UP: कासगंज में कर्फ्यू के बीच फिर भड़की हिंसा, बसें फूंकी, दुकानोें में तोड़फोड़

UP: कासगंज में कर्फ्यू के बीच फिर भड़की हिंसा, बसें फूंकी, दुकानोें में तोड़फोड़बास में आगजनी।

लखनऊ। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कासगंज में आज सुबह दो दुकानों में तोडफोड़ की गयी। दो बसों में आग भी लगा दी गयी। पुलिस ने बताया कि दो दुकानों में तोडफोड़ के बाद आग लगाने की कोशिश की गयी, जिसके बाद दमकल की गाड़ियां मौके पर बुला ली गयीं। पुलिस के मुताबिक कासगंज थाने में शिकायत दर्ज कर ली गयी है और घटना में शामिल नौ लोग अब तक गिरफ्तार किये गये हैं। अन्य की गिरफ्तारी के प्रयास किये जा रहे हैं । विश्व हन्दिू परिषद और अखिल भारतीय वद्यिार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं द्वारा निकाली जा रही मोटरसाइकिल रैली पर कल पथराव के बाद हिंसा भडक उठी थी। पुलिस ने बताया कि कुछ अज्ञात शरारती तत्वों ने गणतंत्र दिवस के मौके पर निकाली गयी मोटरसाइकिल रैली पर पथराव कर दिया था।

गणतंत्र दिवस के मौके पर उत्तर प्रदेश के कासगंज में तिरंगा यात्रा को लेकर दो गुटों के बीच हुए बवाल के बाद एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। इसके बाद पूरे इलाके में कर्फ्यू लगा दिया गया। लेकिन अब हालात काबू में हैं। हिंसा में चंदन गुप्ता नाम के युवक की मृत्यु हो गई है, आज सुबह अंतिम संस्कार किया गया। युवक की मौत पर मुख्यमंत्री ने अफसोस जाहिर करते हुए कहा कि हम हर संभव युवक के परिजनों की मदद करने की कोशिश करेंगे। चंदन की मृत्यु के बाद उनके परिजनों को मुआवजे की मांग की जा रही है। वहीं आज होने वाले अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में लोगों के जुटने की संभावना है, जिसको लेकर प्रशासन काफी चुस्त है और इसपर अपनी नजर बनाए हुए है।

वहीं इस घटना के संबंध में कासगंज कोतवाली ने कार्रवाई करते हुए नौ लोगों को गिरफ्तार किया है। इसके अलावा विशेष टीम बनाकर और आरोपियों को गिरफ्तार करने का प्रयास किया जा रहा है।

शुक्रवार को हुई हिंसा के बाद यहां भारी पुलिस बल तैनात किया गया था, जिसके बाद यहां हिंसा काबू में आ गई है। इस हिंसा में कल एक व्यक्ति की मौत हो गई थी, जबकि कुछ लोग घायल हो गए थे। कासगंज की घटना के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शांति और सद्भाव बनाए रखने की अपील की थी, साथ ही पुलिस को निर्देश दिए थे कि उपद्रवियों के खिलाफ सख्ती से निपटा जाए। घटना के बाद पुलिस ने कई लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है।

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हिंसा कासगंज के थाना कोतवाली क्षेत्र के बलराम गेट के पास हुई थी। हिंसा के बादद एडीजी आनंद कुमार ने बताया था कि कई लोगों को हिरासत में ले लिया गया है और लोगों से पूछताछ की जा रही है, उन्होंने कहा कि इस मामले में जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। आनंद कुमार ने बताया कि मथुरा-बरेली राजमार्ग के बिलराम गेट चौराहे पर रैली के दौरान दो गुट आपस में भिड़ गए थे, जिसके बाद दोनों पक्ष की ओर से पत्थरबाजी हुई थी और नारेबाजी की गई। वहीं अलीगढ़ मंडल के पुलिस महानिरीक्षक संजीव गुप्ता ने बताया कि कुछ आसामाजिक तत्वों ने पथराव किया था, जिसके बाद दूसरे जिले से पुलिस बल को मंगाया गया था और इलाके में कर्फ्यू लगा दिया गया है।

ऐसे बिगड़े हालात

26 जनवरी को कासगंज शहर के बडडू नगर मोहल्ले में तिरंगा यात्रा को लेकर दो वर्गों के युवक भिड़ गए। युवकों के बीच कहासुनी के बाद मारपीट और पथराव के बाद फायरिंग भी शुरू हो गई। जिसमें दो लोगों को गोली लगी और गंभीर रूप से घायल चंदन की मौत हो गई। पुलिस ने दोनों वर्ग से आधा दर्जन लोगों को अपनी हिरासत में लिया है। इसके बाद भी शहर में तनाव बरकरार है। बवाल के दौरान लोगों ने कबाड़ में भी आग लगा दी। आनन-फानन में आग पर काबू पाया गया। इस बवाल के कारण आगरा-मथुरा की ओर से आने वाले वाहनों का मार्ग बदला गया है।

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एक वर्ग के युवा तीन दर्जन बाइकों पर तिरंगा यात्रा एवं जुलूस निकाल रहे थे। तिरंगा यात्रा का काफिला जब शहर के बड्डू नगर मोहल्ले में पहुंचा, तो वहां मौजूद दूसरे वर्ग के युवकों ने किसी बात को लेकर उनका विरोध किया। इसके बाद दोनों वर्गों के युवकों के बीच विवाद शुरू हो गया और मारपीट व पथराव शुरू हो गया। मारपीट व पथराव तेज होने की वजह से तिरंगा यात्रा निकाल रहे युवक बाइक छोड़ भाग खड़े हुए। इस दौरान किसी ने दो फायर भी किए। जिससे शहर में तनावपूर्ण स्थित पैदा हो गई। पथराव में मथुरा-बरेली हाईवे से गुजर रहा एक ट्रक, दो मैजिक व तीन स्कार्पियो कार क्षतिग्रस्त हुई हैं। पुलिस अधिकारी मौके पर हैं।

यूपी में नहीं थम रही हिंसा

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में पांच मई 2017 को भी ऐसी ही एक जातीय हिंसा हुई। सहारनपुर से 25 किलोमीटर दूर शिमलाना गांव में पांच मई को महाराणा प्रताप जयंती का आयोजन था, जिसमें शामिल होने के लिए पास के शब्बीरपुर गांव से कुछ लोग शोभा यात्रा निकाल रहे थे। विवाद की शुरुआत इसी घटना से हुई। बाद में बसपा सुप्रीमो मायावती के दौरे के बाद हिंसा और भड़क गयी थी, जिसमें एक व्यक्ति की मौत भी हो गयी थी। हिंसा भड़काने के अरोप में भीम आर्मी के मुखिया चन्द्रशेखर आजाद उर्फ रावण को हिमाचल प्रदेश में गिरफ़्तार किया गया। बाद ऐसी भी खबरें भी आयीं कि चंद्रशेखर के राजनीतिक संबंध मायावती से थे। भाजपा ने तो यहां तक आरोप लगाये थे कि हिंसा बसपा के इशारे पर हुआ था।

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साल 2013 में मुजफ्फरनगर में हुए सांप्रदायिक दंगों में करीब 63 लोग मारे गए थे और 50 हजार से भी ज्यादा लोग विस्थापित हो गए थे। इस दंगे ने पूरे देश में राजनीतिक बहस शुरू कर दी थी और तत्कालीन समाजवादी पार्टी की सरकार की खूब किरकिरी हुई थी। इस मामले में दोनों पक्षों की ओर से खूब राजनीति हुई। मारे गए लोगों के लिए महापंचायत हुई। नंगला मंदौड़ में हुई महापंचायत में भारतीय जनता पार्टी के स्थानीय नेताओं पर यह आरोप लगा की उन्होंने जाट समुदाय को बदला लेने को उकसाया। वहीं आजतक के स्टिंग ऑपरेशन में पता चला था कि तत्कालीन मंत्री आज़म खान के आदेश पर पुलिस अफसरों ने विशेष समुदाय के दोषी लोगों को छोड़ा था।

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