गोरखपुर : डॉक्टरों का दर्द- ‘काफी दबाव में करना पड़ता है काम, कभी-कभी खाने पड़ते हैं जूते’

गोरखपुर : डॉक्टरों का दर्द- ‘काफी दबाव में करना पड़ता है  काम, कभी-कभी खाने पड़ते हैं जूते’बीआरडी अस्पताल के अलावा 200 किमी दूर-दूर तक इंसेफ्लाइटिस के इलाज का दूसरा अस्पताल नहीं है।

गोरखपुर। बच्चों की मौत के बाद गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज पर लगातार सवाल उठ रहे हैं, यहां की व्यवस्था पर सवाल उठाया जा रहा है, लेकिन इसका दूसरा पहलू यह भी है कि इस अस्पताल के अलावा 200 किमी दूर-दूर तक इंसेफ्लाइटिस के इलाज का दूसरा अस्पताल नहीं है।

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यहां के डॉक्टरों और स्टाफ पर हमेशा ही दबाव रहता है, किन परिस्थितियों में यहां के डॉक्टर काम करते हैं यह जानने के लिए गाँव कनेक्शन ने बीआरडी मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. पीएन श्रीवास्तव से बात की। उन्होंने अपने 30 वर्ष के करियर के अनुभव को साझा करते हुए बताया, “अस्पताल के ऊपर बहुत ज्यादा दबाव है, जिसकी वजह से मरीज को ज्यादा समय दे पाना संभव नहीं होता।

अगर हम एक मरीज को देखने में 10 से 15 मिनट रखें, तो मरीज को अच्छे तरीके से देख सकते हैं, लेकिन यहां पर डॉक्टर से ज्यादा जल्दी तो मरीज को रहती है। मरीज के परिजन कभी-कभी डॉक्टर से मारपीट पर भी उतारू हो जाते हैं। अस्पताल में कोई भी नियम नहीं रह गया है क्योंकि अस्पताल के ऊपर बहुत ज्यादा दबाव है और अस्पताल में काफी दूर-दूर से मरीज आते हैं।

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वर्ष 1994 से इस मेडिकल कॉलेज में कार्यरत डॉ. श्रीवास्तव जब बात कर रहे थे तो उनकी आंखों में आंसू आ गए। “लोग डॉक्टर को भगवान मानते हैं, लेकिन यहां तो कई बार हमें जूता भी खाना पड़ता है। कई बार हमारे ऊपर मरीजों के परिजन बेवजह का दबाव डालते। अस्पताल में हमारे लिए कोई सुरक्षा भी नहीं है। पुलिस सिर्फ मूक दर्शक बन कर तमाशा देखती है।”

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