आय बढ़ाने में मददगार साबित हो रहे सूकर प्रजनन केंद्र, जानें कैसे शुरू करें सूकर पालन

सूकर पालन से कम कीमत और कम समय में अधिक मुनाफा प्राप्त किया जा सकता है। एक मादा सूकर एक ब्यांत में लगभग 8 से 12 बच्चों को जन्म देती है। एक सूकरी से वर्ष में दो बार बच्चे लिए जा सकते हैं।

Diti BajpaiDiti Bajpai   10 Sep 2018 9:52 AM GMT

आय बढ़ाने में मददगार साबित हो रहे सूकर प्रजनन केंद्र, जानें कैसे शुरू करें सूकर पालन

वाराणसी। किसानों की आय बढ़ाने और सूकर पालन को प्रोत्साहन देने के लिए उत्तर प्रदेश के सात जिलों में सूकर प्रजनन केंद्र बनाए गए हैं। इन केंद्रों में सूकरों के अच्छे बच्चे तैयार करके सूकर पालकों को नस्ल बढ़ाने के लिए दिए जाते है ताकि उनके मुनाफे को बढ़ाया जा सके।

अगर आप सूकर पालन शुरू करना चाहते हैं तो इन केंद्रों पर अच्छी नस्ल के सूकर लेकर पालन शुरू कर सकते हैं। बनारस जिले के शंहशाहपुर गाँव में बने सूकर प्रजनन केंद्र के प्रक्षेत्र अधिकारी डॉ. अशोक सिंह बताते हैं, "जो किसान सूकर पालन करते हैं उनको अच्छी नस्ल के सूकर नहीं मिल पाते हैं इसलिए यह केंद्र चलाए जा रहे हैं। अभी तक कई सूकर पालकों को अच्छी नस्ल के सूकर दिए जा चुके हैं और वह इसको व्यवसाय के रूप में भी शुरू कर चुके हैं। केंद्र में सूकर पालन शुरू करने के लिए पूरी जानकारी सूकर पालक को दी जाती है।"

सूकर पालन से कम कीमत और कम समय में अधिक मुनाफा प्राप्त किया जा सकता है। एक मादा सूकर एक ब्यांत में लगभग 8 से 12 बच्चों को जन्म देती है। एक सूकरी से वर्ष में दो बार बच्चे लिए जा सकते हैं। अगर इनको सही तरह से खिलाए जाए और सही तरीके से देखभाल की जाए तो इनसे काफी लाभ कमाया जा सकता है।

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केंद्र से सूकर लेने की प्रक्रिया के बारे में डॉ. सिंह बताते हैं, "अगर कोई सूकर पालन शुरू करना चाहता है या जिसके पास सूकर हों और उसे अच्छे नर की जरूरत है तो वह अपने जिले के मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी से संपर्क कर सकता है। इसके साथ ही वह अपने ब्लॉक के डॉक्टर से भी संपर्क कर सकता है। शुरू करने वाले सूकर पालक को 3 मादा पर 1 नर मिलता है जिसको वह आगे बढ़ाता है।"

बनारस, ललितपुर, लखीमपुर खीरी, सीतापुर, बाराबंकी, अलीगढ़ जिलों में सूकर प्रजनन केंद्र चल रहे हैं। इन केंद्रों में अच्छी नस्ल के सूकर को पाला जा रहा है। बनारस में वर्तमान समय में 260 सूकर पाले जा रहे हैं, जिनको रखने के लिए 10 रूम भी बने हुए हैं। समय-समय पर इनको सूकर पालकों को उनकी आय बढ़ाने के लिए दिए जाते हैं।



इस तरह करें सूकर पालन

सूकर आवास

जहां तक संभव हो सूकरों का आवास जिस जगह पर बनाया जाएं, वह सूखी और जमीन से थोड़ी ऊंचाई पर हो। आवास को कम से कम खर्च में बनाना चाहिए। आवास के लिए पर्याप्त पानी, रोशनी आदि की समुचित व्यवस्था होनी चाहिए।

आवास की व्यवस्था दो प्रकार की होती है :-

बंद आवास : इस प्रकार के आवास में सूकर रखने से उन्हें कम कसरत करनी पड़ती है। इस कारण वे मोटे जल्दी होते हैं। इस प्रकार के आवास में वो सूकर रखे जाते हैं, जिन्हें जल्दी मोटा करना होता है। एक बड़े सूकर को 8-10 वर्ग फीट जगह चाहिये, जिसमें वो रह सकें अगर उनके मल-मूत्र का स्थान उनके रहने के स्थान से बाहर हैं तो 6-8 वर्ग फीट स्थान की आवश्यकता है व बाकी स्थान 2 वर्ग फीट मल-मूत्र के लिए रखा जाये। छोटे सूकरों को कम जगह की आवश्यकता होती है उन्हें 5-6 वर्ग फीट जगह पर्याप्त है।

खुला आवास: खुला आवास हर प्रकार से ठीक रहता है ऐसे आवास को सूकर पंसद भी ज्यादा करते हैं। एक सूकरी के बच्चे के लिए 6'*7' जगह की आवश्यकता होती है। इसके लिए खेत या जमीन में एक बाड़ा बना दिया जाये, बाहर दीवार पक्की, कांटेदार तार या बाड़ द्वारा बनाई जा सकती है। सबसे किफायती चार दीवारी कांटेदार बाड़े की होती है क्योंकि यह आसानी से व कम खर्च में तैयार हो जाता है। दरवाजा लोहे का बनाये ताकि जानवर बाहर न जा सके। खाने के लिए फीडिंग टब्स लकड़ी या लोहे के बनाये जाये, जिन्हें साफ किया जा सके। फीडिंग टब्स सतह से 9 इंच ऊंचाई पर रहें ताकि सूकर आसानी से दाना खा सकें। पानी पीने के लिए एक पक्का होज बनाये जो 6-7 इंच ऊंचाई हो ताकि पानी आसानी से पी सकें और आसानी से साफ किया जा सके।

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नस्लें :

इस व्यवसाय के लिए यह आवश्यक है, कि अच्छी नस्ल के सूकर पाले जाए जिनकी वृद्धि दर अधिक और उनका मांस अच्छी किस्म का हो। इनमें लार्ज व्हाइट यार्क शायर नस्ल लार्ज व्हाइट के नाम से जानी जाती है। इस नस्ल के जानवर बड़े और बढ़िया किस्म के मांस देने के लिए प्रसिद्ध हैं। इनका मुंह लम्बा, तश्तरीनुमा मुडा हुआ होता हैं, नथुने चौड़े होते हैं। इनका सीना चौड़ा और गहरा होता है। कमर लम्बी और चौड़ी होती है। इनकी पूंछ लंबी और उठी हुई होती है। त्वचा गुलाबी होती है। इसकी माइा शांत स्वभाव की होती है और अपने बच्चों को अच्छी तरह रखती है। मादा एक ब्यांत में 8-12 बच्चे देती है। ऐसी सूकरी न चुने जिसके 12 थन न हों। सूकर पालन के लिए जहां तक हो सके नर और मादा सूकरों की खरीदारी किसी सरकारी या व्यवस्थित फार्म से ही करें।

सूकर आहार

सूकर पालन में कुल लागत का 70-75 प्रतिशत उनके दाना पर व्यय होता है।

1. घरों, होटलों, छात्रावास, रसोई से बचे भोजन की झूंठन को सूकरों को खिला सकते हैं लेकिन खिलाने से पहले इसमें से हानिकारक पदार्थ को हटा लें।

2. शीरा- यह बड़े जानवरों के लिए ऊर्जा का विशेष स्त्रोत है। बढ़ते सूकरों में राशन का 20 प्रतिशत और बड़े सूकरों में 40 प्रतिशत तक शीरा खिलाया जा सकता है।

3. बेकरी का बचा- खुचा सूखा पदार्थ भी सूकर राशन के रूप में दे सकते हैं।

4. शकरकंदी सूकरों का स्वादिष्ट आहार है और ऊर्जा का अच्छा स्त्रोत है। सूकर राशन का 30 से 50 प्रतिशत भाग इससे पूरा कर सकते हैं।

5.सब्जी मंडी की बची हुई सब्जियां, गाजर, चुकंदर, गोभी आदि भी सूकर आहार में मिलाएं जा सकते हैं।

6. चावल की भूसी एवं पॉलिश भी सूकर आहार की 30 से 50 प्रतिशत तक पूर्ति कर सकता है, परंतु छोटे बच्चों को यह राशन नहीं खिलाना चाहिए।

दाने की मात्रा

सूकर एक ऐसा जानवर हैं, जिसके खाने का कोई समय नहीं है। छोटे बच्चे के पास दाना हर समय रहना चाहिए। बच्चों को बड़ा होने तक उसे दिन में 2 या 3 बार दाना निम्नानुसार देना चाहिए-

सूकर की आयु दाने की मात्रा

एक से दो महीने तक आधा किलो

दो से तीन महीने तक एक किलो

तीन से चार महीने तक 1.25 किलो

चार से पांच महीने तक 1.5 किलो

पांच से छह महीने तक 2.0 किलो

नर सूकर एवं गर्भित सूकरी 2.5 किलो


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