महाराष्ट्र: बारिश से अंगूर की फसल को भारी नुकसान, सटाना में एक ही किसान का 20 लाख का बाग तबाह

अंगूर की कीमतें इस बार बढ़ सकती हैं। बारिश के चलते अंगूर की अगैती फसल को नुकसान हुआ है। कई किसानों को लाखों रुपए का नुकसान हुआ है। देखिए वीडियो

Arvind ShuklaArvind Shukla   7 Oct 2019 11:04 AM GMT

नाशिक/लखनऊ। पिछले दिनों हुई लगातार बारिश देश के कई हिस्सों में किसानों पर भारी पड़ रही है। महाराष्ट्र में अंगूर की फसल की अगैती खेती करने वाले किसानों को भारी नुकसान हुआ है। कई किसानों ने बताया उन्हें 20-25 लाख का नुकसान हुआ है।

नाशिक जिले के सटाना तालुका पिंगलवाड़े गांव में रहने वाले जिभाऊ भामरे (55वर्ष) इन दिनों सदमे में हैं। उनकी 2 एकड़ अंगूर की फसल तैयार थी लेकिन 5-6 अक्टूबर हो हुई बारिश से पूर बाग गिर रहा। भारी मन से जिभाऊ भामरे बताते हैं, माल लगभग रेडी थी 4-5 दिन में अंगूर की कटाई शुरू हो जाती। करीब 20 टन माल था बाग में। मेरी बाग का अंगूर यूरोप और कलकत्ता जाता है। लेकिन अब कुछ नहीं होगा। करीब 17-18 लाख का नुकसान हुआ है। भामरे के मुताबिक उनके गांव में 200 हेक्टेयर में अंगूर की बाग प्रभावित हुई है। भामरे के मुताबिक 17-18 लाख के अंगूर के साथ ही मेरी बाग का मचान भी बर्बाद हो गया। ये भी कई लाख में तैयार होता है।

अंगूर का अपना गिरा बाग दिखाते जिभाऊ भामरे। (दाएं) फोटो- किसान के सौजन्य से।

महाराष्ट्र में नाशिक, पुणे और सांगली जिले में अंगूर की बड़े पैमाने पर खेती होती है। इन मानसून में कई दौर की लगातार बारिश से इन तीनों जिलें में अंगूर की अगैती (पहले पकने वाली) फसल को भारी नुकसान हुआ है। नाशिक जिले में सटाना, कल्वन और मालेगांव तालुका अगैती फसल के लिए जाने जाते हैं। लेकिन इस बार सितंबर के आखिर और अक्टूबर के पहले हफ्ते की बारिश से तैयार हो रहे अंगूर फट गए हैं। जिससे किसानों को भारी नुकसान हुआ है।

मुंबई से करीब 250 किलोमीटर दूर सटाना तालुका के पिंगलवाडे गांव के जिभाऊ के उनके आसपास के दर्जनों गांवों में फसल को नुकसान हुआ है। पिंगलवाड़े गांव से 3 किलोमीटर पहले करनजार गांव पड़ता है। यहां के युवा किसान दीपक कालू देवरे के डेढ़ एकड़ बाग में नुकसान हुआ है। दीपक फोन पर बताते हैं, हमारे इलाके में अंगूर सबसे पहले तैयार होता है किसान को अच्छा रेट भी मिलता है। अभी तो इतनी तेज बारिश हुई है इससे अंगूर गुच्छे में ही फट जा रहा है। अगैती फसल में 20-25 टका (फीसदी) का नुकसान है। लेकिन अगर अगले 4-5 दिन और बारिश हुई तो 80 टका का नुकसान हो जाएगा।

दीपक दिन में कई बार मौसम की जानकारी लेते हैं उनके मुताबिक नाशिक में 12-14 तारीख तक बारिश होने की बात की जा रही है। ऐसे हुआ तो बहुत नुकसान होगा। जिभाऊ भामरे के मुताबिक कृषि, बागवानी विभाग के अधिकारियों के साथ तहसीलदार ने भी उनके खेत का दौरा किया है लेकिन उन्हें नही लगता कि सरकार कोई मदद करेगी। महाराष्ट्र में इन दिनों विधानसभा चुनाव का शोर है। लेकिन नाशिक जिले में किसानों में मिली जुली प्रतिक्रिया है। बारिश से टमाटर, अंगूर, और प्याज सभी फसलों को नुकसान हुआ है लेकिन जिन किसानों की फसल बची है वो अच्छे रेट का फायदा भी उठा रहे हैं।

नाशिक के सटाना तालुका के एक बाग में अंगूर की फसल।

25 से 27 सितंबर तक गांव कनेक्शन की टीम नाशिक में थी। इस दौरान कई इलाकों में जाना हुआ था। सटाना तालुका के कुछेक बागों में अंगूर काटे जा रहे थे। इस दौरान पारनेर गांव के किसान कृष्णा देवरे अपने बाग से अंगूर काट रहे थे। जितने अंगूर उनकी कैरेट में थे उससे ज्यादा नीचे पडे थे।

पूछने पर कृष्णा देवरे ने अंगूर की एक कतार दिखते हुए कहते हैं, ये देखिए सब फट कर सड़ रहे हैं। मेरे पास 4 एकड़ अंगूर है। जिसमें 2 एकड़ जल्द तैयार होने वाला है। मैंने कुछ कुछ तोड़ना भी शुरु कर दिया था। 90 रुपए प्रति किलो का रेट भी मिला रहा था लेकिन इसी बीच बारिश हो गई और अंगूर सड़ने लगा है। मेरे खेत में 60 फीसदी अंगूर बर्बाद हो गया है।

कृष्णा देवरे बताते हैं, एक एकड़ अंगूर की बाग में एक साल में दो से लेकर 3 लाख और औसतन ढाई लाख रुपए का खर्चा आता है। अगर सब ठीक रहे तो इसमें 6-7 लाख (लागत हटाकर 4 लाख) की कमाई हो जाती है। लेकिन अंगूर की खेती में रिस्क भी बहुत है। बारिश, धूप और ज्यादा सर्दी सबसे नुकसान होता है।

अंगूर की बाग 18 महीने में तैयार होती है और एक साल में फसल आना शुरु होते हैं। एक फसल को तैयार होने में 110 दिन चाहिए होते हैं। अंगूर की बाग की किसान साल में दो बार कटाई करते हैं। जो किसान अगैती फसल लेते हैं वो जून-जुलाई में कटिंग करते हैं और कि किसान सितंबर-अक्टूबर तक में।

दीपक कालू देवरे बताते हैं, अंगूर की अगैती फसल की खेती किसान पूरी तरह अपने रिस्क पर करता है। इसमें अच्छा मौमस और भाव मिलने पर ठीक-ठाक मुनाफा हो जाता है। मौसम के साथ ही इसमें दिक्कत ये रहती है कि सरकार किसी तरह की कोई मदद नहीं करती, न ही इसका बीमा होता है। जबकि पिछैती फसल में नुकसान होने पर सरकार थोड़ी बहुत मदद कर देती है।



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