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मध्य प्रदेश: मिलर्स की जांच में पास होने वाली किस्म की ही धान MSP पर खरीदेगी सरकार, आरोप- व्यापारियों को फायदा पहुंचाने के लिए लाई गई नई नीति

मध्य प्रदेश सरकार ने फैसला लिया है कि वे अच्छी गुणवत्ता वाले धान की ही खरीद करेंगे। इसके लिए धान की किस्मों की जांच होगी। जांच में फेल होने वाली किस्मों की खेती करने से किसानों को रोका जायेगा और इसकी जगह उन्हें दूसरी वेरायटी के बीज दिए जाएंगे, लेकिन क्या ये फैसला मिलर्स को फायदा पहुंचाने के लिए लिया गया है?

Mithilesh DharMithilesh Dhar   11 Dec 2020 5:00 PM GMT

mp, paddy, news, crop, farmersमध्य प्रदेश में 25 नवंबर से धान की खरीदी हो रही है। इन सेट में- सरकार के आदेश की कॉपी। (फोटो- गांव कनेक्शन)

मध्य प्रदेश सरकार ने धान की बोवनी और खरीद नीति में बदलाव किया है। अब राइस मिलर्स की जांच में फेल होने वाली किस्म की धान प्रदेश सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर नहीं खरीदेगी। ऐसी स्थिति में किसानों को दूसरी किस्म की धान लगानी होगी, लेकिन सरकार की इस नीति का विरोध भी शुरू हो गया है। आरोप लग रहे हैं कि मिलर्स (व्यापारियों) को फायदा पहुंचाने के लिए सरकार यह नीति लेकर आई है।

लॉकडाउन के दौरान सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत मध्य प्रदेश के कई जिलों में खराब क्वालिटी के चावल बांटने के मामले सामने आये थे। मामला केंद्र सरकार तक पहुंचा और राज्य सरकार से जवाब मांगा गया। उधर राइस मिलर्स (धान कूटने वाले व्यापारी) चावल टूटने (ब्रोकन राइस) की शिकायत भी लगातार कर रहे थे और मुख्यमंत्री से टेस्ट मिलिंग ( राइस मिल में टेस्ट) कराने की मांग कर रहे थे।

इसे देखते हुए प्रदेश सरकार के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने धान की नई टेस्ट मिलिंग नीति को मंजूरी दी है। इसके तहत अब मिलिंग के लिए जो धान दी जाएगी, पहले उसकी गुणवत्ता जांच होगी। जांच के बाद जो चावल गुणवत्ता के पैमाने पर खरा उतरेगा, उसे ही सार्वजनिक वितरण प्रणाली में वितरित किया जाएगा और केंद्रीय पूल यानी भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) को भेजा जायेगा।

इस बारे में मध्य प्रदेश स्टेट सिविल सप्लाईज कॉरपोरेशन लिमिटेड जो मध्य प्रदेश सरकार की एक प्रमुख आपूर्ति और खाद्यान्न वितरण कंपनी है, के महा प्रबंधक और नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के उप सचिव उमाकांत पांडेय ने गांव कनेक्शन को फोन पर बताया, "अभी हम टेस्ट मिलिंग करा रहे हैं। इसका मतलब यह है कि जो धान हमारे यहां आया पहले मिलों में उसकी जांच होगी। भारत सरकार ने जो मानक तय किये हैं उसे पूरा किया जायेगा। अभी एक कुंतल धान में मिलिंग के बाद 67 किलो धान निकलना चाहिए, लेकिन कई किस्म के धान में इतना चावल नहीं निकल पाता। दूसरी कमियां भी होती हैं।"

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"इसलिए हम जिलेवार ऐसी किस्म के धान की टेस्टिंग कराएंगे। अगर वह वेरायटी जांच में असफल होती है तो किसानों को समझाएंगे कि वे ऐसी किस्म की धान की खेती ना करें। कृषि विभाग जो उचित समझेगा वह करेगा। आगे क्या होगा, हम टेस्ट मिलिंग के बाद तय करेंगे। अभी जो भी धान की खरीद हो रही है, उसकी टेस्ट मिलिंग होगी।" उमाकांत कहते हैं।

"धान की गुणवत्ता की जांच न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद के दौरान, भंडारण और मिलर्स को देने के समय की जाती है। टेस्ट मिलिंग भी कराई जाएगी। इससे यह पुख्ता हो जाएगा कि जो धान मिलिंग के लिए दी गई है, वो गुणवत्तायुक्त है। जब गोदाम में मिलर चावल जमा कराएगा तो गुणवत्ता की जांच के लिए एक पूर्व आधार उपलब्ध रहेगा।" वे आगे कहते हैं।

मध्य प्रदेश सरकार द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि भारत सरकार सभी प्रकार की धान की खरीद एमएसपी पर करती है जिसमें किसी भी किस्म की धान पर रोक नहीं है, लेकिन एमएसपी हमेशा एक 'फेयर एवरेज क्वॉलिटी' के लिए होता है। यानी फसल की निश्चित की गई क्वॉलिटी होगी तो ही उसके लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य दिया जाएगा। केंद्र सरकार यह राज्य और वहां खरीद करने वाली एजेंसियों को सुनिश्चित करने के लिए कहती है।

विज्ञप्ति में भारत सरकार के चावल के लिए यूनिफार्म स्पेसिफिकेशन का हवाला देते हुए कहा गया है कि धान मिलिंग के बाद चावल के टूटे दाने, बाहरी तत्व, क्षतिग्रस्त, बदरंग दाने आदि का मापदंड भारत सरकार तय करती है। ऐसे में प्रदेश में सार्वजनिक वितरण प्रणाली और भारतीय खाद्य निगम को भेजा जाने वाला चावल इन्हीं मापदंडों के अनुसार होना चाहिए।

मध्य प्रदेश चावल उद्योग महासंघ के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को इस बारे में बताया था कि प्रदेश की मंडियों से धान खरीदा जा रहा है, उसमें से से कुछ किस्मों के चावल फेयर एवरेज क्वॉलिटी पर खरे नहीं उतर रहे हैं जिस कारण उन्हें नुकसान उठाना पड़ रहा है।

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विज्ञप्ति में यह भी कहा गया है कि जांच के बाद जिस भी किस्म की धान सही नहीं पाई जायेगी, उस किस्म के बारे में किसानों को बताया जायेगा। ऐसी स्थिति में किसानों को दूसरी किस्म की धान लगानी होगी जिसके लिए उन्हें दूसरे किस्म की बीज भी दी जायेगी। अन्यथा उसके अगले साल से सरकार उनसे धान नहीं खरीदेगी। जिले के राजस्व और कृषि विभाग संयुक्त रूप से अभियान चलाकर किसानों को जागरूक करेंगे। सरकार का मानना है कि इससे पीडीएस के तहत लोगों को अच्छी क्वालिटी का चावल मिलेगा।

मध्य प्रदेश सरकार द्वारा आदेश की कॉपी।

सितंबर 2020 में पीडीएस के तहत बांटे गये खराब गुणवत्ता वाले चावल का मामला जब सामने आया था तब प्रदेश सरकार ने राज्य में स्टॉक में रखे गये चावलों की जांच कराई थी। तब रिपोर्ट में सामने आया था कि प्रदेश पीडीएस के तहत बांटने के लिए जो चावल रखा गया है उसमें से तो 16 फीसदी चावल इंसानों के खाने लायक ही नहीं है। 52 जिलों में रखे 2.747 लाख मीट्रिक टन चावल में से 1.806 लाख मीट्रिक टन चावल ही बांटने योग्य था।

आरोप- किसानों का मुनाफा घटेगा, मिलर्स को फायदा होगा

किसान नेता और किसान कांग्रेस के मध्य प्रदेश कार्यवाहक अध्यक्ष केदार सिरोही का कहना है कि ये नीति सीधे तौर पर मिलर्स और व्यापारियों को फायदा पहुंचाने के लिए लाई गई है। वे गांव कनेक्शन को फोन पर बताते हैं, "मध्य प्रदेश सरकार का यह निर्णय किसानों के हितों के खिलाफ, गैरतार्किक और अव्यवहारिक है। मिलर्स के अनुसार उत्पादन करने का मतलब एक तरह से कांट्रेक्ट फार्मिंग है, किसान अपनी जमीन, संसाधन और उपलब्ध साधनों के अनुसार फसल का उत्पादन करता है और मगर मिलर को फायदा पहुंचाने की यह नीति किसानों के खिलाफ है।शायद यह लिखने और लिखवाने वाले दोनों बड़े दबाव में है। मुझे विश्वास है कि यह आदेश वापस लेना पड़ेगा क्योकि मध्य प्रदेश का किसान जागरूक औऱ संगठित है।"

लंबे समय से कृषि पर रिपोर्टिंग करने वाले मध्य प्रदेश पत्रिका के वरिष्ठ पत्रकार रमाशंकर शर्मा का कहना है कि ये नीति किसानों के लाभ पर बंदिश है। वे कहते हैं, "किसान अपने फायदे के लिए वह धान बोता है जिससे उसका फायदा होता है, लेकिन मिलर्स ने अपने लाभ के लिए नया बखेड़ा कर दिया। सरकार ने उनकी बात मानते हुए नई नीति को मंजूरी तो दे दी लेकिन किसानों के बारे में नहीं सोचा।"

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"जांच में फेल होने के बाद किसान से कह दिया जायेगा कि अब आप दूसरी किस्म की धान लगाइये। हो सकता है कि उससे किसानों की लागत बढ़ जाये, और किसानों को मिलना तो एमएसपी ही है। उससे ज्यादा का भुगतान होगा नहीं। ऐसे में किसानों का मुनाफा घटेगा। अभी नीति में सरकार ने बहुत कुछ स्पष्ट भी नहीं किया है। हो सकता है आगे कुछ बदलाव हों।" रमाशंकर आगे कहते हैं।

मध्य प्रदेश में 25 नवंबर से धान की सरकारी खरीद शुरू है। गेहूं उत्पादन में पंजाब को पीछे छोड़ने के बाद सरकार ने इस साल रिकॉर्डतोड़ 40 लाख टन धान खरीदने का लक्ष्य निर्धारित किया है। प्रदेश में इस साल 145 लाख हेक्टेयर में खरीफ फसलों की बुवाई है। इसमें सोयाबीन के बाद धान का रकबा सबसे ज्यादा है।

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