सिर्फ एक रुपए बढ़ी मनरेगा मजदूरी 

सिर्फ एक रुपए बढ़ी मनरेगा मजदूरी उत्तर प्रदेश में मनरेगा मजदूरी में एक रुपये की बढ़ोतरी की है।

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में मनरेगा मजदूरी में एक रुपये की बढ़ोतरी की है।योजना के तहत अभी तक मजदूरी 174 रुपये थी, लेकिन अब 175 रुपये हो गई है। ग्राम्य विकास विभाग द्वारा इसका शासनादेश जारी किया है। बढ़ी हुई मजदूरी एक अप्रैल 2017 से प्रभावी हो चुकी है।

संयुक्त आयुक्त मनरेगा एसकेएस चन्दौल ने कहा, मनरेगा मजदूरी एक रुपये बढ़ाई गई है। भारत सरकार ने इस फैसले को लिया है। इसके लिए जीओ जारी हो गया है। दूसरी ओर, जिला मुख्यालय से 23 किलोमीटर दूर पूर्व दिशा के गाँव महिठा में काम कर रहे कर रहे मनरेगा मजदूर बिहारी कुमार बताते हैं, “इतनी महंगाई में एक रुपये बढ़ाने से मनरेगा मजदूरों पर क्या असर पड़ेगा। मनरेगा मजदूर इतनी मेहनत कर रहा है, उसके बावजूद भी उसकी मजदूरी में एक रुपये की बढ़ोत्तरी की गई।

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वहीं, बक्शी का तालाब तहसील के चन्दनपुर गाँव के राकेश रावत मनरेगा मजदूर बताते हैं, मनरेगा का काम करने से अच्छा शहर में मजदूरी कर लें। पिछले साल काम का पैसा नहीं मिला। इतने दिन बाद एक रुपया बढ़ा है। एक रुपये में कौन सी बचत और खर्च किया जा सकता है। सरकार गरीब आदमी का मजाक बना रही है। बता दें कि उत्तर प्रदेश में महात्मा गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी (मनरेगा) के तहत इस माह का डाटा 158.3 लाख है, कुल मनरेगा मजदूरों की संख्या 227.34 लाख है।

इसके अलावा काकोरी ब्लॉक के कल्लू राम (65 वर्ष) बताते हैं,” जुलाई में जो काम किया उसका भी पैसा नहीं मिला। उसके बाद 8 दिन फरवरी माह में काम किया उसका भी पैसा हमें नहीं मिला है, मेरी पत्नी भी मनरेगा के तहत काम करती है। मजदूरी में एक रुपया बढ़ाया है। दो रुपये में हम दोनों क्या कर लेंगे। बलिया जिला मुख्यालय से 27 किलोमीटर दूर रक्तसर ग्राम पंचायत की मनरेगा महिला मजदूर निर्मला (31 वर्ष) बताती हैं, “हम लोग मनरेगा मजदूरी करके अपना घर कैसे चलाते हैं, ये कोई नहीं जानता। एक दिन काम नहीं करेंगे तो घर में रोटी नहीं मिलेगी। हम गरीबों की जितनी भी उम्मीदें होती हैं, वो सब सरकार से होती है। एक रुपये में सरकार अपने लिए क्या खरीद सकती ये बताये क्या सोच कर एक रुपया बढ़ाया है।

न बढ़ाते तो इतना दु:ख नहीं होता

हरदोई जिला मुख्यालय से 40 किमी दूर भरावन गाँव के प्रधान सुधीर रावत (34वर्ष) बताते हैं, पैसा न बढ़ाते तो इतना दुख नहीं होता जितना एक रुपये बढ़ाने से हुआ है। सरकार को हमारी हालातों से कुछ लेना देना नहीं, इसलिए वो ऐसा करती है। मेरे गाँव में मनरेगा मजदूर काम नहीं करना चाहते क्योंकि समय पर पैसा नहीं मिलता। मई में जो काम किया था उसका लोगों का पैसा अभी तक नहीं मिला है।

इससे अच्छा शहर में मजदूरी कर लें

बाराबंकी जिला मुख्यालय से 30 किलोमीटर दूर बबुरी गाँव में रहने वाले रमेश चन्द्र यादव (55 वर्ष) बताते हैं ‘’तीन साल से इस गाँव में लगातार काम कर रहे हैं, लेकिन पैसा काफी दिनों से नहीं मिल रहा है। उसके बाद सरकार ने एक रुपया मजदूरी बढ़ाई है। सरकार बस बातें करती हैं। विश्वास नहीं हो रहा है कि एक रुपया मजदूरी बढ़ी है। इससे अच्छा शहर में मजदूरी कर लें।”

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