“मेरे किसान पिता पर दो लाख रुपए का कर्ज था, वे परेशान थे, और अंत में जहर खा लिया”

“मेरे किसान पिता पर दो लाख रुपए का कर्ज था, वे परेशान थे, और अंत में जहर खा लिया”चिंताजनक बनी हुई है किसानों की स्थिति

“मेरे किसान पिताजी पर दो लाख रुपए से अधिक का कर्ज था, जिसको लेकर वह परेशान थे। और उन्होंने जहर खाकर आत्महत्या कर ली।" ये कहना है मध्य प्रदेश, सीहोर के एक किसान के बेटे का। जिसके किसान पिता ने मंगलवार को आत्महत्या कर ली।

सरकार 2022 तक किसानों की आमदनी दोगुनी करना चाहती है। लेकिन 2022 आने में तो बहुत समय है। जिस तरह से किसान मौत को गले लगा रहे हैं, ऐसे में ऐसा न हो कि 2022 तक बहुत देर हो जाये।

कर्नाटक में 3,515 किसानों ने की आत्महत्या

सूखे और फसलों को हुए नुकसान की वजह से अप्रैल 2013 से लेकर नवंबर 2017 तक कर्नाटक में 2,525 किसानों ने आत्महत्या की है। राज्य कृषि विभाग से यह आंकड़े मिले हैं।

विभाग ने कहा, अप्रैल 2013 से नवंबर 2017 तक कुल 3,515 किसानों के आत्महत्या करने की खबर है। वहीं अप्रैल 2008 से अप्रैल 2012 तक 1,125 किसानों ने आत्महत्या की थी। आंकड़ों में बताया गया है कि कुल 3,515 आत्महत्या के मामलों में कृषि विभाग ने यह स्वीकार किया है कि इनमें से 2,525 किसानों ने सूखे और फसलों को पहुंचे नुकसान की वजह से आत्महत्या की।

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इसमें कहा गया है कि अप्रैल 2015 से अप्रैल 2017 तक 2,514 किसानों के आत्महत्या के मामले सामने आए, जिनमें से 1,929 मामलों को स्वीकार किया गया। रिपोर्ट में बताया गया है कि अप्रैल 2017 से नवंबर 2017 तक राज्य में अच्छी बारिश हुई थी। इस दौरान 624 किसानों के आत्महत्या करने के मामले आए, जिनमें से विभाग ने 416 मामलों को स्वीकार किया। कृषि निदेशक बी वाई श्रीनिवास ने पीटीआई को बताया कि साल 2013 से अब तक 112 किसानों की आत्महत्या के मामलों की पुष्टि होनी बाकी है।

उन्होंने कहा, लंबित पड़े 105 मामले इस साल नवंबर तक के हैं और सात पिछले साल के हैं। श्रीनिवास ने बताया कि आत्महत्या के सबसे ज्यादा (1,483) मामले साल 2015-16 में और सबसे कम (106) मामले साल 2013-14 के बीच दर्ज किए गए। उन्होंने बताया, आत्महत्या करने वाले किसानों में सबसे ज्यादा किसान गन्ने की खेती करने वाले हैं। इसके बाद कपास और धान की खेती करने वाले किसानों की संख्या है।

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श्रीनिवास ने बताया कि सरकार ने किसानों को राहत देने के लिए कदम उठाए हैं। सरकार ने बैंकों से कहा है कि वह किसानों को ऋण चुकाने के लिए मजबूर न करें और ब्याज माफी के साथ किसानों की छोटी और मध्य अवधि वाले फसल ऋण को बडी अवधि वाले ऋण में बदल दिया जाए। कृषि अधिकारी कुमारस्वामी ने कहा कि सरकार ने उन निजी साहूकारों के खिलाफ भी मामले दर्ज किए हैं जो 30-40 फीसदी ब्याज दर पर किसानों को ऋण देते हैं। उन्होंने बताया कि निजी साहूकारों पर 1,332 मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें से पिछले तीन साल में 585 को गिरफ्तार किया गया है।

मध्य प्रदेश में दो किसानों ने की आत्महत्या

मध्य प्रदेश के सीहोर एवं हरदा जिलों में कर्ज से परेशान होकर दो किसानों ने जहर खाकर कथित रूप से आत्महत्या कर ली। मृतक किसानों की पहचान हरजी लाल (60) एवं अंतरसिंह (45) के रूप में की गई है। इन दोनों की मंगलवार शाम मौत हुई है। हरदा पुलिस अधीक्षक राजेश कुमार सिंह ने बुधवार को बताया, हरदा जिले की टिमरनी तहसील के ग्राम खोड्याखेड़ी में किसान अंतर सिंह राजपूत ने मंगलवार को सल्फास खाकर खुदकुशी कर ली। उन्होंने बताया कि मौके पर पहुंची पुलिस टीम ने मामले में जाँच शुरु कर दी है।

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पुलिस को किसान की जेब से सल्फास की शीशी मिली है। सिंह ने बताया कि मामले में जाँच के बाद ही कुछ कहा जा सकता है कि उसने यह जघन्य कदम क्यों उठाया। वहीं, इछावार पुलिस थाना प्रभारी एम एस खान ने बताया "सीहोर जिले की तहसील इछावर के ग्राम आर्या के किसान हरजी लाल की कल शाम भोपाल में उपचार के दौरान मौत हो गई। हरजी लाल के बेटे शिवचरण ने बताया "मेरे पिताजी पर दो लाख रुपए से अधिक का कर्ज था, जिसको लेकर वह परेशान थे। इसी के चलते उन्होंने यह कदम उठा लिया।"

भारत में हर साल 12,000 किसान कर रहे हैं आत्महत्या

सरकार 2013 से किसानों की आत्महत्या के आंकड़े जमा कर रही है। इसके मुताबिक हर साल 12 हजार किसान अपनी जिंदगी खत्म कर रहे हैं। कर्ज में डूबे और खेती में हो रहे घाटे को किसान बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं।

सरकार के अनुसार 2015 में कृषि क्षेत्र से जुड़े कुल 12,602 लोगों ने आत्महत्या की। इनमें 8,007 किसान-उत्पादक थे जबकि 4,595 लोग कृषि संबंधी श्रमिक के तौर पर काम कर रहे थे। 2015 में भारत में कुल 1,33,623 आत्महत्याओं में से अपनी जान लेने वाले 9.4 प्रतिशत किसान थे।

2015 में सबसे ज्यादा 4,291 किसानों ने महाराष्ट्र में आत्महत्या की जबकि 1,569 आत्महत्याओं के साथ कर्नाटक इस मामले में दूसरे स्थान पर है। इसके बाद तेलंगाना (1400), मध्य प्रदेश (1,290), छत्तीसगढ़ (954), आंध्र प्रदेश (916) और तमिलनाडु (606) का स्थान आता है। 2014 में आत्महत्या करने वाले किसानों की संख्या 12,360 और 2013 में 11,772 थी।

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मुख्य न्यायाधीश जस्टिस जेएस खेहर की अध्यक्षता में तीन जजों वाली एक बेंच किसानों की स्थिति और उसमें सुधार की कोशिशों से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई कर रही है। इसी के दौरान सरकार ने ये आंकड़े पेश किए हैं। यह याचिका सिटिजन रिसोर्स एंड एक्शन इनीशिएटिव की तरफ से दायर की गई है। पिछले एक दशक के दौरान किसानों की आत्महत्या के हजारों मामले सामने आये हैं। अधिकतर किसानों ने कीटनाशक पीकर तो कुछ ने फांसी लगाकर अपनी जान दे दी। किसानों पर सबसे अधिक मार बेमौसम बारिश और सूखे से पड़ती है और कई बार दाम गिरने से भी इनकी कमाई पर असर पड़ता है।

किसानों की बदहाली की एक तस्वीर पिछले दिनों दिल्ली में भी दिखाई दी तमिलनाडु से आए किसानों ने अपने विरोध प्रदर्शन से तरीकों से सबका ध्यान खींचा।

(भाषा से इनपुट के साथ)

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