मुजफ्फरनगर किसान पंचायत: गन्ना मूल्य और बकाया से लेकर कृषि कानून, एमएसपी गारंटी और छुट्टा पशुओं तक होगी बात

5 सितंबर को मुज्फ्फरनगर में किसान महापंचायत कर रहे हैं। किसान नेता इसे देश की सबसे बड़ी किसान पंचायत बता रहे हैं जिसमें देशभर से 5 लाख किसान आएंगे। महीने भर से इनके खाने और रहने की तैयारियां चल रही हैं। 1500 से ज्यादा भंडारे अकेले मुजफ्फरनगर में चलेंगे।

Arvind ShuklaArvind Shukla   3 Sep 2021 1:51 PM GMT

मुजफ्फरनगर किसान पंचायत: गन्ना मूल्य और बकाया से लेकर कृषि कानून, एमएसपी गारंटी और छुट्टा पशुओं तक होगी बात

5 सितंबर को पश्चिमी यूपी के मुजफ्फरनगर में है किसान महापंचायत। फोटो अरेंजमेंट

लखनऊ/मुजफ्फरनगर। कृषि कानूनों के खिलाफ चल रही किसान संगठनों की लड़ाई में 5 सितंबर की किसान महापंचायत अहम साबित हो सकती है। पश्चिमी यूपी के मुजफ्फरनगर में होने जा रही इस महापंचायत में यूपी, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, उत्तराखंड समेत कई राज्यों के किसानों के साथ ही कई खाप चौधरी पहुंच रहे हैं। संयुक्त किसान मोर्चा इस रैली में अपने नए कार्यक्रम की घोषणा भी कर सकता है।

भारतीय किसान यूनियन के गढ़ में हो रही इस महापंचायत के लिए पिछले एक महीने से तैयारियां जारी थीं। किसान नेताओं के मुताबिक महापंचायत में देशभर के कई किसान संगठन और करीब 5 लाख किसान शामिल होंगे।

भारतीय किसान यूनियन के मीडिया प्रभारी धर्मेंद्र मलिक ने शुक्रवार को बताया, "राजकीय इंटर कॉलेज मैदान में 70-80 हजार लोगों के बैठने के लिए वाटरप्रूफ टेंट बनाया गया है। पूरे देश से 5 लाख लोग आ रहे हैं। पूरे शहर में जगह-जगह एलईडी लगाई जा रही हैं। जहां जगह मिलेगी, वो वहीं रुक जाएगा और महापंचायत को देख और सुन सकेगा।"

तैयारियों के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने कहा, "मुजफ्फरनगर के लोगों का दिल बहुत बड़ा है। मेहमानों का दिल खोलकर स्वागत करेंगे। 1000 भंडारे लगाए जा रहे हैं। 500 मोबाइल भंडारे हैं। इसके अलावा 500-700 ऐसे भंडारे हैं, जिनका हमें पता नहीं है।"

मुजफ्फरनगर के अलावा आसपास के जिलों में भी बड़े पैमाने पर भंडारे लगाए जा रहे हैं। ग्रामीणों, किसानों के अलावा कई जगह सामाजिक संगठन और खापों की तरफ से लोगों के खाने-पीने की व्यवस्था की जा रही है।


महांपचायत में भीड़ के जरिए सरकार को दिया जाएगा संकेत

कृषि कानूनों के खिलाफ संयुक्त किसान मोर्चा की अगुवाई में किसान संगठन 9 महीने से दिल्ली की सीमाओं पर बैठे हैं। इसके अतिरिक्त हरियाणा, पंजाब और यूपी समेत कई राज्यों में किसान नेता लगातार रैलियां और पंचायतें कर रहे हैं। इस महापंचायत के जरिए किसान नेता यूपी में अपनी ताकत दिखा रहे हैं।

"हमारी रैली का मकसद है कि सरकार देख ले कि कितने लोग आपके खिलाफ हैं, आपके विरोध में हैं। आप हमारा फैसला कर दीजिए। हमारे पास लोकतंत्र में क्या है या तो धरना देंगे या भीड़ दिखा सकते हैं। हम सरकार को दिखाना चाहते हैं यूपी में चुनाव है हमारा फैसला कर लो नहीं तो नुकसान होगा। अगर सरकार नहीं मानती है तो ये यूपी मिशन का आगाज होगा। अभी हमारा फोकस गन्ना भुगतान, गन्ना मूल्य, तीन कृषि कानून, एमएसपी की कानूनी गारंटी है। इसके साथ छुट्टा पशुओं के लिए क्या किया जा रहा है उस पर बात होगी बिजली के बिल पर बात होगी।" धर्मेंद्र मलिक ने कहा। पत्रकारों के सवाल के जवाब में धर्मेंद्र मलिक ने कहा कि हम विपक्ष के हथियार नहीं है। विपक्ष को जो करना हो करे। ये रैली अराजनैतिक है।।

प्रशासन और पुलिस के अधिकारियों के साथ तैयारियों पर चर्चा करते किसान नेता।

किसान महापंचायत का रुट मैप, कहां होगी पार्किंग

महापंचायत में आने वाली भीड़ को देखते हुए किसान नेताओं ने काफी तैयारियां की है। यूपी, हरियाणा, पंजाब आदि राज्यों से आने वाले किसानों के वाहनों के अलग-अलग पार्किंग की व्यवस्था की गई है ताकि शहर में जाम और किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो।

धर्मेंद्र मलिक ने कहा, "5 सितंबर की महापंचायत के लिए हमने लोगों ने रूट तैयार किया है और नक्शा जारी किया है। मेरठ रोड की पार्किंग नुमाइश मैदान पर होगी। सहारनपुर-रुड़की रोड की पार्किंग माल गोदाम 2 में होगी। बिजनौर-मुरादाबाद रोड से आने वाले वाहनों को गोदाम एक खड़ा किया जाएगा। शामली करनाल-पानीपत रोड है उसका पार्किंग डीएवी और इस्लामिया कॉलेज में होगी। शहर के अंदर 2 किलोमीटर किसी वाहन को आने की इजाजत नहीं होगी। हम अपने गेस्ट को अपनी कार से रिसीव करेंगे।"



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