सूकर की यह नई नस्ल किसानों की कराएगी मुनाफा, आठ महीने में 100 किलो हो जाता है वजन

सूकर की यह नई नस्ल किसानों की कराएगी मुनाफा, आठ महीने में 100 किलो हो जाता है वजन

लखनऊ। किसानों की आय बढ़ाने के लिए भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) ने सूकर की नई संकर प्रजाति 'लैंडली' विकसित की है। अन्य प्रजाति की तुलना में सूकर की यह प्रजाति दोगुनी तेजी से बढ़ती है।

आईवीआरआई के पशुधन उत्पादन एवं प्रबंधन के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार गौर बताते हैं, "सूकर की इस नस्ल को प्रदेश के कई किसानों को दिया है, जिससे उन्हें लाभ भी हुआ है। इस नस्ल का आठ महीने में 100 किलोग्राम वजन हो जाता है, जबकि अन्य देसी सूकर आठ महीने में 30 से 35 किलो तक ही हो पाते है।''

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लैंडली प्रजाति को डेनमार्क की लैंडरस और बरेली की देसी नस्ल की सूकर के साथ क्रॉस से विकसित किया गया है। डेनमार्क की लैंडरेस को वर्ष 1971 में भारत लाया गया था। जलवायु अनुकूल न होने की वजह से ज्यादातर यह बीमार हो जाते थे। वर्ष 1988 में बरेली की देसी प्रजाति से इसे क्रॉस करके इन पर परीक्षण शुरू किया गया। लंबे समय के बाद लैंडरेंस के 75 और देसी प्रजाति के 25 फीसद जीन मिले और इस प्रजाति को विकसित किया गया।


डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार गौर बताते हैं, "यह नस्ल एक बार में 15 बच्चों को जन्म देती है और इनको 15 फीसदी तक किचन वेजीटेबल वेस्ट और एग्रो इंडस्ट्रियल वेस्ट जैसे गन्ने की खोई भी दे सकते हैं। जिन किसानों को यह नस्ल दी गई है उनका वजन लगभग 80 किलोग्राम तक हुआ है। इस नस्ल के शरीर से करीब 70 फीसदी मांस निकलता है।''

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इस नस्ल के लिए यहां करें संपर्क

अगर कोई किसान इस नस्ल को पालना चाहता है तो वे प्रदेश के इन जिलों बनारस, कानपुर, गाजियाबाद और लखीमपुर खीरी के पुशचिकित्सा अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं।


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