इस तरह करे चूजों की देखभाल, नहीं होगा घाटा

इस तरह करे चूजों की देखभाल, नहीं होगा घाटा

मुर्गी पालन व्यवसाय को कम लागत और कम समय में शुरू करके लाखों रूपए का मुनाफा कमा सकते है लेकिन जरा सी चूक से इस व्यवसाय में नुकसान भी उठाना पड़ता है। इसलिए मुर्गी पालकों को चूजों को खरीदने से लेकर उनको बेचने तक काफी ध्यान देना रखना चहिए।

चूजों को बाड़े में लाने से पहले इन बातों को ध्यान रखें

  • चूजे लेने से पहले बाड़े में कीटाणु नाशक दवा से अच्छी तरह धो दें और दीवारों पर भी छिड़काव कर दें, जिससे कीटाणु न रहे।
  • ब्रूडर के चारों ओर चिक गार्ड लगा दें।
  • आठ दस दिन के बाद चिक गार्ड को हटा दें ताकि चूजों को घूमने के लिए जगह मिल सके।
  • चूजों के आने से 10 घंटे पहले ब्रूडर में लालटेन या बिजली के बल्ब जला दें, जिससे बाड़ा गर्म हो जाएगा।
  • चूजे स्वस्थ हो और ऐसी हैचरी से खरीदें जो जन्मजात बीमारियों से दूर हो।
  • अगर ब्रूडर में चूजे एक स्थान पर रहें तो गर्मी कम है तो ब्रूडर का ताप बढ़ायें।
  • चूजे छोड़ने के बाद पीली मक्का या बारीक दलिया दें।
  • चूजों को सही ताप और गर्मी की आवश्यकता रहती है। अगर बाड़े में चूजे दीवार की ओर रहते है तो ब्रूडर में अधिक गर्मी है इसलिए ब्रूडर की गर्मी थोड़ी कम कर देनी चाहिए।

दाने की व्यवस्था

  • मुर्गी पालन में 70 प्रतिशत खर्चा दाने पर होता है।
  • मुर्गी को ताजा और शुद्ध संतुलित आहार देना चाहिए।
  • उम्र के आधार पर विभिन्न तैयार आहार बाजार से खरीद कर खिलाये जा सकते है।
  • दाने के नमी रहित जगह पर रखना चाहिए नहीं तो दाने में फफूंद लग सकती है, जिससे मुर्गियों में बीमारी की आंशका बनी रहती है।
  • ज्यादा समय तक मुर्गियों के दाने को भंडारण करके नहीं रखना चाहिए।
  • एक चूजे के लिए 0-8 सप्ताह की आयु तक स्टाटर आहार 8-20 सप्ताह की आयु तक ग्रोवर आहार और खाद में लेयर दाना देना चाहिये। क्योंकि उम्र के आधार पर मु्र्गी के शरीर को विभिन्न पोषक तत्वों जैसे प्रोटीप वसा के लिए मिनिरल्स और विटामिन की आवश्यकता अलग होती है।
  • एक चूजे को मुर्गी बनने के लिए लगभग 13 किलो दाने की आवश्यकता होती है।
  • एक मुर्गी दिन भर में लगभग 100-120 ग्राम दाना रोज खा लेती है और साल भर में लगभग 40 किलो दाना खाती है।

यह भी पढ़ें- जानें मुर्गियों में होने वाली बीमारियां और उनके टीके

रोगों का उपचार व रोकथाम

  • मुर्गीपालन में बीमारियों से कुक्कुट पालन को काफी नुकसान होता है। बीमारियों का सीधा असर मुर्गी के उत्पादन पर तो पड़ता ही है साथ ही मृत्युदर भी अधिक रहती है।
  • बीमार मुर्गी को तुरंत स्वस्थ मुर्गी से अलग कर देना चाहिए क्योंकि बीमार मुर्गी से कीटाणु लार द्धारा दाने व पानी में जाते है, जिससे बीमारियां फैलती हैं।
  • एक बीमार शेड से दूसरे शेड में काम करने वाले आदमी के पैर कपड़ों द्धारा भी कीटाणु एक जगह से दूसरी जगह पहुंचते हैं।
  • प्राइवेट हैचरी से पहले दिन के चूजों को खरीदते समय ध्यान रखें कि रानीखेत बीमारी का एफ-1 स्ट्रेन और मैरेक्स बीमारी का टीका लगा होना चाहिए।

जरूर कराए टीकाकरण

  • पहले दिन के चूजे में- मेरेक्स टीकाकरण
  • 2-7 दिन पर- रानीखेत एफ-1 स्ट्रेन टीका
  • 13-17 दिन पर- गंबोरो टीका
  • 6 सप्ताह की उम्र पर - रानीखेत आर-बी टीका
  • 8 सप्ताह पर- फाउल पोक्स टीका
  • 16 सप्ताह की उम्र पर - रानीखेत आर 2 बी स्ट्रेन टीका


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