असम में जापानी इंसेफेलाइटिस का कहर जारी, मरने वालों की संख्या 101 हुई

पीड़ितों का विभिन्न अस्पतालों में इलाज चल रहा है 13 और नये मामलों के सामने आने के साथ ही जापानी बुखार से संक्रमित मामलों की संख्या 439 हो गई है

असम में जापानी इंसेफेलाइटिस का कहर जारी, मरने वालों की संख्या 101 हुईप्रतीकात्मक तस्वीर फोटो: गाँव कनेक्शन

गुवाहाटी। असम में जापानी इन्सेफ्लाइटिस (जेई) से चार और लोगों की मौत हो गई है। इसके साथ ही राज्य में मरने वालों की संख्या 101 हो गई है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) ने बुलेटिन में यह जानकारी दी है। इसमें बताया गया है कि उदलगुड़ी, बकसा, गोलाघाट और कार्बी आंगलोंग जिलों में एक - एक व्यक्ति के मारे जाने की खबर है।

पीड़ितों का विभिन्न अस्पतालों में इलाज चल रहा है। बुलेटिन में बताया गया है कि 13 और नये मामलों के सामने आने के साथ ही जापानी बुखार से संक्रमित मामलों की संख्या 439 हो गई है। जापानी बुखार मच्छर जनित एक बीमारी है जिससे मस्तिष्क प्रभावित होता है। एनएचएम की बुलेटिन में बताया गया है कि जनवरी से राज्य में जेई/एईएस (एक्यूट इन्सेफ्लाइटिस सिंड्रोम) से होने वाली मौतों का आंकड़ा 222 है जबकि इस समयावधि के दौरान जेई/एईएस पीड़ित मामलों की संख्या 1,569 है।

ये भी पढ़ें: यूपी के प्रत्येक जिले में होगी जापानी इंसेफेलाइटिस के उपचार की व्यवस्था

प्रतीकात्मक तस्वीर फोटो: गाँव कनेक्शन

इन्सेफेलाइटिस को लोग बोलचाल की भाषा में जापानी बुखार भी कहते हैं । इन्सेफेलाइटिस को जापानी बुखार के नाम से भी जाना जाता है, यह एक प्रकार का दिमागी बुखार है जो वायरल संक्रमण के कारण होता है यह संक्रमण ज्यादा गंदगी वाली जगह पर पनपता है साथ हा मच्छर के काटने से भी होता है। हर साल उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में इस बिमारी के कारण नवजात शिशुओं के साथ बच्चों की मृत्यु हो जाती है।

जापानी इन्सेफेलाइटिस में बुखार होने पर बच्चे की सोचने, समझने, और सुनने की क्षमता प्रभावित हो जाती है। तेज बुखार के साथ बार- बार उल्टी होती है। यह बिमारी अगस्त , सितंबर और अक्टूबर माह में ज्यादा फैलता है और 1 से 14 साल की उम्र के बच्चों को अपनी चपेट में लेता है।

ये भी पढ़ें: ग्रामीणों को स्वच्छता का पाठ पढ़ा रहेे युवा आशुतोष


सिर दर्द के साथ बुखार को छोड़कर हल्के संक्रमण में और कोई प्रत्यक्ष लक्षण नहीं होता है। गंभीर प्रकार के संक्रमण में सिरदर्द, तेज बुखार, गर्दन में अकड़न, घबराहट, कोमा में चले जाना, कंपकंपी, कभी-कभी ऐंठन (विशेष रूप से छोटे बच्चों में) और मस्तिष्क निष्क्रिय (बहुत ही कम मामले में), पक्षाघात होता है। जापानी एनसेफेलाइटिस की संचयी कालवधि सामान्यतः 5 से 15 दिन होती है। इसकीमृ त्युदर 0.3 से 60 प्रतिशत तक है।


इसकी कोई विशेष चिकित्सा नहीं है। गहन सहायक चिकित्सा की जाती है। यह रोग अलग अलग देशों में अलग अलग समय पर होता है। क्षेत्र विशेष के हिसाब से ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले, वहां प्रतिनियुक्त सक्रिय ड्यूटी वाले सैनिक और ग्रामीण क्षेत्रों में घूमने वालों को यह बीमारी अधिक होती है। जापानी एनसेफेलाइटिस के लिए भारत में निष्क्रिय मूसक मेधा व्युत्पन्न (इनएक्टीवेटेड माउस ब्रेन-डिराइव्ड जे ई) जापानी एनसेफेलाइटिस टीका उपलब्ध है।

ये भी पढ़ें: मुजफ्फरपुर: जिनके बच्चे उनके सामने घुट-घुटकर मर गये, उनके लिए कैसा फादर डे


More Stories


© 2019 All rights reserved.

Top