महिलाओं को मुसीबतों से लड़ना सिखाती है ‘सेल्वी’ की कहानी

महिलाओं को मुसीबतों से लड़ना सिखाती है ‘सेल्वी’ की कहानी

दक्षिण भारत की पहली महिला ड्राइवर सेल्वी।

कर्नाटक के एक गरीब परिवार से आने वाली सेल्वी को दक्षिण भारत की पहली महिला ड्राइवर के नाम से जाना जाता है। आज वो हर महिला के लिए एक मिसाल हैं। जिन मुसीबतों के कारण बहुत सी महिलाएं आत्महत्या कर लेती हैं सेल्वी ने उन मुसीबतों को हरा कर वर्ष 2004 में ड्राइविंग सिखनी शुरू की, जिसे समाज में अभीतक सिर्फ पुरुषों का पेशा माना जाता है।

''मैंने कभी यह नहीं माना कि महिला होने के नाते मैं कुछ भी करने में सक्षम नहीं हूं। अगर कोई व्यक्ति चावल पकाए तो ऐसा नहीं होगा कि चावल ना पके। इसी तरह अगर कोई महिला ड्राइवर सीट पर बैठे तो ऐसा नहीं हो सकता कि कार ना चले।'' सेल्वी ने कहा, ''यह इस बारे में है कि आप लिंग आधारित कोई भी सीमाओं और बाधाओं को स्वीकार नहीं करते और अपना शोषण होने से इनकार कर देते हैं।''

ये भी पढ़ें - सहें नहीं, घरेलू हिंसा के खिलाफ आवाज उठाएं महिलाएं

सिर्फ 14 साल की उम्र में जब बच्चों को ये भी ठीक से पता नहीं होता है कि शादी का मतलब क्या होता है, सेल्वी की शादी कर दी गई थी।

यूनिसेफ के आंकड़ों के अनुसार विश्व में करीब 70 करोड़ लड़कियों की शादी 18 साल से पहले और करीब 25 करोड़ लड़कियों की शादी 15 वर्ष से पहले कर दी जाती है। इसमें से ऐसी एक तिहाई शादियां भारत में होती हैं।

शादी के बाद सेल्वी शारीरिक और मानसिक शोषण किया गया। सेल्वी के इस शोषण में सिर्फ उसका पति ही नहीं बल्कि उसके माँ और भाई भी बराबर के भागीदार थे। सेल्वी की शुरुआती जीवन की ये कहानी किसी भी और घरेलू हिंसा की शिकार महिला की कहानी की तरह ही लगती है। लेकिन इसके आगे की कहानी किसी और अन्याय की कहानी से बिलकुल अलग है।

ये भी पढ़ें - बिना मर्ज़ी शादी भी घरेलू हिंसा

चौदह साल की उम्र में शादी करने के लिए मजबूर की गई सेल्वी ने 18 साल की उम्र में इस खराब रिश्ते से बाहर निकलने की हिम्मत जुटाई। एक दिन उसने घर से भाग जाने का फैसला किया। वो आत्महत्या करना चाहती थी लेकिन उसने ऐसा नहीं किया और ज़िन्दगी को नए सिरे से जीने का फैसला किया।

राष्ट्रीय अपराध ब्यूरो 2014 के अनुसार, भारत में घरेलू महिलाओं की आत्महत्या, कुल मामलों की 18 फीसदी यानि लगभग 20 हजार से ऊपर सामने आई। वर्ष 2010 से 2014 तक 43 फीसदी आत्महत्या करने वाली शादीशुदा महिलाएं थीं जिनकी उम्र 15 से 29 वर्ष थी। इनका कारण घरेलू हिंसा, अवसाद और वैवाहिक मतभेद होना था।

ये भी पढ़ें - सिर्फ मारपीट ही घरेलू हिंसा नहीं, चार तरह की होती हैं घरेलू हिंसाएं

वर्ष 2004 में ड्राइविंग सीखते हुए वह कनाडाई डॉक्यूमेंट्री फिल्म निर्माता एलिसा पलोस्की से मिलीं, जिन्होंने सेल्वी के जीवन पर वर्ष 2015 में डॉक्यूमेंट्री बनाई। एक घंटे 18 मिनट लंबी फिल्म 'ड्राइविंग विद सेल्वी' में एलिसा ने वर्ष 2004 से 2014 तक सेल्वी के जीवन के बारे में बताया गया है।

ड्राइविंग विथ सेल्वी का ट्रेलर-

सेल्वी ने कहा कि जब वह पीछे मुड़कर देखती हैं तो उन्हें अपनी यात्रा पर भरोसा नहीं होता। पिछले कुछ वर्षों में वह अपने आप को लेकर आत्मविश्वासी हो गई हैं अपनी कहानी को साझा करने से उनकी जिंदगी को एक नया मकसद मिल गया है।

फिल्म के निर्माता ने महिला सशक्तिकरण के लिए भारत में सेल्वी बस टूर का आयोजन किया, जिसके जरिये देशभर में जगह-जगह पर सेल्वी की डॉक्यूमेंट्री लड़कियों और महिलाओं को दिखाई जाएगी। नवंबर के आखिली सप्ताह से दिसंबर के मध्य तक चार राज्यों में 28 स्क्रीनिंग के जरिए सेल्वी ने अपनी फिल्म दिखाई और कम से कम 2000 लड़कियों तथा महिलाओं से बातचीत की।

ये भी पढ़ें - घरेलू हिंसा महिलाओं की आत्महत्या का कारण

सेल्वी अपनी जिंदगी में लैंगिक रुढ़ियों को तोड़ती जा रही हैं। उनकी कहानी एक डॉक्यूमेंटरी का हिस्सा है जिसकी समीक्षकों ने भी प्रशंसा की है। उन्होंने कहा कि महिला होना उनके लिए कभी भी एक बाधा नहीं रही।

इनपुट - भाषा

ये भी पढ़ें - घरेलू हिंसा का शिकार 'महिलाओं' को हमसफ़र का साथ

Share it
Share it
Share it
Top