वीडियो में जाने बैकयार्ड मुर्गीपालन, कैसे उठा सकते हैं इसका लाभ

अगर आप कम लागत में मुर्गी पालन शुरू करना चाहते है तो बैकयार्ड मुर्गीपालन (घर के पीछे पड़ी खाली जगह) कर सकते है। इसके लिए कई राज्यों की सरकारें योजना भी चला रही है।

पोल्ट्री विशेषज्ञ डॉ पंकज कुमार बताते हैं, "500 रूपए से बैकयार्ड मुर्गी पालन शुरू किया जा सकता है। अगर किसान इसको व्यावसायिक रूप भी देना चाहे तो 10 से 15 हजार रूपए की लागत से छोटा सा बांस का फार्म बनाकर मुर्गियां रखकर पालन कर सकते है। बैकयार्ड मुर्गीपालन के लिए ग्रामप्रिया, वनराजा कारी निर्भीक जैसी उन्नत नस्लों को पाल सकते है।"

डॉ कुमार आगे बताते हैं, देसी नस्लों की अपेक्षा उन्नत नस्लों में अंडा देने की क्षमता भी ज्यादा होती है और शारीरिक वजन भी ज्यादा होता है। जगह की भी ज्यादा जरुरत नहीं होती है। एक मुर्गी के लिए एक वर्ग फीट जगह की आवश्यकता होती है। और अंडा के लिए ढाई वर्ग फीट प्रति मुर्गी की दर से जगह की आवश्यकता होती है।"

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मुर्गीपालन एक ऐसा व्यवसाय है, जिसे बहुत कम लागत से शुरू करके लाखों- करोड़ों रुपए का लाभ कमा सकते हैं। भारत के लगभग 90 लाख लोग मुर्गीपालन व्यवसाय से जुड़े हुए हैं और हर वर्ष सकल घरेलू उत्पाद में इसका 70 हजार करोड़ का योगदान है।

"आप अपने छोटे से फार्म में फीडर और ड्रींकर लगा सकते है जो कि बाजारों में सस्ते दामों में उपलब्ध है। खाने के बर्तन को टांग दे, ताकि आवश्यकतानुसार मुर्गियां दाना खा सके। इसके अलावा बाजार में ब्रीडर, ग्रोवर और लेयर राशन उपलब्ध है। राशन किसी अच्छी दुकान से ही खरीदे। एक दिन के चूजे को मेस राशन दे।" डॉ पंकज ने बताया।

बैकयार्ड मुर्गी पालन के लिए सरकार भी करती है मदद

बैकयार्ड मुर्गी पालन शुरू करने के लिए सरकार भी मदद करती है। कुक्कुट विकास कार्यक्रम के अंतर्गत पशुपालन विभाग उत्तर प्रदेश द्वारा बैकयार्ड पोल्ट्री कार्यक्रम और रूरल बैकयार्ड योजना (60 प्रतिशत केन्द्र पोषित) चला रही है, जिसके अंतर्गत योजना का लाभ उठा सकते है।

बैकयार्ड पोल्ट्री कार्यक्रम का उदेद्श्य बैकयार्ड कुक्कुट इकाईयां स्थापित कर अनुसूचित जाति के लाभार्थियों को रोजगार देना और उनके परिवारों के लिए अतिरिक्त आय सृजित करना है।

बैकयार्ड मुर्गी पालन शुरू करने के लिए सरकार भी मदद करती है।

बैकयार्ड कुक्कुट की एक इकाई की लागत 3000 रुपए है, जिसके अन्तर्गत लाभार्थी को 50 चूजे, 900 रुपए मात्र के अन्तर्गत कुक्कुट आहार, निःशुल्क प्रशिक्षण, दवा और चूजों के लिए छप्पर की व्यवस्था करवाई जाती है। यह पूर्णतय अनुदान है इसमें लाभार्थी से इसकी वसूली नही की जाती है। एक इकाई से कम से कम 7-8 अण्डे प्रतिदिन लाभार्थी को मिलते हैं। इसके अतिरिक्त मुर्गो के विक्रय से भी आय होती है।

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रूरल बैकयार्ड योजना बी.पी.एल. वर्ग के लाभार्थियों के लिए है, जिसके अन्तर्गत एक मदर यूनिट स्थापित की जाती है। जहां पर एक महीने तक चूजों का पालन पोषण किया जाता है। एक मदर यूनिट से 300 लाभार्थी सम्बद्ध होते हैं। मदर यूनिट संचालक को 60000 रुपए का अनुदान दिया जाता है और उसे 1.50 लाख रुपए की धनराशि मदर यूनिट के सुदृढ़ीकरण में लगानी होती है। प्रति चूजा 50 रुपए की दर से एक माह तक चूजों के पालन पोषण के लिए दिया जाता है। प्रति लाभार्थी एक माह के 25 चूजे दो चरणों में (15+10) दिए जाते हैं, जिसका पालन-पोषण लाभार्थी द्वारा किया जाता है और अण्डा और मांस उत्पादन से आय प्राप्त करता है।

एक माह के चूजे मिलने से लाभार्थी को चूजे पालने में आसानी होती है और कम समय में ही अण्डे होने लगते है। अण्डों के साथ-साथ कुक्कुट मांस का भी उत्पादन होता है। लाभार्थी को अतिरिक्त आय मिलने के साथ रोजगार भी मिलता है।

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ज्यादा जानकारी के यहां संपर्क कर सकते है

डॉ वी.के.सचान

संयुक्त निदेशक (कुक्कुट)

निदेशालय, पशुपालन विभाग, लखनऊ

मो. 9415283894

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Tags:    poultry farming 
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