स्कूलों में नहीं बंट पाए स्वेटर, कड़ाके की ठंड में ठिठुर रहे बच्चे

स्कूलों में नहीं बंट पाए स्वेटर, कड़ाके की ठंड में ठिठुर रहे बच्चेबिना स्वेटर जमीन पर बैठकर पढ़ाई कर रहे बच्चे।

उत्तर प्रदेश के परिषदीय स्कूलों में अभी तक स्वेटर न मिलने के कारण बच्चे सर्दियों में ऐसे ही स्कूल आ रहे हैं, जबकि स्वेटर बंटने के योजना का आदेश अगस्त माह में ही सरकार ने किया था।

प्राथमिक विद्यालयों में सरकारी योजनाओं के तहत बच्चों को अभी तक निशुल्क शिक्षा, मिड-डे मील और किताबों की सुविधाएं मिल रही थी। लेकिन पहली बार सरकार ने बच्चों को जूते व स्वेटर देने का भी ऐलान किया था। योजना को पांच माह हो गए, दिसबंर की ठंड भी बीत गई और बच्चे फटे पुराने स्वेटरों के सहारे जाड़ा काट रहे हैं।

बाराबंकी जिले के प्राथमिक विद्यालय भटेहटा के बच्चों को अभी तक स्वेटर नहीं मिले हैं। वहां के प्रधानाचार्य प्रदीप कुमार बताते हैं, “पहली बार ये योजना लागू की गई है ये अच्छी बात है। पारदर्शिता लाने के लिए सरकार ने जो प्रक्रिया बनाई है उसके चलते इस बार थोड़ी देरी हुई है। कुछ बच्चे ऐसे थे जो स्वेटर पहन कर ही नहीं आते थे उनको कुछ संस्थाओं ने स्वेटर दिए हैं।”

देशभर में शैक्षिक गणना करने वाली संस्था राष्ट्रीय शैक्षिक प्रबंधन सूचना प्रणाली (डीआईएसई) के अनुसार उत्तर प्रदेश में प्राइमरी स्कूलों की संख्या 1,53,220 है और माध्यमिक स्कूलों की संख्या 31,624 है। राज्य सरकार द्वारा सरकारी प्राइमरी स्कूलों में बांटे जाने वाले स्वेटर के लिए 390 करोड़ रुपये के अतिरिक्त बजट को मंजूरी भी दी गई थी जिसके तहत कक्षा 1 से 8 तक के 1.54 करोड़ बच्चों को निशुल्क स्वेटर मिलना है।

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अन्य जिलों का भी यही हाल

औरेया जिले में पूर्व माध्यमिक के 453 और प्राथमिक के 1063 विद्यालय है। इन विद्यालयों में पढ़ने वालों की संख्या 10,5161 है। कड़ाके की ठंड के बीच चलने वाली पछुआ हवाओं ने जहां गलन बढ़ा दी है वहीं इस ठंड के बीच बच्चों के पास जूते-मोजे व स्वेटर का न होना उनकी सेहत के लिए भी खतरा है।

प्राथमिक विद्यालय रूरूगंज की कक्षा चार की छात्रा कनिष्का (9वर्ष) का कहना है, “सर मुझे ठंड बहुत लगती है स्वेटर है नहीं लेकिन फिर भी स्कूल जाते हैं इसलिए कि कहीं मेरा कोर्स न पिछड़ जाए।” वहीं प्राथमिक विद्यालय धुपकरी में पढ़ने वाली कक्षा चार की छात्रा मुस्कान (8वर्ष) का कहना है, “मम्मी ने नया स्वेटर बनाया नहीं और स्कूल से भी नहीं मिला है पुराना स्वेटर फटा इसलिए पहन कर नहीं आते हैं।”

कन्नौज जिले में बिना स्वेटर के कक्षाओं में बैठे बच्चे।

टेंडर की प्रक्रिया के चलते हुई देरी

बीएसए एसपी यादव से बच्चों को स्वेटर न मिलने के संबंध में बात की गई तो उन्होंने बताया, “शासन से टेंडर होने में देरी हुई है इसलिए बच्चों को स्वेटर नहीं मिल पाए हैं। टेंडर होने की प्रक्रिया चल रही है शासन स्तर से जनवरी माह के पहले सप्ताह में बच्चों को स्वेटर दे दिए जाएंगे।”

जिला मुख्यालय कन्नौज से करीब 28 किमी दूर गुगरापुर ब्लॉक क्षेत्र के सद्दूपुर गांव निवासी राकेश कुमार (42वर्ष) बताते हैं, ‘‘गांव के प्राथमिक स्कूल में दो बच्चे जाते हैं। एक कक्षा तीन में और दूसरा कक्षा एक में पढ़ता है। स्कूल में बच्चों से कहा गया कि स्वेटर मिलेंगे लेकिन अभी तक स्वेटर नहीं मिला। अभी वो घरेलू कपड़े पहनकर काम चला रहे हैं।’’

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प्राथमिक विद्यालय यूसुफपुर भगवान की इंचार्ज हेडमास्टर अनीता तिवारी बताती हैं, ‘‘बच्चे बिना स्वेटर के ही स्कूल आते हैं। गरीब घर के लोग ही यहां अपने बच्चों को भेजते हैं जब उन्हें पता है सरकार देगी तो उन्होंने खरीदा भी नहीं।”

कन्नौज के उर्मदा के खंड शिक्षा अधिकारी जय सिंह बताते हैं, ‘‘ बस्ते बंट रहे हैं, जूता-मोजा भी बंटने के लिए सत्यापन कराया जा रहा है। स्वेटर बांटने के लिए अभी तक कोई आदेश नहीं आया है। इसकी कोई टेण्डर प्रक्रिया नहीं शुरु हुई है।’’

विपक्ष ने किया तंज

प्रदेश के स्कूलों में स्वेटर न बंटने पर पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने ट्वीट के जरिए कहा, “सरकार बार-बार स्वेटर के टेंडर कैंसल कर रही है और स्कूल के बच्चे सरकार की तरफ़ से दिए जाने वाले स्वेटर का इंतजार। कहीं ऐसा न हो कि इधर बच्चे झूठी उम्मीदों की आग तापते ही रह जाएं और उधर टेंडर की प्रक्रिया पूरी होते-होते मई-जून आ जाए।”

मंत्री ने लिया फैसला

स्कूलों में स्वेटर बंटने मु हुई देरी पर बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री अनुपमा जायसवाल ने कहा कि सरकार ने अपने वादे के हिसाब से बच्चों को जूते-मोजे बांट दिए हैं। तकनीकी कारणों से स्वेटर मिलने में देरी हो रही है। इसलिए जब तक बच्चों को स्वेटर मिलने शुरू नहीं होंगे तब तक वो भी स्वेटर नहीं पहनेंगी।

(अतिरिक्त सहयोग: इश्त्याक खान व अजय मिश्रा)

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