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हैरानी : 60 फीसदी लोगों को बिना ड्राइविंग टेस्ट के मिला है लाइसेंस, बाकी आंकड़े भी चौंकाने वाले

Anusha MishraAnusha Mishra   16 July 2017 3:00 PM GMT

हैरानी : 60 फीसदी लोगों को बिना ड्राइविंग टेस्ट के मिला है लाइसेंस, बाकी आंकड़े भी चौंकाने वालेप्रतीकात्मक तस्वीर

लखनऊ। दिल्ली की एक निचली अदालत ने बीएमडब्ल्यू हिट एंड रन केस में हरियाणा के उद्योगपति के बेटे को दो साल कैद की सजा सुनाई है। इस फैसले पर अफसोस जताते हुए अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश संजीव कुमार ने कहा कि गाय को मारने वालों के लिए हमारे देश के अलग-अलग राज्यों में 5 साल से 14 साल तक की सजा है लेकिन लापरवाह तरीके से की जा रही ड्राइविंग से व्यक्ति की मौत के लिए कानून में सिर्फ दो साल की ही सजा है। इस बात ने एक बार फिर देश में सड़क सुरक्षा को लेकर बने नियमों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

शनिवार को ही आए एक सर्वे के मुताबिक, हमारे देश में 80 प्रतिशत वाहन चालक गाड़ी चलाते वक्त असुरक्षित महसूस करते हैं जबिक 82 प्रतिशत पैदल चलने वालों को सड़क पर चलते वक्त या सड़क पार करते वक्त यह लगता है कि उनके साथ दुर्घटना लग सकती है। कोच्चि में यह आंकड़ा और भी ज़्यादा है। यहां के 90 प्रतिशत लोग सड़क पर चलते वक्त असुरक्षित महसूस करते हैं।

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सर्वे में शामिल करीब आधे लोगों का कहना है कि उन्होंने बहुत घातक सड़क दुर्घटना देखी है। इसमें से 31 प्रतिशत लोगों ने यह कहा कि उनके परिवार का कोई न कोई सदस्य सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो चुका है। और इसमें से 16 प्रतिशत लोग ऐसे थे जिनके परिवार के एक सदस्य की मौत सड़क दुर्घटना में हो चुकी है।

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गौर करने वाली बात यह है कि सर्वे में शामिल 91 प्रतिशत लोगों का यह मानना है कि एक मजबूत सड़क सुरक्षा कानून भारत में सड़क दुर्घटनाओं को कम करने में मदद करेगा और 81 प्रतिशत लोगों ने कहा कि यातायात अपराधों के लिए सख्त सजा सड़क सुरक्षा में सुधार करने में मदद करेगी।

इसके मुताबिक, भारत में 10 में 6 लोगों को बिना ड्राइविंग टेस्ट के ही लाइसेंस मिल जाता है। इस सर्वे को देश के 10 महानगरों में किया गया है, इनमें से 5 महानगर ऐसे हैं जिनमें वाहनों की संख्या सबसे ज़्यादा है। यह सर्वे रोड सेफ्टी एडवोकेसी ग्रुप सेव लाइफ फाउंडेशन ने कराया है। इसके मुताबिक, आगरा में सिर्फ 12 प्रतिशत वाहन चालकों ने पूरी प्रक्रिया अपनाकर लाइसेंस लिया है जबकि 88 प्रतिशत लोगों ने यह माना है कि उन्होंने लाइसेंस लेने के लिए कोई ड्राइविंग टेस्ट नहीं दिया। जयपुर में 72 प्रतिशत, गुवाहाटी में 64 प्रतिशत और दिल्ली में 54 प्रतिशत ऐसे लोग हैं जिन्हें बिना ड्राइविंग टेस्ट दिए ही लाइसेंस मिल गया। मुंबई में यह संख्या आधी-आधी रही। यानि 50 प्रतिशत लोगों ने ड्राइविंग टेस्ट दिया और 50 प्रतिशत ने नहीं।

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इस रिपोर्ट के अनुसार, 59 प्रतिशत लोगों ने खुद यह माना कि उन्होंने अभी तक कोई ड्राइविंग टेस्ट नहीं दिया जबिक उनके पास वाहन चलाने के लिए लाइसेंस है। उनका कहना है कि भारत में लाइसेंस प्रणाली में भ्रष्टाचार व्याप्त है और लाइसेंस लेने की प्रक्रिया है वह भी दुरुस्त नहीं है।

आंकड़ों के मुताबिक, भारत में 997 क्षेत्रीय ट्रांसपोर्ट ऑफिस (आरटीओ) हैं जो हर साल लगभग 1.15 करोड़ नए लाइसेंस ज़ारी करते हैं या पुराने लाइसेंसों का नवीनीकरण करते हैं। एक अनुमान के मुताबिक, भारत के हर आरटीओ में हर वर्किंग डे पर 40 लाइसेंस इश्यू होते हैं जबकि सिर्फ दिल्ली ऐसा शहर है जहां हर वर्किंग डे पर लगभग 150 लाइसेंस ज़ारी किए जाते हैं।

2014 में सुप्रीम कोर्ट के एक पैनल ने अपील की थी कि हर नामित अधिकारी एक दिन में 15 - 20 से ज़्यादा ड्राइविंग लाइसेंस इश्यू न करे क्योंकि एक दिन में इससे ज़्यादा लोगों का ड्राइविंग टेस्ट नहीं लिया जा सकता। इस पैनल ने कहा था कि 130-150 चालकों के कौशल का परीक्षण करना मानवीय रूप से असंभव है। इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि दिल्ली में जो 150 लाइसेंस हर दिन जारी होते हैं उनमें से कितने लोगों का टेस्ट होता होगा।

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सर्वे में यह कहा गया है कि एक अनिवार्य ड्राइवर ट्रेनिंग सिस्टम की कमी के कारण भारत में ऐसे कई लोग हैं जो वाहन चलाने की सुरक्षित तरीकों को जाने बिना ही वाहन चलाना शुरू कर देते हैं। इनमें से ज़्यादातर ब्लाइंड स्पॉट, सुरक्षित दूरी आदि के बारे में नहीं पता होता जिससे सड़क दुर्घटना के चांसेज बढ़ जाते हैं।

सेव लाइफ फाउंडेशन के फाउंडर और सीईओ पियूष तिवारी के मुताबिक, इस सर्वे से यह साफ होता है कि देश के ज़्यादातर लोग सड़क पर चलते वक्त अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित रहते हैं। इनमें से ज़्यादातर का मानना है कि मज़बूत सुरक्षा नियमों से हालात में सुधार किया जा सकता है।

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