देवरिया कांड: सिलाई मशीन सेंटर से शेल्टर होम तक, गिरिजा त्रिपाठी ने जुटाई जबरदस्त दौलत और ताकत

देवरिया के स्थानीय निवासियों के लिए यह पूरा मामला जितना हैरान करने वाला है उतना ही हैरान करने वाला है गिरिजा त्रिपाठी का सामान्य गृहणी से लेकर प्रशासन से टक्कर लेने वाली महिला बनने तक का सफर।

देवरिया कांड: सिलाई मशीन सेंटर से शेल्टर होम तक, गिरिजा त्रिपाठी ने जुटाई जबरदस्त दौलत और ताकत

देवरिया के चर्चित बालिका गृह केस की संचालिका गिरिजा त्रिपाठी फिलहाल पुलिस की गिरफ्त में हैं। गिरिजा पर बालिका गृह की आड़ में सेक्स रैकेट चलाने का आरोप है। देवरिया के स्थानीय निवासियों के लिए यह पूरा मामला जितना हैरान करने वाला है उतना ही हैरान करने वाला है गिरिजा त्रिपाठी का सामान्य गृहणी से लेकर प्रशासन से टक्कर लेने वाली महिला बनने का सफर।

करीब 50 बरस की गिरिजा त्रिपाठी का जन्म देवरिया जिले के खुखुंदू पुलिस थाने के रूपाई गांव में हुआ था। उनकी शादी देवरिया के नूनख्वार गांव के मोहन त्रिपाठी से हुई थी। मोहन देवरिया की भटनी शुगर मिल में साधारण कर्मचारी थे, घर की आर्थिक स्थिति में हाथ बंटाने के लिए गिरिजा सिलाई सेंटर चलाती थीं।

गिरिजा की शासन-सत्ता से पहली टक्कर तब हुई जब छंटनी की वजह से मोहन त्रिपाठी की नौकरी पर संकट आया। भटनी के रहने वाले राजेश कुमार ने बताया कि गिरिजा ने मिल प्रबंधन के खिलाफ न केवल धरना दिया बल्कि आत्मदाह करने की धमकी भी दी। मिल प्रबंधन झुक गया और गिरिजा नेता बन गईं। भटनी में प्रौढ़ शिक्षा केंद्र बनने पर गिरिजा प्रौढ़ों को पढ़ाने लगीं और प्रशासनिक अधिकारियों के संपर्क में आईं। चीनी मिल बंद होने पर गिरिजा देवरिया चली आईं और यहां रेलवे स्टेशन रोड पर मां विंध्यवासिनी सेवा संस्थान नामक आश्रय गृह और स्वंय सेवी संस्था चलाने लगीं।



करीब दो दशक तक गिरिजा ने काफी पैसा कमाया। उन्होंने गोरखपुर में एक वृद्धाश्रम खोल लिया, इसके अलावा देवरिया के राजला इलाके और रेलवे स्टेशन रोड पर शेल्टर होम भी चलता रहा। उनकी बड़ी बेटी कनकलता फिलहाल पुलिस हिरासत में है और वह जिला प्रोबेशन अधिकारी गोरखपुर के दफ्तर में संविदा पर काम करती है। गिरिजा का बेटा अध्यापक है। छोटी बेटी कंचनलता देवरिया के शेल्टर होम की अधीक्षिका थी।

देवरिया में शेल्टर होम खोलने के साथ ही गिरिजा के काफी रसूखदार लोगों से संबंध हो गए। इसके सबूत वे फोटोग्राफ है जिनमें वह नेताओं और अधिकारियों के साथ दिख रही हैं। उनके एनजीओ का लाइसेंस 2017 में खत्म हो गया था इसके बावजूद प्रशासन उन्हें कई सरकारी कार्यक्रमों में आमंत्रित करता रहा। यहां तक कि इस साल 9 फरवरी को आयोजित सामूहिक विवाह कार्यक्रम में भी गिरिजा को बुलाया गया था।

गिरिजा कितनी दबंग हैं इस बात का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि जब 30 जुलाई को जिला प्रशासन की टीम शेल्टर होम खाली कराने पहुंची तो गिरिजा ने उसे भी खदेड़ दिया। इस मामले में एफआईआर भी दर्ज हुई थी लेकिन गिरिजा के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो पाई।

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प्रतापगढ़ के दो आश्रय गृहों से 26 महिलायें गायब मिलीं: उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ के जिलाधिकारी शंभु कुमार ने बुधवार शाम जब दो आश्रय गृहों में अचानक छापा मारा तो पता चला वहां रहने वाली छब्बीस महिलाएं गायब हैं। जिलाधिकारी ने दोनों आश्रय गृहों के जांच का आदेश दिए हैं।

जिलाधिकारी शंभु कुमार ने कल शाम अष्टभुजा नगर के जागृती स्वाधार महिला आश्रय पर छापेमारी की तो इसकी संचालिका और बीजेपी महिला मोर्चा की पूर्व जिलाध्यक्ष रमा मिश्रा ने पंजीकृत महिलाओं की संख्या 16 बताई, जबकि मौके पर एक महिला रजिया मिली। शेष के बारे में बताया गया की बाहर काम करने गईं हैं। उप जिलाधिकारी सदर सत्य प्रकाश सिंह ने अचलपुर स्थित स्वाधार केंद्र पर देर रात निरीक्षण में 15 में से 12 महिलाएं गायब पाईं। संचालिका नेहा परवीन ने बताया कि सरकार से कोई फंड नहीं मिलता, वह स्वयं के खर्च पर संचालन करती हैं, जबकि शाम को जिलाधिकारी ने निरीक्षण किया तो एक भी महिला नहीं थी केवल तीन बच्चियां मौजूद थीं। लेकिन देर रात तक महिलाएं क्यों वापस नहीं लौटी इसका उत्तर प्रशासन को नहीं मिल सका। जिलाधिकारी ने कहा है कि सत्यापन में 26 महिलाएं गायब पाई गई हैं और मामले की जांच कराई जा रही है। महिलायें कहां गईं, क्यों गईं हैं इसकी जांच के बाद दोनों केन्द्रों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। (इनपुट भाषा)

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