सेब उत्पादन पर मौसम की मार, 15 से 20 फीसदी तक बढ़ी कीमत

मौसम की पहली बर्फबारी में हिमाचल और जम्मू-कश्मीर में सेब की पकी फसल को भारी नुकसान पहुंचा है। हालांकि हिमाचल में तुड़ाई अपने आखिरी दौर में थी इस कारण कम नुकसान हुआ

Mithilesh DubeyMithilesh Dubey   19 Nov 2018 1:45 PM GMT

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लखनऊ। पिछले एक सप्ताह में सेब की थोक और खुदरा कीमतों में 15 से 20 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गयी है। हिमाचल प्रदेश में सेब की कीमत 20 प्रतिशत बढ़कर 90 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गई है वहीं जम्मू-कश्मीर में भी इतनी बढ़त के साथ कीमत 55 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गई है। भारी बर्फबारी होने के कारण जहां सेब उत्पादकों को नुकसान उठाना पड़ा है तो वहीं आम लोगों को अब सेब के लिए जेब ढीली करनी पड़ेगी।

इस मौसम की पहली बर्फबारी में हिमाचल और जम्मू-कश्मीर में सेब की पकी फसल को भारी नुकसान पहुंचा है। हालांकि हिमाचल में तुड़ाई अपने आखिरी दौर में थी इस कारण कम नुकसान हुआ है लेकिन जम्मू-कश्मीर में ज्यादा नुकसान की आशंका व्यक्त की गई है।

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इस बारे में शिमला स्थित व्यापारिक संस्था एप्पल ग्रोवर एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष रवींद्र चौहान ने गांव कनेक्शन को फोन पर बताया "हिमाचल प्रदेश में तो ज्यादा नुकसान नहीं हुआ है क्योंकि यहां बर्फबारी ऊंचाई के क्षेत्रों में हुई जहां तुड़ाई आखिरी दौर में थी। ऊपरी इलाकों की पूरी खड़ी फसल बर्बाद हुई है। यहां हिमपात की वजह से 4-5 प्रतिशत सेब की फसल बर्बाद हुई है। हालांकि जम्मू-कश्मीर में अभी बड़े पैमाने पर तुड़ाई की जानी है, इसलिए वहां 10 से 12 फीसदी फसल बर्बाद हुई है। इससे थोक और खुदरा कीमतों में बढ़ोतरी तो हुई ही है, उत्पादकों को भी भारी नुकसान होगा।"


शिमला में सेब इंडस्ट्री का सालाना पांच हजार करोड़ रुपए का है। इस पहाड़ी प्रदेश के 12 में से 7 जिलों में सेब होता है। करीब 100 साल पुरानी एप्पल इंडस्ट्री से एक लाख से ज्यादा बागवान जुड़े हैं। सालाना करीब 4 करोड़ पेटी सेब का उत्पादन होता है लेकिन इस बार उत्पाद घटने की आशंका पहले ही व्यक्त की जा चुकी है।

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वहीं कश्मीर में वक्त से पहले हुई बर्फबारी ने सेब फसल को भारी नुकसान पहुंचाया है। कुलगाग, पुलवामा, शोपियां, बांदीपोरा और बारामूला जिले के हिस्सों में सेब के बागीचे बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने भी राज्य प्रशासन से बागबानी उद्योग को पहुंचे नुकसान के आंकलन की भी मांग की है। उन्होंने केन्द्र सरकार से अपील की कि वे मौसम की मार खाए फल उत्पादकों के लिए किसी पैकेज पर विचार करे।


भारत में सबसे ज्यादा सेब उत्पादन जम्मू-कश्मीर में होता है जहां देश का 80 फीसदी उत्पादन होता है। वहीं हिमाचल प्रदेश का कुल पैदावार में 16-17 फीसदी योगदान है। भारत के कुल 24 लाख टन सेब उत्पादन में बाकी हिस्सेदारी उत्तर भारत में उत्तराखंड और अन्य राज्यों की है। केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने अपने तीसरे अग्रिम अनुमान में 2017-18 के दौरान भारत का सेब उत्पादन 23.7 लाख टन रहने का पूर्वानुमान जताया है जबकि दूसरे अग्रिम अनुमान में यह 22.9 लाख टन और पिछले साल 22.7 लाख टन दर्ज किया गया था। इस बीच सेब के अंतर्गत रकबा भी कुछ बढ़कर 3,06,000 हेक्टेयर हो गया है जो पिछले साल 3,05,000 हेक्टेयर था।

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मौसम की इस मार का असर बाजार में दिखना शुरू हो गया है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के नवीन गल्ला मंडी में सिंह फ्रूट ट्रेडिंग के राजकरण सिंह ने गांव कनेक्शन को बताया "हमारे यहां तो मंडी में अभी हिमाचल प्रदेश से सेब आना बंद हो गया है। लेकिन जम्मू-कश्मीर से सेब की जो पेटियां आ रही हैं उनकी कीमतों में गुणवत्ता के हिसाब से 15 से 20 रुपए की तेजी आई है, आवक कम होने से भी कीमत बढ़ी है।"


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