Top

आधा भारत आया मार्च की बारिश के चपेट में, 57 फीसदी अधिक हुई बारिश, आगे भी बना है खतरा

Arvind ShuklaArvind Shukla   16 March 2020 3:52 PM GMT

आधा भारत आया मार्च की बारिश के चपेट में, 57 फीसदी अधिक हुई बारिश, आगे भी बना है खतरा

जिस फसल को देखकर किसान के दुख-दर्द दूर हो जाते हैं, उसी फसल को हाथ में लेकर 70 साल के बुजुर्ग किसान अच्छे लाल फफक रहे थे। कई हजार रुपए की लागत और कड़ाके की सर्दी में छुट्टा पशुओं से बचाकर लगभग तैयार हो गई उनकी तीन एकड़ चने की फसल 14 मार्च को भारी बारिश और हवा से बर्बाद हो गई थी।

"पूरी फसल बर्बाद हो गई, इससे अब एक दाना की आशा नहीं है। इससे पहले बरसात (सितंबर-अक्टूबर) में उड़द की फसल पानी से बर्बाद हो गई थी, तब भी एक पैसा नहीं मिला था, अब कर्ज़ा कहां से देंगे, घर कैसे चलेगा।" इतना बताते बताते उनका गला भर आता है।

अच्छे लाल दिल्ली से करीब 600 किलोमीटर दूर उत्तर प्रदेश में बुंदेलखंड रीजन के ललितपुर जिले के पड़वा गांव में रहते हैं। पानी की कमी वाले ललितपुर में बुंदेलखंड के बाकी क्षेत्रों की तरह दालों की अच्छी खेती होती है।

राज्य- जिले (जहां ज्यादा बारिश हुई)

  • उत्तर प्रदेश 74
  • बिहार 38
  • हरियाणा 21
  • पश्चिम बंगाल 16
  • झारखंड 24
  • पंजाब 20
  • राजस्थान 24
  • मध्य प्रदेश 21
  • गुजरात 16
  • छत्तीसगढ़ 25
  • तेलंगाना 14

संबंधित ख़बर- उत्तर भारत में मौसम से हुई तबाही की 20 तस्वीरें, देखिए कैसे बर्बाद हुईं फसलें

ललितपुर के किसान अच्छे लाल जिनकी चने और गेहूं की फसल बर्बाद हुई। बरसात के सीजन में उड़द की फसल का मुआवजा आज तक नहीं मिला है। फोटो- अरविंद परमार


ये भी पढ़ें- तबाही के 15 दिन: ओलों की सफेद चादर के नीचे दबे किसानों के अरमान

बुदंलेखड की खेती मौसम पर निर्भर करती है और पिछले एक साल से यहां मौसम लगातार दगा दे रहा है। सितंबर-अक्टूबर में हुई अतिवृष्टि से उड़द की फसल चौपट हो गई थी, कई किसानों ने ललितपुर में आत्महत्या की थी। बहुत सारे किसान के घरों के युवा दिवाली से पहले पलायन कर गए थे, उसी ललितपुर में फसल बीमा का पैसा आज तक नहीं मिला है।

इसी जिले में समेता गांव के युवा किसान अरविंद कुमार निरंजन बताते हैं, "उड़द जब बर्बाद हुई थी तो गांव में लोगों के पास बीमा कंपनी की तरफ से प्रमाण पत्र आए थे, लेकिन चार महीने हो गए हैं पैसा बैंक खातों में आज तक नहीं आया।"

अच्छे लाल और अरविंद निरंजन जैसे किसानों की संख्या लाखों में है। 28 फरवरी से लेकर 16 मार्च तक के कई राज्यों में भारी बारिश, ओलावृष्टि और तेज हवा चली है। रबी के सीजन की गेहूं, सरसों, आलू, चना, जौ, आम और सब्जियों की फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है।

यूपी में सीतापुर जिले का युवा किसान जिनकी ३५ एकड़ गेहूं की फसल १४ मार्च भारी ओलावृष्टि, बारिश और हवा से बर्बाद हुई।

भारतीय मौसम विभाग के 16 मार्च को जारी आंकड़ों के अनुसार एक मार्च से लेकर 16 मार्च तक देश के 683 जिलों में से 381 में लार्ज एक्सेस रेन फॉल (भारी मात्रा में बारिश) है। आंकड़ों में बात करें तो ये 57 फीसदी के आसपास होता है।

यूपी के 75 जिलों में से 74 में भारी बारिश हुई है तो झारखंड के 24, बिहार के 38, हरियाणा के 21, पश्चिम बंगाल के 16, मध्य प्रदेश के 21, राजस्थान के 24, गुजरात के 16, छत्तीसगढ़ के 25 , पंजाब के 20 और तेलंगाना के 14 जिलों में भारी बारिश हुई है।

मौसम की जानकारी देने वाली निजी संस्था स्काईमेट वेदर में मेट्रोलॉडी और क्लाईमेट चेंज (जलवायु परिवर्तन) के वाइस प्रेसीडेंट महेश पालावत कहते हैं, "ये सीडिंग (बीज बनने का समय) का वक्त है। अगले कुछ दिनों में फसल कटने को तैयार थी, उस वक्त अगर तेज बारिश के साथ ओले गिरते हैं, हवाएं चलती हैं तो फसल बिछ जाती है, तो काफी नुकसान होता है।"

एक मार्च से १६ मार्च तक भारत में कहां और कितनी हुई बारिश- सोर्स- भारतीय मौसम विभाग

महेश पालावत ये भी बताते हैं, "मार्च के महीने में इतनी बारिश कभी नहीं होती है। दिल्ली में बारिश का रिकॉर्ड टूट गया है। क्योंकि मार्च के महीने में अब तक दो बार पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हुआ। फिलहाल मौसम साफ है लेकिन 18 से 20 तक एक बार फिर पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो रहा है, जिससे कुछ राज्यों में बारिश और ओले गिर सकते हैं लेकिन ये काफी कम होगा। इसके अलावा 23 मार्च को भी कुछ जगह मौसम बिगड़ सकता है।'

मार्च के महीने में जिन राज्यों में मौसमी तबाही आई वो ज्यादातर (पंजाब, हरियाणा, यूपी, एमपी जैसे उत्तर भारत के राज्य) सिंचिंत राज्य हैं जहां अच्छी खेती होती है, और इस बार अच्छी पैदावार की भी उम्मीद थी लेकिन अब फसलों का भारी नुकसान हो चुका है।

कृषि मंत्रालय ने इस साल गेहूं की रिकॉर्ड पैदावार 10.62 करोड़ टन होने की अनुमान जताया था, लेकिन अब ये उत्पादन गिर सकता है। साल 2019 में देश में 10.36 करोड़ टन गेहूं पैदा हुआ था। गेहूं के साथ दूसरी जो फसल को भारी नुकसान पहुंचा है वो सरसों है। राजस्थान, हरियाणा से लेकर यूपी तक सरसों को काफी नुकसान पहुंचा है। कृषि मंत्रालय अपने रबी फसल के पूर्वानुमान में पहले ही 1.56 फीसदी उत्पादन कम होने की आशांका जाहिर की थी।

यूपी के सीतापुर जिले में डेढ़ एकड़ से ज्यादा सरसों बोने वाले राजेंद्र कुमार (35 वर्ष) कहते हैं, 2-4 दिन में सरसों काटने वाले थे लेकिन अब सारी फलियां झड़ गई हैं। हमने तो कहीं से लेदे कर (उधार या ब्याज पर) फसल बोई थी अब वो बर्बाद हो गई। जब फसल नहीं तो हमारे बच्चे खाएंगे?

बारिश और ओलावृष्टि से सबसे ज्यादा नुकसान यूपी में हुआ है यहां 75 में से 74 जिले मौसम की चपेट में आए हैं। यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 14 मार्च को जालौन जिले में डाल्टनपुर गांव पहुंचे थे उन्होंने 51 किसानों को आर्थिक सहायता के चेक देने के बाद कहा था कि सरकार किसानों के साथ है। यूपी के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही भी आपदा प्रभावित जिलों के दौरे कर रहे हैं।

यूपी के इटावा जिले में बारिश से हुए नुकसान का जायजा लेते कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही। फोटो- साभार ट्वीटर

यूपी के अख़बरों में छपी रिपोर्ट के अनुसार 14 मार्च तक राहत आयुक्त कार्यालय से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार 23 जिलों में 1127707 हेक्टेयर क्षेत्रफल में रबी की फसल को नुकसान पहुंचा है।

फसलों की बर्बादी का मुद्दा 16 मार्च को संसद के ऊपरी सदन में उठा। भाजपा और सपा के सांसदों ने किसानों पर बड़ी तबाही बताते हुए तत्काल राहत की मांग की।

शून्य काल में बीजेपी सांसद विजय गोयल ने कहा कि बारिश और ओलों से दिल्ली के 50 हजार किसानों की गेहूं और सब्जियों की फसलें बर्बाद हुई हैं, उन्होंने दिल्ली की आम आदमी पार्टी से किसानों को 60 हजार रुपए प्रति एकड़ मुआवजा देने की मांग की।

बीजेपी सांसद हरनाथ सिंह ने यूपी में केंद्र से विशेष टीम भेजकर नुकसान के आंकलन और किसानों को मदद दिलाने की मांग की वहीं सपा सांसद ने रेवती रमण सिंह ने की किसानों के लिए तत्काल कदम उठाए जाने की मांग की है।

स्काईमेट के अनुसार यूपी के पश्चिमी और पूर्वी दोनों हिस्सों में सामान्य से व्यापक रूप में अधिक वर्षा दर्ज की गई है। 1 से 15 मार्च के बीच पूर्वी उत्तर प्रदेश में सामान्य से 808% अधिक 35.4 मिलीमीटर वर्षा हुई है। इसी तरह पश्चिमी हिस्सों में सामान्य से 741% अधिक 45.4 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है। इन भागों में क्रमशः 3.9 मिमी और 5.4 मिमी बारिश इस दौरान होती है।

हरियाणा में भिवानी, रोहतक समेत 21 जिलों में भारी बारिश हुई। 5 और 7 मार्च को ओलावृष्टि के बाद खेतों में पहुंचे हरियाणा के कृषि मंत्री जे पी दयाल ने कहा था, "किसान भाइयो घबराना नहीं सरकार आपके नुकसान की भरपाई करेगी।' डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला ने विशेष गिरादवारी के आदेश भी जारी किए थे लेकिन किसान और विपक्षी दल दोनों वहां नाखुश हैं।

कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता रणदीरप सुरजेवाला ने कहा हरियाणा में 40-50 फीसदी नुकसान हुआ है लेकिन खट्टर सरकार किसानों को लेकर चिंतित नहीं है।"

ये भी पढ़ें- हरियाणा: "20-25 दिनों में कटने वाली थी सरसों-गेहूं की फसल, अब एक दाना भी घर आना मुश्किल "


हरियाणा में भिवानी के किसान और भारतीय किसान यूनियन से जुड़े किसान नेता रमेश कुमार कहते हैं, हमारी बेल्ट (तोशाम हल्का) में बड़े पैमाने पर सब्जियों की खेती होती है लेकिन बीमा कंपनियां उनका बीमा नहीं करती है सरकार कर रही है कि सब्जियों के लिए अलग से कोई कानून नहीं है, जबकि सब्जियों में धान-गेहूं की अपेक्षा ज्यादा पैसे खर्च होते हैं। मैं कृषिमंत्री से मिला था लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।'

किसानों के लिए सबसे बड़ी समस्या ये कि मौसम का खतरा अभी टला नहीं है। भारतीय मौसम विभाग ने 16 मार्च को कहा कि अगले दो दिन पश्चिमी हिमालय के रीजन में मौसम साफ रहेगा जबकि उत्तर पश्चिमी भारत में 3 दिन मौसम अच्छा रहेगा लेकिन। 18 और 20 मार्च को एक बार फिर ओडिशा, पश्चिम बंगाल और झारखंड में बारिश, ओले और तेज हवाएं चल सकती हैं।

जबकि 17 से 20 मार्च का समय छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र के विदर्भ और पूर्वी मध्य प्रदेश में बारिश हो सकती है। इस दौरान 30-40 किलोमीटर प्रति घंटा की हवाएं भी चल सकती है। यहां आकाशीय बिजली और ओले भी गिरने की आशंका है।

किसानों की समस्या ये है भी है फसल में मौसम की मार खाई बची खुची फसल का उत्पादन तो गिरेगा ही जो फसल पैदा हो वो भी गुणवत्ता वहीं नहीं होगी। दागदार अनाज के मार्केट में रेट भी अच्छे नहीं मिलते हैं।


Next Story

More Stories


© 2019 All rights reserved.