तरक्की के लिए स्मार्ट शहर ही नहीं स्मार्ट गाँव भी चाहिए

तरक्की के लिए स्मार्ट शहर ही नहीं स्मार्ट गाँव भी चाहिएgaon connection, गाँव कनेक्शन

लखनऊ। प्रदेश भर से आए किसान सुबह से ही लखनऊ के कैसरबाग के गांधी प्रेक्षागृह में इकट्ठा होने लगे थे। मौका था किसान मंच द्वारा आयोजित किसान अधिकार दिवस का, जिसमें किसानों की समस्याओं के बारे में बात की गईं।

कार्यक्रम में किसान मंच के प्रदेश अध्यक्ष शेखर दीक्षित ने कहा, ''आज जब देश का किसान बदहाली से गुजर रहा है और केन्द्र व राज्य की सरकारें धर्म व जाति पर राजनीति कर रही हैं तब यह आवश्यक हो जाता है कि किसान अपने अधिकारों के लिए संगठित होना व लडऩा सीखे। आज देश को स्मार्ट शहरों की नहीं स्मार्ट गाँवों की जरूरत है। कल तक जो किसान अपने गाँव में अपने खेत का मालिक था आज वही किसान शहर में मजदूर बन रहा है।"  

उन्नाव जि़ले के ऊंचाद्वार गाँव से आयी प्रेमा(45 वर्ष) ने बताया, ''पिछले गेहूं की खेती बर्बाद हो गयी, फिर सूखे से धान की भी खेती बर्बाद हो गयी थी, लेकिन अब तक कोई मुआवजा नहीं मिला, किसान मंच हमारी बहुत मदद करता है।" प्रेमा की तरह ही उन्नाव, सीतापुर, झांसी, हमीरपुर जैसे कई ज़िलों के हज़ारों किसानों ने कार्यक्रम में हिस्सा लिया। कार्यक्रम में किसान मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद सिंह, पूर्व केन्द्रीय मंत्री कमल मुरारका, राष्ट्रीय महामंत्री किसान मंच, नागेन्द्र नागमणि किसान नेता बिहार, उमेश तिवारी किसान नेता मध्य प्रदेश, चन्द्र जैन किसान नेता दिल्ली, नृपेन्द्र सिंह चौहान अध्यक्ष किसान मंच मध्य प्रदेश ने भी भाग लिया।

कार्यक्रम के दौरान पूर्व केन्द्रीय मंत्री कमल मुरारका को किसान मंच का राष्ट्रीय संयोजक बनाया गया, साथ ही किसान मंच की हिन्दी मासिक पत्रिका 'किसान सत्ता' का विमोचन भी अतिथियों द्वारा किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ दीप प्रज्जवलन एवं संगीत प्रस्तुति राष्ट्रीय आल्हा गायक रामेश्वर आजाद ने अपनी मधुर आवाज की मनमोहक प्रस्तुति से किया। वहीं लेखक व निर्देशक अनिल गुरु के लघु नाटक 'दास्तां किसानों की' का मंचन ने दर्शकों को किसानों की दुर्दशा पर सोचने पर मजबूर कर दिया। लखनऊ कलाकार एसोसिएशन के कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति से दर्शकों को भावविभोर कर दिया।

कमल मोरारका ने मुख्य अतिथि के रूप में कहा, ''देश में किसान उपेक्षित है। किसान हितों की बात उठाने को कही कोई बड़ा मंच नही था। किसान मंच ने इस कार्य को बखूबी अंजाम दिया है। हम स्मार्ट शहर की बात करते हैं, तबकि हमे स्मार्ट गाँव बनाने की बात करनी चाहिए।"

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