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बजट 2020 : 'ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि अर्थव्यवस्था काफी खराब, मनरेगा का बजट बढ़ना जरूरी'

अगर फरवरी में आने वाले बजट में सरकार ने ग्रामीण विकास मंत्रालय की गुजारिश पर ध्यान नहीं दिया तो एक बार फिर देश के मनरेगा मजदूरों को समय पर भुगतान नहीं मिल सकेगा।

Kushal MishraKushal Mishra   16 Jan 2020 10:29 AM GMT

बजट 2020 :

"छह-छह महीने तक हम मनरेगा मजदूरों को पैसा नहीं मिलता है। हमारे जैसे कई मजदूरों को 10 अक्टूबर से अब तक पैसा नहीं मिला है। जब पिछले महीने 29 दिसंबर को हम सबने जयपुर में धरना दिया, तब जाकर थोड़ा पैसा मिला, वह भी पूरा नहीं आया। अब आप बताइए, हम कैसे अपना घर चलाएंगे ?," राजस्थान के पाली जिले में रायपुर तहसील के कलालिया गांव में मनरेगा मजदूर आशा देवी 'गांव कनेक्शन' से फोन पर बताती हैं।

आशा देवी जैसे मनरेगा मजदूरों का यह हाल सिर्फ राजस्थान में ही नहीं है, बल्कि देश के ज्यादातर राज्यों में मनरेगा मजदूरों को समय पर भुगतान नहीं मिल रहा है। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम के तहत इन मजदूरों को 15 दिनों के अंदर भुगतान देने का प्रावधान है।

देश के ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार देने वाली योजना मनरेगा के लिए केंद्र सरकार ने वर्ष 2018-19 के बजट में 60,000 करोड़ रुपए की घोषणा की थी। इसके बावजूद कई राज्यों में मनरेगा के तहत सामग्री और मजदूरी का भुगतान रुका हुआ है। ऐसे में इस बार ग्रामीण विकास मंत्रालय की ओर से वित्त मंत्रालय से मनरेगा के बजट में 20,000 करोड़ रुपए अतिरिक्त बजट देने की सिफारिश की गई है। अब अगर फरवरी में आने वाले बजट में सरकार ने ग्रामीण विकास मंत्रालय की गुजारिश पर ध्यान नहीं दिया तो आने वाले बजट में एक बार फिर देश के मनरेगा मजदूरों को समय पर भुगतान नहीं मिल सकेगा।

"देश के ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि अर्थव्यवस्था की हालत बहुत खराब है। ऐसे में जरूरी यह है कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए सरकार को इस बजट में सामाजिक क्षेत्र के सभी क्षेत्रों में बजट बढ़ाना चाहिए। इसमें मनरेगा का अहम योगदान है, जरूरी है कि मनरेगा का बजट बढ़े और मजदूरों को समय से मजदूरी मिले," फरवरी में आने वाले बजट को लेकर त्रिपुरा विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग की प्रोफेसर और कृषि अर्थशास्त्र, जनजातीय अर्थशास्त्र और ग्रामीण विकास में विशेषज्ञ डॉ. परमिता साहा 'गांव कनेक्शन' से फोन पर बताती हैं।

'सिर्फ राजस्थान में मजदूरों का 700 करोड़ से ज्यादा बकाया'

मनरेगा की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार राजस्थान में 10 अक्टूबर से मजदूरों का भुगतान रुका हुआ है। (दाईं तरफ प्रति दिन लंबित भुगतान का प्रतिशत)

वहीं मनरेगा मजदूरों के अधिकारों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर काम कर रही मनरेगा संघर्ष मोर्चा में राजस्थान से जुड़े मुकेश गोस्वामी 'गांव कनेक्शन' से बताते हैं, "सिर्फ राजस्थान में ही मनरेगा में पिछले साल का करीब 700 करोड़ रुपए से ज्यादा मजदूरी भुगतान बाकी है और करीब 1200 करोड़ रुपए सामग्री के भुगतान का बाकी है। ऐसे में 10 अक्टूबर के बाद से मजदूरों को भुगतान भी नहीं हो सका। मनरेगा को लेकर यह सरकार की दशा है।"

"हमारी ओर से कई बार बकाया भुगतान के लिए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को पत्र लिखे गए, केंद्र में मंत्रियों को पत्र लिखे गए, इसके बावजूद अब तक कुछ नहीं हो सका है," मुकेश बताते हैं।

राजस्थान की तरह आंध्र प्रदेश में भी मनरेगा मजदूरों को 21 नवंबर से भुगतान नहीं मिल सका है। द हिन्दू वेबसाइट के अनुसार, आंध्र प्रदेश के 13 जिलों में ही अगस्त माह में मनरेगा की मजदूरी का लंबित भुगतान 865 करोड़ रुपए का आंकड़ा छू लिया था, जो पिछले पांच वर्षों में सबसे अधिक लंबित भुगतान था।

'केंद्र सरकार मनरेगा मजदूरों का समय से भुगतान नहीं कर पा रही'

मनरेगा की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार आंध्र प्रदेश में 21 नवंबर से मजदूरों का भुगतान रुका हुआ है। (दाईं तरफ प्रति दिन लंबित भुगतान का प्रतिशत)

आंध्र प्रदेश में बतौर मनरेगा शोधकर्ता काम कर रहे चक्रधर बुद्धा 'गांव कनेक्शन' से फोन पर बताते हैं, "राज्य में केंद्र सरकार मजदूरों का भुगतान कर पाने में सक्षम नहीं है। साल 2017 में भी आंध्र प्रदेश में मनरेगा मजदूरों का 1700 करोड़ रुपए भुगतान रुका हुआ था। तब मजदूरों के प्रदर्शन के चलते राज्य सरकार ने पहल करते हुए मजदूरों का भुगतान किया था, मगर केंद्र सरकार ने इस पर भी आपत्ति जताई थी। आज भी यह हाल है कि केंद्र सरकार मजदूरों का समय से भुगतान नहीं कर पा रही है।"

चक्रधर बुद्धा, मनरेगा शोधकर्ता

बड़ी बात यह भी है कि केंद्र सरकार 15 दिनों में भुगतान न करने पर मजदूरों को एक रुपया ज्यादा नहीं दे रही है और महीनों बाद भुगतान करने पर भी राज्य में सिर्फ 211 रुपए के हिसाब से मनरेगा मजदूरों को ही मजदूरी मिलती है। आंध्र प्रदेश में अभी भी बड़ा हिस्सा मजदूरों के भुगतान का रुका हुआ है।

चक्रधर बुद्धा, मनरेगा शोधकर्ता, आंध्र प्रदेश

चक्रधर कहते हैं, "बड़ी बात यह भी है कि केंद्र सरकार 15 दिनों में भुगतान न करने पर मजदूरों को एक रुपया ज्यादा नहीं दे रही है और महीनों बाद भुगतान करने पर भी राज्य में सिर्फ 211 रुपए के हिसाब से मनरेगा मजदूरों को ही मजदूरी मिलती है। आंध्र प्रदेश में अभी भी बड़ा हिस्सा मजदूरों के भुगतान का रुका हुआ है।"

इससे अलग देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में मनरेगा मजदूरों के भुगतान में देरी होने और मजदूरों की शिकायतों को लेकर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने बीती 24 दिसंबर को कैबिनेट बैठक में मनरेगा मजदूरों के हितों के लिए बड़ा फैसला लिया।

यूपी सरकार ने भुगतान में देरी पर उठाया कदम

मनरेगा की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार उत्तर प्रदेश में 13 दिसंबर से मजदूरों का भुगतान रुका हुआ है। (दाईं तरफ प्रति दिन लंबित भुगतान का प्रतिशत)

योगी सरकार ने मनरेगा मजदूरी में 15 दिनों में मजदूरों का भुगतान न किए जाने पर संबंधित अधिकारियों से ब्याज सहित वसूली करने के आदेश दिए हैं। इसके बावजूद उत्तर प्रदेश में 13 दिसंबर से मनरेगा मजदूरों का भुगतान लंबित है।

यूपी के ग्राम विकास विभाग मंत्री राजेंद्र प्रताप सिंह उर्फ मोती सिंह 'गांव कनेक्शन' से बताते हैं, "कुछ दिक्कतें थी, जिन्हें दूर कर लिया गया है। अब यूपी में मनरेगा के तहत तेजी से भुगतान हो रहे हैं और कच्चे काम के लिए हमारे पास 100 फीसदी पैसा है।"

जयती घोष, ग्रामीण मामलों में जानी मानी अर्थशास्त्री

वहीं राज्यों को मनरेगा का बजट समय से जारी न किए जाने पर दिल्ली में जवाहर लाल नेहरु विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र की प्रोफेसर और ग्रामीण मामलों में जानी मानी अर्थशास्त्री जयती घोष 'गांव कनेक्शन' से फोन पर बताती हैं, "देश में जीएसटी और मंदी के बाद सारे टैक्स कलेक्शन कम हुए हैं। मगर केंद्र सरकार को कम से कम इतना करना चाहिए कि नियम के अनुसार जो राज्यों को मनरेगा के तहत बजट मिलना चाहिए वो तो देना ही चाहिए। कई राज्यों ने प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री को मनरेगा का रुका हुआ बजट जारी करने को लेकर पत्र भी लिखे हैं।"

जयती घोष कहती हैं, "जब देश में मंदी से अर्थव्यवस्था गड़बड़ा हुई हो तो इस समय ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादा से ज्यादा रोजगार देने के लिए मनरेगा की बहुत जरूरत है जबकि केंद्र सरकार ने समय से इस पर ध्यान नहीं दिया। ग्रामीण स्तर पर अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए मनरेगा से बेहतर विकल्प है ही नहीं। ऐसे में मनरेगा में और बेहतर बजट दिए जाने की जरूरत है।"

हरियाणा में 26 नवंबर से नहीं हुआ भुगतान

मनरेगा की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार हरियाणा में 26 नवंबर से मजदूरों का भुगतान रुका हुआ है। (दाईं तरफ प्रति दिन लंबित भुगतान का प्रतिशत)

हरियाणा में भी मनरेगा मजदूर समय से मजदूरी न मिलने की वजह से मुश्किल में हैं। मनरेगा की वेबसाइट के अनुसार राज्य में 26 नंवबर के बाद से भुगतान नहीं मिल सका है।

"दो-दो महीने से हम लोगों को मजदूरी नहीं मिलती है। हम लोगों ने नवंबर में काम किया था जिसका पैसा अब तक नहीं मिला है। अफसरों से पूछो तो कहते हैं अभी पैसा नहीं आया है, टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर पर फोन करो तो जल्द पैसा आ जाएगा, एक दो दिन में भुगतान हो जाएगा, ऐसे करके बहाने बनाते हैं, हम लोग गरीब हैं, कम से कम हमें समय से मजदूरी तो मिलनी चाहिए," हरियाणा के कैथल जिले में ढांड ग्राम पंचायत से मनरेगा मजदूर जोगिंदर सिंह बताते हैं।

हरियाणा के इसी कैथल जिले के सात ब्लॉक में 277 गांव आते हैं। ऐसे में कई गांव में रोजगार के लिए ग्रामीण मनरेगा में काम मिलने के ही भरोसे हैं।

हरियाणा मनरेगा मजदूर यूनियन के प्रदेश महासचिव फूल सिंह 'गांव कनेक्शन' से बताते हैं, "एक तो मजदूरी दो-दो महीने देरी से मिलती है, अभी तक नवंबर में जिन मजदूरों ने काम किया है, उनके खातों में मजदूरी नहीं पहुंची है। दूसरी बड़ी बात यह है कि जो लोग मनरेगा के तहत काम मांगते हैं और उनको प्रशासन अगर काम नहीं दे पाता है तो उन्हें बेरोजगारी भत्ता देने का भी प्रावधान है, मगर मनरेगा में इतनी बुरी हालत है कि बेरोजगारी भत्ता तो भूल ही जाइये।"

'देश में 60 हजार करोड़ का बजट बहुत कम'

कई राज्यों में मनरेगा मजदूरों का भुगतान बजट न मिलने की वजह से लंबित है। फोटो : गांव कनेक्शन

फूल सिंह कहते हैं, "देश में पिछले साल 60,000 करोड़ रुपए मनरेगा में बजट मिला, ये बहुत ही कम है क्योंकि तीन महीने पहले ही बजट का पैसा पूरी तरह खत्म हो जाता है। मजदूरों को भुगतान तक नहीं मिलता और अगर देरी होती है तो उसका अलग से पैसा भी नहीं दिया जाता है।"

आंध्र प्रदेश में मनरेगा शोधकर्ता चक्रधर बुद्धा भी मनरेगा में कम बजट पास किए जाने की बात को स्वीकार करते हैं और ग्रामीण विकास मंत्रालय की ओर से वित्त मंत्रालय को इस बजट में मनरेगा के लिए अतिरिक्त 20,000 करोड़ रुपए दिए जाने की सिफारिश का समर्थन करते हैं।

चक्रधर कहते हैं, "पिछले साल बजट में सिर्फ 5,000 करोड़ रुपए अतिरिक्त बढ़ाया गया। तब 60,000 करोड़ रुपए का बजट पास हुआ, मगर पूरे देश के लिए मनरेगा में इतना बजट नाकाफी है। कई मजदूर यूनियन और ट्रेड यूनियन भी सरकार को कम से कम 90,000 करोड़ रुपए मनरेगा के तहत बजट पास करने का प्रस्ताव रख चुकी हैं क्योंकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था में रोजगार गारंटी की यह सबसे बड़ी योजना है। देखा जाए तो सिर्फ आंध्र प्रदेश और तेलंगाना राज्य को ही मिलाकर कम से कम 10,000 करोड़ रुपए मनरेगा के बजट में आता है।"

कर्नाटक में 18 नवंबर से मजदूरों को नहीं मिला भुगतान

मनरेगा की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार कर्नाटक में 18 नवंबर से मजदूरों का भुगतान रुका हुआ है। (दाईं तरफ प्रति दिन लंबित भुगतान का प्रतिशत)

हरियाणा की तरह कर्नाटक के मजदूर भी समय से मजदूरी का भुगतान न मिलने की शिकायत करते हैं। मनरेगा वेबसाइट के अनुसार कर्नाटक में 18 नवंबर के बाद से मजदूरों को भुगतान नहीं मिल सका है। वहीं न्यूज कर्नाटक वेबसाइट के अनुसार कर्नाटक सरकार केंद्र से करीब 2784 करोड़ रुपए मनरेगा में बकाया भुगतान किए जाने का इंतजार कर रही है।

कर्नाटक में मनरेगा संघर्ष मोर्चा से जुड़ीं स्वर्ण भट 'गांव कनेक्शन' से फोन पर बताती हैं, "अभी जनवरी में राज्य सरकार ने करीब 800 करोड़ रुपए मनरेगा में भुगतान के लिए पैसा दिया है। मगर अभी भी करीब 2,000 करोड़ रुपए मजदूरों का भुगतान बकाया है। बड़ी बात यह है कि कभी सूखा और कभी बाढ़ झेलने वाले इस राज्य में मनरेगा में काम की मांग हमेशा बढ़ती है। ऐसे में जरूरी यह है कि केंद्र बजट बढ़ाए ताकि मजदूरों को समय से भुगतान मिले।"

वहीं कृषि अर्थशास्त्र, जनजातीय अर्थशास्त्र और ग्रामीण विकास में विशेषज्ञ डॉ. परमिता कहती हैं, "ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के लिए मनरेगा बहुत बड़ी योजना है और पिछले वर्ष 60,000 करोड़ रुपए इसके लिए पर्याप्त नहीं है। कम से कम इस पर 20 प्रतिशत और बजट पास किया जाना चाहिए ताकि ग्रामीणों को काम मिलने के साथ समय से पैसा भी मिले।"

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