उत्तराखंड के हल्द्वानी में बनेगी देश की पहली जैविक मंडी, किसानों को मिलेगी अच्छी कीमत

सरकार नैनीताल जिले के हल्द्वानी में देश की पहली जैविक कृषि उत्पाद मंडी खोले जाने की तैयारी कर रही है। इसके लिए सरकार ने जमीन भी देख ली हैं। अगर यह मंडी खुलती है और जैविक फसलों को सही मार्केटिंग मिलती है तो प्रदेश में जैविक खेती को काफी बढ़ावा मिलेगा।

Mo. AmilMo. Amil   4 July 2019 11:11 AM GMT

उत्तराखंड के हल्द्वानी में बनेगी देश की पहली जैविक मंडी, किसानों को मिलेगी अच्छी कीमत

नैनीताल(उत्तराखंड)। सरकार नैनीताल जिले के हल्द्वानी में देश की पहली जैविक कृषि उत्पाद मंडी खोले जाने की तैयारी कर रही है। इसके लिए सरकार ने जमीन भी देख ली हैं। उत्तराखंड कृषि उत्पादन विपणन बोर्ड जैविक कृषि उत्पाद मंडी खोलने के लिए पूरी तैयारी से जुटा हुआ है। अगर यह मंडी खुलती है और जैविक फसलों को सही मार्केटिंग मिलती है तो प्रदेश में जैविक खेती को काफी बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा सरकार के इस कदम से पहाड़ो से हो रहे पलायन को रोकने में भी मदद मिलेगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केदारनाथ यात्रा के दौरान उत्तराखंड को जैविक राज्य बनाने का सपना देखा था। केन्द्र और राज्य, दोनों सरकारें मिलकर इस सपने को साकार करने में जुट गयी हैं। उत्तराखंड कृषि उत्पादन विपणन बोर्ड के माध्यम से प्रदेश में 23 फल-सब्जी मंडी स्थापित हैं। सरकार ने जैविक उत्पादों की मार्केटिंग के लिए मंडी बोर्ड की ओर से जैविक कृषि उत्पाद मंडी खोलने को मंजूरी दी है। इसके लिए हल्द्वानी मंडी समिति के समीप ही बोर्ड ने भूमि का चयन कर लिया है। जल्द ही यह भूमि मंडी समिति के नाम स्थानांतरित कर दी जाएगी।


बोर्ड दावा करता है कि यह देश की पहली जैविक कृषि उत्पाद मंडी होगी। यहां सिर्फ जैविक उत्पादों का कारोबार होगा। यहां पर किसानों से ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन उत्पाद की खरीद होगी। इसके साथ ही आढ़तियों का भी प्रमाणीकरण भी किया जाएगा। यह मंडी खुलते ही जैविक फसलों को मार्केट के साथ बेहतर दाम मिलने की संभावना बढ़ जाएगी। इससे प्रदेश प्रदेश में एकाएक जैविक खेती के प्रति किसानों का रुझान बढ़ेगा। इसके अलावा अन्य प्रदेश के व्यपारियों को भी जैविक फसल खरीदने के लिए एक ही स्थान पर मार्केट मिल जाएगी।

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मंडी बोर्ड के अध्यक्ष गजराज सिंह बिष्ट मीडिया रिपोर्ट में कहते हैं कि "प्रदेश में जैविक खेती करने वाले किसानों को अच्छा बाजार मिले जिसके लिए मंडी बोर्ड प्रयासरत है। इसको देखते हुए हल्द्वानी में जैविक मंडी स्थापित की जाएगी जो प्रदेश ही नही बल्कि देश की पहली जैविक मंडी होगी। मंडी खुलने से जैविक खेती करने वाले किसानों और जैविक उत्पादों को बेचने वाले व्यापारियों को एक ही जगह सुविधाएं मिल सकें।"

जैविक मंडी खुलने से होगा जैविक किसानों को लाभ

प्रदेश के कुमाऊं मण्डल के सबसे बड़े शहर हल्द्वानी में जैविक कृषि उत्पाद मंडी खोले जाने के बारे में जब गांव कनेक्शन ने प्रदेश के जैविक किसानों से बात की तो उन्होंने सरकार के इस कदम का स्वागत किया। हल्द्वानी से करीब 10 किलोमीटर दूर गांव नकायल में 80 फीसदी खेती जैविक होती है। यहां के 68 वर्षीय किसान बीढी भट्ट कहते हैं कि "हल्द्वानी में अगर जैविक कृषि उत्पाद मंडी खुलती है तो हमें बहुत बड़ी राहत मिलेगी। हमारे गांव में 80 फीसदी जैविक खेती होती है। हम लोग अपने खाने के लिए खुद जैविक फसल की पैदावार करते हैं, जो बाकी बच गया उसको हम मंडी ले जाते हैं, मंडी ले जाने पर हमको मार्केट का मिलना मुश्किल हो जाता है। जैविक मंडी खुलने से हमारी फसलों की मांग के साथ दाम भी बढ़कर मिलेंगे।"

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प्रदेश के प्रगतिशील किसान नरेंद्र सिंह मेहरा गांव कनेक्शन को बताते हैं "यदि देश की पहली जैविक उत्पाद मंडी हल्द्वानी में खुलती है तो यह किसानों के लिए एक बहुत ही सुखद अनुभूति होगी। इसके बदलाव चंद समय में ही देखने को मिलने लगेंगे क्योंकि यह किसानों की और समय की सबसे बड़ी जरूरत थी। जहां तक जैविक खेती में इसके फायदे का सवाल है वह अपने आप ही दिखने लगेगा क्योंकि जब किसान के पास जैविक उत्पाद होगा, जैविक उत्पादों को बेचने के लिए बाजार होगा, तो परिणाम तो सकारात्मक होंगे ही। इसके अतिरिक्त भी कुछ सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे। रोजगार के अवसर बढ़ेंगे जैविक कृषि के प्रति किसानों का रुझान बढ़ेगा और साथ-साथ जैविक उत्पादों को बेचने के बाद उनके आर्थिक स्थिति में सुधार आएगा जो उनके जीवन स्तर को ऊंचा उठाने में कारगर साबित होगा।"


पिछले 15 वर्षों से किसानों को जैविक खेती की ट्रेनिंग देने वाले जैविक किसान अनिल पांडे कहते हैं कि "जैविक मंडी खुलने से निश्चित ही देश की जैविक खेती एवं उत्तराखंड की जैविक खेती किसानी को लाभ होगा क्योंकि अभी तक जैविक खेती का कोई निश्चित ढांचा नहीं बन पाया है। न हीं किसानों की जैविक उपज को देश में कहीं पर बेचने की उचित व्यवस्था है। जब हल्द्वानी में जैविक मंडी बन जाएगी तो किसान जैविक खेती में रुचि लेंगे और देश में जैविक खेती का प्रचार-प्रसार अधिक होगा। जैविक मंडी खुलने से पहाड़ी राज्यों उत्तराखंड, हिमाचल, असम, मेघालय, सिक्किम आदि के उत्पाद भी हल्द्वानी में बिक्री हेतु उपलब्ध होंगे। इससे जैविक खेती का क्षेत्रफल बढ़ेगा और उत्पादन में भी वृद्धि होगी जिससे देश का किसान समृद्ध होगा।" वह कहते हैं कि "जैविक मंडी बनने से जैविक खेती को फायदा होगा। एक और जैविक उत्पाद खरीदने वालों को शुद्ध भोजन प्राप्त होगा और किसानों की लागत में कमी आएगी। किसानों का उत्पादन का मूल्य भी अधिक मिलेगा जिससे किसानों की आय में बढ़ोतरी होगी। साथ-साथ पर्यावरण, जल संरक्षण, पशु पक्षी संरक्षण, मित्र कीट संरक्षण, एवं सॉइलहेल्थ मैनेजमेंट( मृदा स्वास्थ्य) पर भी कार्य किया जाएगा जिससे निश्चित ही सभी लोगों को लाभ होगा।

पहाड़ों की खेती को होगा लाभ, पलायन रोकने में होगी मददगार

जैविक मंडी खुलने से पहाड़ों की खेती और पलायन पर क्या असर होगा इसके बारे में जैविक ट्रेनर अनिल पड़े का कहना है कि "पहाड़ों की खेती पर भी निश्चित ही लाभ होगा क्योंकि पहाड़ों की खेती तो बाय डिफॉल्ट ऑर्गेनिक( कुदरती जैविक) होती है। जरूरत है तो इस खेती को जैविक प्रमाणीकरण के अंतर्गत लाने की जिससे वहां के उत्पादों को प्रमाणित कर जैविक उत्पाद के रूप में देश विदेश में बिक्री हेतु भेजने में सहायता मिलेगी और किसानों को अपनी फसल का मूल्य अधिक मिलने पर किसान खेती किसानी में अपना मन लगाएंगे। पहाड़ों की जैविक खेती और अधिक समृद्ध होगी। उत्तराखंड में पलायन रोकने में निश्चित ही जैविक खेती एक विशेष भूमिका निभा सकती है क्योंकि पहाड़ों की खेती तो कुदरती तौर पर जैविक मानी जाती है वहां पर वर्षा आधारित खेती ही की जाती है और रसायनों का प्रयोग ना के बराबर किया जाता है। उत्तराखंड मैं प्रत्येक किसान गोवंश पालते हैं और गो पालन किसानों का मुख्य व्यवसाय भी है। जब किसानों को जैविक उत्पादों का मूल्य अधिक मिलने लगेगा तो किसान खेती के साथ-साथ डेरी फॉर्म, मधुमक्खी पालन, मुर्गी पालन, मछली पालन, मशरूम, औषधि पौधे आदि की खेती भी करना प्रारंभ कर देंगे, और सिक्किम प्रदेश की तर्ज पर प्रदेश में टूरिज्म भी बढ़ेगा। टूरिज्म से भी उत्तराखंड प्रदेश की आमदनी बढ़ेगी और यहां के युवा बाहरी प्रदेशों में न जाकर अपनी छोटी-छोटी जमीनों पर जैविक कृषि कार्य कर अपने उत्पादों को नेशनल इंटरनेशनल मार्केट दिला सकते हैं।


पर्यावरण और नदी बचाने पर काम करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता जगदीश नेगी कहते हैं कि "जैविक मंडी खुलने से प्रदेश के लिए बहुत बढ़िया कार्य होगा। जैविक उत्पाद महंगे बिकते है, इससे पलायन जरूर रुकेगा। पहाड़ के बहुत लोग जैविक खेती करेंगे, पहाड़ में गाय आदि खूब पाली जाती है, जैविक खाद आसानी से उपलब्ध हो जाती है। इससे पहाड़ों की खेती पर बहुत अच्छा असर पड़ेगा। अभी तक इस पर ध्यान नही दिया गया। जैविक फसलों की बहुत डिमांड है, ये स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छी होती है, इससे बीमारिया भी नहीं होती है। अभी तक काश्तकारों की फसल आढ़तियों द्वारा कौड़ियों के दाम खरीदी जाती है। आढ़ती खूब मुनाफा कमा रहे है, किसान को उचित मूल्य नही मिल पाता है, जिससे खेती से मोहभंग हो रहा है। मंडी खुलने से किसानों को लाभ होगा।

अहम सवाल यह भी, इस पर काम होना जरूरी

जैविक ट्रेनर अनिल पांडे प्रदेश में जैविक मंडी खोले जाने से पहले इसमें कुछ सुधार की बात करते हुए कहते हैं कि "जैविक मंडी का शुभारंभ तो किया जाना निश्चित हो गया है, परंतु उत्तराखंड में जैविक खेती करवाने वाले कर्मचारियों का कोई ढांचा 18 वर्ष बीत जाने के उपरांत भी नहीं हो पाया है। क्या खाली मंडी बनाने से ही प्रदेश जैविक प्रदेश बन जाएगा, जैविक खेती बढ़ जाएगी, किसान की आय डबल हो जाएगी यह सवाल समझ से परे है। बेहतर होता कि पहले जैविक खेती कर्मचारियों का ढांचा एवं जैविक खेती क्रियान्वयन कैसे होगा इस पर विचार किया जाता, कौन किसानों को, आढ़तियों को जैविक का प्रमाण पत्र देगा।" वह सरकार से प्रश्न करते हुए कहते हैं कि "प्रदेश में जैविक खेती की कमान संभाल रहे 95 ब्लॉकों में कार्यरत 95 जैविक प्रशिक्षक अल्प मानदेय मे कार्य करने को मजबूर है, जिन्हें वर्ष मैं एक बार कार्य आधारित मानदेय दिया जाता है। देहरादून में उत्तराखंड जैविक उत्पाद परिषद का गठन कर दिया गया। वहां से जैविक खेती के दिशा निर्देश दिए जाते हैं परंतु वहां के कर्मचारी मानदेय पर कार्य करने को विवश हैं। क्या ऐसे में कर्मचारी उत्तराखंड को जैविक प्रदेश बनाने में अग्रणी भूमिका निभाएंगे।

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प्रगतिशील किसान नरेंद्र सिंह मेहरा का कहना है कि "अभी तक की सबसे बड़ी बाधा उत्तराखंड के किसानों को जैविक बाजार न मिलने का थी। किसानों को मंडी में ही दुकानें आवंटित कराई जाएं। यदि इन दुकानों का आवंटन वास्तविक रुप से जैविक खेती करने वाले किसानों को होता है, तो यह इस प्रदेश के जैविक किसानों के लिए एक सकारात्मक प्रयास होगा । यदि जैविक मंडी की दुकानों के आवंटन में जरा सी भी गलती की गई या उन दुकानों को आवंटित करवाने में राजनीति लाभ को लेते हुए चंद् लोग सफल हुए तो यह किसानों के हित में न होकर चंद बिचौलियों का लाभ होगा। पूर्व में हल्द्वानी मंडी समिति का निर्माण इस उद्देश्य से किया गया था कि यह दुकानें किसानों को उनकी उपज को बेचने के लिए आवंटित की जाएंगी। लेकिन उन दुकानों को हथियाने में बिचौलिए कामयाब रहे जिसका परिणाम आज इतनी बड़ी हल्द्वानी मंडी में एक भी दुकान का जैविक दुकान के रूप में आवंटन न होना इस प्रदेश के लिए एक प्रश्न चिन्ह खड़ा करता है।"


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