाले प्रदीप वर्मा (30 वर्ष) कहते हैं, “ग्राहक और दुकानदार दोनों को दिक्कत हो रही है। हम 500-1000 का नोट ले नहीं सकते तो जाहिर है बड़ी ख़रीदारी हो ही नहीं पाएगी। ऐसे में कारोबार ठप है।”

बांदा के बबेरू ब्लॉक के आधांव गाँव में रह रहे इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से पीएचडी कर रहे रामबाबु तिवारी बताते हैं, “बांदा में मंगलवार की रात को ही एटीएम में से सारे कैश लोगों ने निकाल लिए थे। दुकानदारों ने नोट भी लेना बंद कर दिया था। ऐसे में बुधवार को सुबह से ही लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा।”

यह स्थिति लगभग एक सप्ताह तक चलेगी। इससे इसका सीधा सर उद्योगपतियों व पूंजीपतियों पर पड़ेगा। छोटे दुकानदारों व आम आदमियों पर कोई असर नहीं होगा। सबसे बड़ा असर जमाखोरों पर होगा। हवाला कारोबारी और सट्टा बाजार के संचालक धराशाई हो जाएंगे।
शिवकुमार गुप्ता, अर्थशास्त्री

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