किसानों की आमदनी नहीं, डीजल और यूरिया के दाम बढ़ रहे हैं- अतुल अंजान

देश में निर्यात घटता जा रहा है और आयात बढ़ा है, जिससे देश का पैसा बाहर जा रहा है और अर्थव्यवस्था बिगड़ रही है।

लखनऊ/मंदसौर। "सरकार 2022 तक किसानों की आमदनी की बढ़ाने की बात कर रही है, लेकिन बढ़ रहे हैं डीजल यूरिया के दाम और खेती की लागत। इस महंगाई में किसानों का रोटी-रोटी चलाना मुश्किल हो गया है।' राष्ट्रीय किसान महासभा के राष्ट्रीय महासचिव अतुल अंजान कहते हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली सरकार पर खोखले वादे करने का आरोप लगाते हुए सीपीआई नेता अतुल अंजान ने कहा कि मुझे अब प्रधानमंत्री के चुनावे वादे याद आ रहे हैं, जब उन्होंने 2014 की 423 रैलियों में कहा था कि अगर वो प्रधानमंत्री बनें तो स्वामीनाथन रिपोर्ट को लागू करेंगे, फसल का दाम डेढ़ गुना कर देंगे, लागत घटाएंगे, लेकिन चार सालबाद भी ये वादे पूरे होते नहीं दिख रहे हैं।"


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अतुल अंजान, प्रो. एमएस स्वामीनाथन की अध्यक्षता में किसानों की भलाई के लिए बने आयोग में शामिल थे। पिछले दिनों में मध्यप्रदेश के मंदसौर में गांव कनेक्शन से विशेष बात करते हुए उन्होंने कहा," इन चार वर्षों में भारत सरकार के लेबर इंस्टीट्यूट और भारत सरकार का श्रम मंत्रालय कहता है की 2015 में एक लाख 14 हज़ार लोगों को काम मिला 2016 में 1 लाख 35 हज़ार को काम मिला 2017 में 1 लाख 75 हज़ार को काम मिला। हालात ये हैं कि अब सरकार ने डाटा जारी करने वाले विभाग को ही खत्म कर दिया है।"

किसानों की हालात पर बात करते हुए अतुल अंजान कहते हैं, "हमारा निर्यात घटता जा रहा है और आयात बढ़ा है, जिससे हमारा पैसा बाहर जा रहा है और अर्थव्यवस्था बिगड़ रही है।" कीटनाशक और उर्वरक उद्योग को लूट का धंधा बताते हुए वो कहते हैं, "मैं इस बात का खुलासा कर रहा हूं कि कीटनाशक क्षेत्र में एक लाख 10 हजार करोड़ की लूट का धंधा हो रहा है। जितनी अच्छी कंपनियां थी, उन्हें सरकार ने जानबूझकर बंद करवा दिया और विदेशी कंपनियों को कमीशन ले-ले कर देश में घुसेड़ दिया गया है।"

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