कम कीमत में ज्यादा मुनाफे के लिए करें सूकर पालन

Diti BajpaiDiti Bajpai   29 Dec 2018 12:31 PM GMT

कम कीमत में ज्यादा मुनाफे के लिए करें सूकर पालन

लखनऊ। सुनील कुमार सिंह ने पांच वर्ष पहले सूकर पालन व्यवसाय को शुरू किया था, आज वह इस व्यवसाय से अपने बच्चों को न सिर्फ अच्छी शिक्षा दिला पा रहे हैं, बल्कि उन्होंने आस-पास के लोगों को भी सूकर पालन से जोड़ा है।

मऊ जिले के दिगेड़ा गाँव में रहने वाले सुनील का एक एकड़ में फार्म बना हुआ है, जिसमें करीब 150 सूकर हैं। सुनील बताते हैं, "जब शुरू किया था तब 10 सूकर ही थे, आज फार्म में 130 सूकर के बच्चे, 25 मादा और 2 नर हैं। इन सभी को रखने के लिए 30 बाई 10 के 10 कमरे भी बनवा रखे हैं।''

सूकर पालन से कम कीमत और कम समय में अधिक मुनाफा प्राप्त किया जा सकता है। एक मादा सूकर एक ब्यात में लगभग 8 से 12 बच्चों को जन्म देती है। इतना ही नहीं, एक सूकरी से वर्ष में दो बार बच्चे लिए जा सकते हैं। अगर इनको सही तरह से खिलाया जाए और सही तरीके से देखभाल की जाए तो इनसे काफी लाभ कमाया जा सकता है।


सूकर पालन से होने वाले मुनाफे के बारे में सुनील बताते हैं, "एक दिन में एक व्यस्क पशु पर 20 से 25 रुपए का खर्चा आता है अगर आप उसको अच्छा आहार देते हैं। शुरू में इस व्यवसाय से 40 से 45 प्रतिशत ही मुनाफा होता था, लेकिन धीरे-धीरे बढ़कर 70 से 80 प्रतिशत हो गया।''

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सुनील सूकर पालन व्यवसाय से सालाना लाखों की कमाई कर रहे हैं, साथ ही उनको देखकर आस-पास के लोगों ने भी शुरू किया है। ''जब मैंने इस व्यवसाय को शुरू किया था तब गाँव में कोई नहीं करता था, लेकिन अब चार से पांच लोग इस व्यवसाय को कर कर रहे हैं।'' सुनील ने बताया।

उन्नीसवीं पशुधन गणना 2012 में देश में सूकरों की संख्या 10.29 मिलियन है। लगातार बढ़ रहे सूकर पालन के व्यवसाय के बारे में बरेली के केवीके प्रधान वैज्ञानिक डॉ बी.पी. सिंह बताते हैं, "सूकर पालन कम खर्च में ज्यादा मुनाफा देने वाला व्यवसाय है इसलिए लोगों की तरफ इसका रुझान बढ़ रहा है। हमारे केंद्र में इसके लिए किसानों को प्रशिक्षण दिया जाता है।"

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इस तरह शुरू करें सूकर पालन

आवास की व्यवस्था दो प्रकार की होती है-

सूकर आवास

जहां तक संभव हो सूकरों का आवास जिस जगह पर बनाया जाये, वह सूखी और जमीन से थोड़ी ऊंचाई पर हो। आवास को कम से कम खर्च में बनाना चाहिए। आवास के लिए पर्याप्त पानी, रोशनी आदि की समुचित व्यवस्था होनी चाहिए।

बंद आवास

इस प्रकार के आवास में सूकर रखने से उन्हें कम कसरत करनी पड़ती है। इस कारण वे मोटे जल्दी होते हैं। इस प्रकार के आवास में वो सूकर रखे जाते हैं, जिन्हें जल्दी मोटा करना होता है। एक बड़े सूकर को 8-10 वर्ग फीट जगह चाहिये, जिसमें वो रह सकें, अगर उनके मल-मूत्र का स्थान उनके रहने के स्थान से बाहर है तो 6-8 वर्ग फीट स्थान की आवश्यकता है व बाकी स्थान 2 वर्ग फीट मल-मूत्र के लिए रखा जाये। छोटे सूकरों को कम जगह की आवश्यकता होती है उन्हें 5-6 वर्ग फीट जगह पर्याप्त है।

खुला आवास

खुला आवास हर प्रकार से ठीक रहता है, ऐसे आवास को सूकर पंसद भी ज्यादा करते हैं। एक सूकरी के बच्चे के लिए 6'*7' जगह की आवश्यकता होती है। इसके लिए खेत या जमीन में एक बाड़ा बना दिया जाये, बाहर दीवार पक्की, कांटेदार तार या बाड़ द्वारा बनाई जा सकती है। सबसे किफायती चार दीवारी कांटेदार बाड़े की होती है क्योंकि यह आसानी से व कम खर्च में तैयार हो जाता है। दरवाजा लोहे का बनाये ताकि जानवर बाहर न जा सके। खाने के लिए फीडिंग टब्स लकड़ी या लोहे के बनाये जाये, जिन्हें साफ किया जा सके। फीडिंग टब्स सतह से 9 इंच ऊंचाई पर रहें ताकि सूकर आसानी से दाना खा सकें। पानी पीने के लिए एक पक्का होज बनाएं जो 6-7 इंच ऊंचाई हो ताकि पानी आसानी से पी सकें और आसानी से साफ किया जा सके।



नस्लें

इस व्यवसाय के लिए यह आवश्यक है कि अच्छी नस्ल के सूकर पाले जाएं जिनकी वृद्धि दर अधिक और उनका मांस अच्छी किस्म का हो।

लार्ज व्हाइट यार्क शायर

यह नस्ल लार्ज व्हाइट के नाम से जानी जाती है। इस नस्ल के जानवर बड़े और बढ़िया किस्म के मांस देने के लिए प्रसिद्ध हैं। इनका मुंह लम्बा, तश्तरीनुमा मुड़ा हुआ होता हैं, नथुने चौड़े होते हैं। इनका सीना चौड़ा और गहरा होता है। कमर लम्बी और चौड़ी होती है। इनकी पूंछ लंबी और उठी हुई होती है। त्वचा गुलाबी होती है। ये शांत स्वभाव की होती है और अपने बच्चों को अच्छी तरह रखती है। मादा एक ब्यात में 8-12 बच्चे देती है। ऐसी सूकरी न चुने जिसके 12 थन न हों।


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दाना की मात्रा

सूकर एक ऐसा जानवर हैं, जिसके दाने का कोई समय नहीं है। छोटे बच्चे के पास दाना हर समय रहना चाहिए। बच्चों को बड़ा होने तक उसे दिन में 2 या 3 बार दाना निम्नानुसार देना चाहिए-


सूकर की आयु

दाने की मात्रा

एक से दो महीने तक

आधा किलो

दो से तीन महीने तक

एक किलो

तीन से चार महीने तक

1.25 किलो

चार से पांच महीने तक

1.5 किलो

पांच से छह महीने तक

2.0 किलो

नर सूकर एवं गर्भित सूकरी

2.5 किलो


सूकर आहार

  • सूकर पालन में कुल लागत का 70-75 प्रतिशत उनके दाना पर व्यय होता है।
  • घरों, होटलों, छात्रावास, रसोई से बचे भोजन की झूंठन को सूकरों को खिला सकते हैं, लेकिन खिलाने से पहले इसमें से हानिकारक पदार्थ को हटा लें।
  • शीरा- यह बड़े जानवरों के लिए ऊर्जा का विशेष स्त्रोत है। बढ़ते सूकरों में राशन का 20 प्रतिशत और बड़े सूकरों में 40 प्रतिशत तक शीरा खिलाया जा सकता है।
  • बेकरी का बचा-खुचा सूखा पदार्थ भी सूकर राशन के रूप में दे सकते हैं।
  • शकरकंदी सूकरों का स्वादिष्ट आहार है और ऊर्जा का अच्छा स्त्रोत है। सूकर राशन का 30 से 50 प्रतिशत भाग इससे पूरा कर सकते हैं।
  • सब्जी मंडी की बची हुई सब्जियां, गाजर, चुकंदर, गोभी आदि भी सूकर आहार में मिलाए जा सकते हैं।
  • चावल की भूसी एवं पॉलिश भी सूकर आहार की 30 से 50 प्रतिशत तक पूर्ति कर सकता है, परंतु छोटे बच्चों को यह राशन नहीं खिलाना चाहिए।

सूकरों में क्रिमिनाशन



सूकर

क्रिमिनाशन का समय

सामान्य क्रिमिनाशक

मादा

प्रसव के दो हफ्ते के अंदर

एल्बेंडजोल

नर

प्रत्येक 6 मास

फेम्बेंडाजोल

शावक

पैदा होने के एक हफ्ते के अंदर

प्राजी क्विंटल और लेवमिसोल

गर्भ के दौरान

वीनिग के एक हफ्ते के अंदर

पयरेंटल और पाइप्राजीन


सरकार भी कर रही मदद

किसानों की आय बढ़ाने और सूकर पालन को प्रोत्साहन देने के लिए के लिए प्रदेश के सात जिलों में सूकर प्रजनन केंद्र बनाए गए हैं। इन केंद्रों में सूकरों के अच्छे बच्चे तैयार करके सूकर पालकों को नस्ल बढ़ाने के लिए दिये जाते हैं ताकि उनके मुनाफे को बढ़ाया जा सके। कोई सूकर पालन शुरू करना चाहता है या जिसके पास सूकर हों और उसे अच्छे नर की जरूरत है तो वह अपने जिले के मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी से संपर्क कर सकता है। साथ ही वह अपने ब्लॉक के डॉक्टर से भी संपर्क कर सकता है। सूकर प्रजनन केंद्र में शुरू करने वाले सूकर पालक को 3 मादा पर 1 नर मिलता है, जिसको वह आगे बढ़ाता है।


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