MSP से 500-1000 रुपए प्रति कुंतल के नुकसान पर कपास बेच रहे किसान

Mithilesh DubeyMithilesh Dubey   9 Dec 2019 10:30 AM GMT

MSP से 500-1000 रुपए प्रति कुंतल के नुकसान पर कपास बेच रहे किसान

सरकारी खरीद के अभाव में कपास की खेती करने वाले किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। भारतीय कपास निगम लिमिटेड ने एक अक्टूबर से समर्थन मूल्य पर कपास खरीदने की घोषणा की थी। लेकिन 24 नवंबर तक मात्र दो लाख गांठ (एक गांठ- 170 किलो) की ही खरीदी हो पाई है जो कुल आवक का मात्र 6 फीसदी है।

"दो बार कपास लेकर खरीद केंद्र गया। पहली बार गया तो केंद्र बंद था। दूसरी बार भी गया तो बिक्री नहीं हुई। फिर मैंने 4800 रुपए कुंतल के हिसाब से व्यापारियों को बेच दिया। हालांकि पूरी उपज नहीं बेची है फिर इससे हमें नुकसान हुआ है।" महाराष्ट्र यवतमाल के खैरगांव पाटलकोड़ा के किसान नेमराज कहते हैं।

नेमराज ने 18 एकड़ में कपास की खेती की है। जिसमें अनुमानित 200 कुंतल से ज्यादा कपास पैदा होना चाहिए। उनके घर से मंडी की दूरी कुल 12 किलोमीटर है। नेमराज फोन पर आगे बताते हैं, " एक गाड़ी (टाटा-407) को भरने में मजदूर 1000 रुपए ले लेता है। इसके बाद मंडी में ले जाने के लिए 1800 से 2200 तक का किराया लग जाता है। फिर मंडी गाड़ी खाली करवाने में 400 रुपए खर्च हो जाता है। एक 407 गाड़ी में 28 कुंतल तक कपास आजा जाता है। ऐसे में पूरे खर्च का हिसाब आप खुद ही लगा लीजिए। इतना खर्च करने के बाद मंडी से वापस बिना माल बेचे वापस तो नहीं आया जा सकता।" नेमराज की बातों से साफ समझा जा सकता है कि मंडी पहुंचकर किसानों को कैसे घाटे तक में अपनी उपज बेचनी पड़ जाती है।

केंद्र सरकार ने चालू कपास सीजन 2019-20 (अक्टूबर-सितंबर) के लिए लंबे रेशे वाले कपास का एमएसपी 5,550 रुपए प्रति कुंतल और मध्यम रेशे के कपास का 5,255 रुपए प्रति कुंतल तय किया है। केंद्र सरकार भारतीय कपास निगम लिमिटेड (सीसीआई) के माध्यम से कपास खरीदती है, जिसकी देशभर में 225 मंडियां हैं।

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सीसीआई के एक अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर फोन पर जानकारी दी, " इस सीजन में 24 नवंबर तक 32 लाख गांठ कपास की आवक चुकी है, लेकिन इसमें से सीसीआई ने केवल दो लाख गांठ ही खरीदा है। तेलंगाना राज्य में सबसे ज्यादा 1.20 लाख गांठ कपास की खरीदी हुई है। इसके अलावा 22 हजार गांठ पंजाब से, 19 हजार गांठ राजस्थान से, 13 हजार गांठ गुजरात से और 12 हजार गांठ हरियाणा से खरीदी गई है। वहीं अगले साल इस समय मंडियों में 36 लाख गांठ कपास की आवक हुई थी।"

उन्होंने आगे बताया कि महाराष्ट्र नमी के कारण कुछ किसानों से कपास नहीं लिया गया, बाकी जगहों पर हालात ठीक हैं। सीजन 2018-19 में भारतीय कपास निगम लिमिटेड ने 10.70 लाख गांठ कपास एमएसपी की दर पर खरीदा था।

सीसीआई के अधिकारी ने आगे बताया, "12 फीसदी से ज्यादा नमी होने के कारण हम कपास नहीं खरीदते। बहुत सी मंडियों में कपास की जो आवक हो रही है उसमें 12 से 30 फीसदी तक नमी है जिस कारण खरीदी नहीं हो पाई।"

मुंबई के कपास कारोबारी नमित सोगानी कहते हैं, " सीसीआई ने सख्त गाइडलाइन के कारण आवक कम हो रही है। इधर लगातार बारिश होने के कारण कपास में नमी ज्यादा है जिसका नुकसान किसानों को उठाना पड़ रहा है। बाहरी व्यापारी इसका फायदा उठा रहे हैं कि और कम कीमत में किसानों से कपास ले रहे हैं।"

उत्पादन का अनुमान और बुआई का रकबा बढ़ा

कृषि मंत्रालय ने अपने अनुमान में बताया है कि चालू फसल सीजन में कपास का कुल उत्पादन 13.62 फीसदी बढ़कर 354.50 लाख गांठ हो सकता है। इससे पहले की फसल सीजन में कपास की कुल पैदावार 322.67 लाख गांठ ही हुई थी। वहीं अगर बुआई की बात करें तो इस साल कुल 127.67 लाख हेक्टेयर में कपास की खेती हुई है जबकि पिछले साल यह रकबा 121.05 लाख हेक्टेयर ही था।

कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने भी अनुमान जताया है कि देश में इस साल कपास की बंपर पैदावार होगी। हालांकि महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में सितंबर-अक्टूबर की भारी बारिश के चलते कपास की फसल को नुकसान हुआ है।

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राजस्थान जोधपुर मंडी के कपास कारोबोरी और कमोडिटी एक्सपर्ट विजय सरदाना बताते हैं, "ऐसा नहीं है कि मंडियों में कपास की आवक नहीं है, लेकिन सीसीआई में खरीद कम हो रही है। अब कोई किसान जब दूर से भाड़ा-किराया खर्चकर मंडी तक अपनी उपज लेकर आता है तो उसे वापस तो लेकर जायेगा नहीं। ऐसे में व्यापारियों को 4500-5000 प्रति कुंतल के बीच कपास बेच देता है, जबकि एमएसपी इससे ज्यादा है। इस साल बहुत से क्षेत्रों में देर तक बारिश हुई है जिस कारण कपास में नमी ज्यादा है। किसानों के हित को देखते हुए सीसीआई को थोड़ी नरमी बरतनी चाहिए।"

निर्यात में कमी के कारण बढ़ी समस्या

एमएसपी पर कपास की खरीद क्यों नहीं हो रही इसके लिए सुस्त निर्यात को भी जिम्मेदार बताया जा रहा है। आयात-निर्यात विशेषज्ञ और मोलतोल डॉट इन के फाउंडर कमल शर्मा कहते हैं, " दूसरे देशों के बाजार में कपास की कीमत गिर रही है जिसका असर निर्यात पर पड़ रहा है। आने वाले समय जब आवक बढ़ेगी तब हो सकता है कि स्थिति में कुछ सुधार हो। दूसरे देशों जैसे अमेरिका के बाजार में कपास की कीमत गिरी है जिस कारण दूसरे देश निर्यात से कतरा रहे हैं।"


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