पढ़िए क्यों उत्तर प्रदेश के 56 सांसदों, जिला प्रभारियों ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र...

अब तक उत्तर प्रदेश के 56 सांसदों ने इस समस्या के निस्तारण के लिए मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है, लेकिन हालत जस की तस बनी हुई है...

पढ़िए क्यों उत्तर प्रदेश के 56 सांसदों, जिला प्रभारियों ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र...

लखनऊ। प्रदेश के अधिकांश जनपदों में रोजगार सेवकों को मानदेय का भुगतान नहीं मिला, जिसके लिए प्रदेश स्तर पर रोजगार सेवक बराबर संघर्ष करने पर मजबूर हैं। लम्बे समय से अपनी मांगों को लेकर धरना प्रदर्शन, आन्दोलन कर रहे, ग्राम रोजगार सेवक अब अपने सांसद की चौखट तक पहुंच गये हैं।

रोजगार सेवक संघ के प्रदेश अध्यक्ष भूपेश कुमार सिंह के मुताबिक उत्तर प्रदेश के लगभग 38 हजार रोजगार सेवक व्यवस्था के शिकार हो गये हैं। उत्तर प्रदेश के 56 सांसदों ने अब तक रोजगार सेवकों की समस्या के निस्तारण के लिए मुख्यमंत्री को संबोधित पत्र लिखा है, जिसे 8 सूत्रीय मांगो के साथ जिलेवार रोजगार सेवकों ने मुख्यमंत्री कार्यालय स्पीड पोस्ट किया है।

आखिर हमारा कसूर क्या है .....

उत्तर प्रदेश के जनपद आज़मगढ़ के रोजगार सेवक और रोजगार सेवक संघ के जिलाध्यक्ष प्रदीप सिंह बताते है, "वर्ष 2006 में नौकरी शुरू की थी सोचा था कि भविष्य बेहतर होगा 12 साल से पूरी जिम्मेदारी से अपने पद का निर्वहन कर रहें है। शुरू में रोजगार सेवक का पैसा ग्राम पंचायत से मनरेगा के खाते से ही मिलता था और समय से मानदेय मिल जाता था। बाद में रोजगार सेवकों का पैसा ब्लाक स्तर से मिलना शुरू हो गया, तब भी 2-3 महीने में मानदेय मिल जाता था,पिछली सरकार में रोजगार सेवकों के मानदेय की वृद्दि हुई, लेकिन तब से अब तक मानदेय नही मिला।"

वो आगे कहते हैं, "रोजगार सेवको की आर्थिक स्तिथि तो कमजोर हुई ही है, साथ ही सामाजिक स्तर पर भी रोजगार सेवक उपहास का पात्र बनते जा रहे है। जिसके चलते तनाव में आकर रोजगार सेवक आत्महत्या तक कर रहें हैं। अभी कुछ दिन पूर्व ही आर्थिक तंगी से जूझ रहे सुल्तानपुर शेषनाथ यादव ने फ़ासी लगा ली। इतने साल सेवा के बाद हमें सिर्फ आर्थिक तंगी ,जलालत हाथ लगा है ,कोई रोजगार सेवक शौक में धरना प्रदर्शन आन्दोलन में पुलिस की लाठी खाने नहीं जाता, ये करना हमारी नियति बन गयी हैं।समझ में नही आता की आखिर हमारा कसूर क्या हैं।"

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सवाल प्रदेश के 37 हजार परिवारों की रोजी रोटी का हैं : भूपेश

रोजगार सेवक संघ के प्रदेश अध्यक्ष भूपेश कुमार सिंह ने बताया की विधान सभा चुनाव के दौरान भारतीय जनता पार्टी ने चुनाव घोषणा पत्र में प्रदेश के रोजगार सेवकों को बहुत से सपने दिखाए थे,यही नही लिखित रूप में और सार्वजनिक मंचो से भी इसकी घोषणा की गयी। लेकिन सरकार आने के बाद रोजगार सेवकों की स्तिथि में सुधार आने के बजाय हालात और बदतर हो गये है। प्रदेश के 37 हजार रोजगार सेवकों के परिवार भुखमरी के कगार पर पहुच गये है। रोजगार सेवक बराबर अपने परिवार की रोजी –रोटी और अस्तित्व को बचाने की लड़ाई लड़ रहें हैं। बीते दो साल में 100 से ज्यादा रोजगार सेवक आर्थिक तंगी ,गृहकलह के चलते दम तोड़ चुके है। पिछले दो साल में अधिकारियों से लेकर मुख्यमंत्री तक हर चौखट के चक्कर लगाये, लेकिन मामला आश्वासन के आगें नहीं बढ़ पाया। न्याय और मदद की उम्मीद में रोजगार सेवक सांसदों की चौखट पर है और सांसदों के माध्यम से सरकार से रोजगार सेवकों के अस्तित्व को बनाये रखने की अपील सरकार से की गयी है।

"अनुपूरक बजट में संविदा कर्मियों के मानदेय के लिए 100 करोड़ रूपये मिले है जो की उन्हें दिया जा रहा है शेष जो मानदेय धनराशी है उम्मीद है की अगले अनुपूरक बजट में वो भी मिल जाएगी मांग की जो 8 बिंदु थे उनका अध्यन करने के बाद बिन्दुवार सुझाव व् प्रस्ताव शाशन को भेजे है जिन पर अभी कोई स्पष्ट आदेश नहीं मिला हैं।"
योगेश कुमार (अपर आयुक्त मनरेगा) उत्तर प्रदेश

इन सांसदों ने की रोजगार सेवकों के समर्थन में सरकार से अपील

रोजगार सेवकों की समस्याओ को देखते हुए उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री व् संसद सदस्य जगदम्बिका पाल, मोहनलाल गंज के सांसद कौशल किशोर, फ़ैजाबाद के सांसद लल्लू सिंह, बासगाँव के सांसद कमलेश पासवान,अंशुल वर्मा सांसद हरदोई सहित सहारनपुर कुशीनगर, महाराजगंज, गोरखपुर, फैजाबाद, बहराइच, गोंडा, सुलतानपुर, भदोही, सीतापुर, रायबरेली, बाराबंकी ,अमेठी कानपुर नगर, कानपूर देहात ,कन्नौज, शाहजहाँपुर, फिरोजाबाद, इलाहाबाद, बदायू, अमरोहा, मैनपुरी, अम्बेडकरनगर, रामपुर, अलीगढ, हाथरस बस्ती,देवरिया, श्रावस्ती, पीलीभीत, जालौन, बलरामपुर, संभल, हरदोई,आजमगढ़, लखीमपुर खीरी सहित 56 सांसदों/भाजपा जिला अध्यक्षों ने रोजगार सेवकों के समर्थन में मुख्यमंत्री को पत्र लिखा हैं।

विधानसभा में भी उठाया गया संविदाकर्मियो का मामला

उत्तर प्रदेश के मलिहाबाद विधान सभा की विधायक जय देवी कौशल ने उत्तर प्रदेश के समस्त विभागों में कार्यरत संविदाकर्मियों का समर्थन करते हुए रोजगार सेवक, आंगनबाडी इत्यादि सभी संविदा कर्मियों को सम्मानित वेतन, सुविधाएं और स्थातित्व देने की मांग को विधान सभा में उठाया है।

"संविदा कर्मी अन्य सरकारी कर्मचारियों की तरह ही उनके बराबर काम कर रहे है, लेकिन वेतन और सुविधायो में जमींन–आसमान का अंतर है। ये व्यवस्था मानवीय नजरिये से भी सही नहीं है,संविदाकर्मी बराबर अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हैं,उन्हें उनका हक मिलना चाहिए।"
जय देवी कौशल, विधायक, मलिहाबाद

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ये है रोजगार सेवकों की आठ सूत्रीय मांगें.....

  • 1-ग्राम रोजगार सेवकों को भारत सरकार के श्रम व रोजगार मंत्रालय अधिसूचना नई दिल्ली दिनांक 28 अगस्त 2017 के अनुसार न्यूनतम मानदेय 24000 रुपये दिया जाये।
  • 2-ग्राम रोजगार सेवकों के जॉब चार्ट में मनरेगा के अतिरिक्त अन्य कार्यो को जोड़कर योगदान लेते हुये ग्राम विकास सहायक/सह सचिव का दर्जा दिया जाये।
  • 3-प्रदेश के समस्त ग्राम रोजगार सेवकों को कर्मचारी भविष्य निधि का लाभ देने के साथ स्वास्थ्य,दैवीय आपदा एवं दुर्घटना से बचाव हेतु बीमा का लाभ दिया जाये।
  • 4-प्रदेश के समस्त ग्राम रोजगार सेवकों का वित्तीय वर्ष 2016-17 व 2017-18 के प्रारंभ से अब तक का लंबित मानदेय का तत्काल भुगतान किया जाए।
  • 5-ग्राम विकास अधिकारी/ग्राम पंचायत अधिकारी की भर्ती में 12 वर्ष के अनुभव के आधार पर वरीयता दी जाये।
  • 6-राज्य वित्त आयोग,चौदहवें वित्त आयोग को मनरेगा से अभिसरित करने के लिए मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश शासन द्वारा जारी किये गए शासनादेश दिनांक-16/05/2017 को कठोरता से सभी ग्राम पंचायतों में लागू कराया जाए।
  • 7-मनरेगा योजना लागू होने के बाद नवसृजित व् सीमा विस्तार वाली नगर निकायों में शामिल हो चुके ग्राम पंचायतो के ग्राम रोजगार सेवकों की रिक्त ग्राम पंचायतो में समायोजित किया जाए।
  • 8-ग्राम रोजगार सेवकों को ग्राम पंचायतो से नियंत्रण मुक्त करके फर्जी प्रस्ताव के आधार पर पद से हटाए गये रोजगार सेवकों को बहाल किया जाए और पारदर्शिता युक्त कार्य के लिए ग्राम रोजगार सेवकों को एक ग्राम पंचायत से दुसरे ग्राम पंचायत में स्थान्तरित किया जाए।


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