पंजाब के लिए ये अच्छी ख़बर है...

Anusha MishraAnusha Mishra   9 Dec 2017 2:22 PM GMT

पंजाब के लिए ये अच्छी ख़बर है...प्रतीकात्मक तस्वीर

पंजाब से अक्सर नशे में फंसे युवाओं, बेरोजगारी, किसानों की आत्महत्या जैसी ख़बरें आती रहती हैं लेकिन इन सबसे अलग इस राज्य से जुड़ी एक अच्छी ख़बर भी है। ये देश का अकेला एक ऐसा राज्य है जहां वर्षों से कोई छोटा - मोटा दंगा भी नहीं हुआ।

देश के मौजूदा हालात को देखते हुए एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि मोदी सरकार में दंगों का ग्राफ गिरा है। हाल ही में राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) ने 2016 में हुए आपराधिक मामलों के आंकड़े ज़ारी किए हैं।

इन आंकड़ों पर नज़र डालें तो ये सामने आता है कि साल 2014 और 2015 के मुकाबले 2016 में दंगों या कहें कि उपद्रवों में कमी आई है। पुलिस विभाग के मुताबिक 2014 में जहां दंगे या उपद्रव के देशभर में कुल 66042 मामलों में रिपोर्ट लिखाई गई, वहीं 2015 में कुल 65255 मामले दर्ज किए गए। 2016 में ये आंकड़ा घटकर 61974 हो गया।

चौंकाने वाले बात ये है कि एनसीआरबी के डाटा के मुताबिक, इन तीनों ही वर्षों में पंजाब में किसी भी तरह के छोटे-मोटे दंगे, उपद्रव या आपसी तनानती का एक भी मामला दर्ज नहीं हुआ। सिर्फ 2016, 2015 या 2014 में ही नहीं पंजाब में 2013 में भी पंजाब में इस तरह का एक भी मामला नहीं। साल 2012 की एनसीआरबी की रिपोर्ट के अनुसार पंजाब में सिर्फ 1 मामला हुआ। इससे पहले 2011 और 2010 में भी वहां दंगे या उपद्रव की एक भी रिपोर्ट नहीं लिखी गई। इस रिपोर्ट के मुताबिक, 2009 में पंजाब में इस तरह के 8 व 2008 में एक मामला दर्ज हुआ।

हालांकि 26 जून 2016 को इंडियनन एक्सप्रेस में छपी एक ख़बर के मुताबिक, पंजाब के मुस्लिम बहुल इलाके मलेरकोटला में उस वक्त माहौल गर्मा गया जब वहां क़ुरान के तीन पन्ने फटे पड़े मिले। इस मामले की रिपोर्ट लिखवाई गई और उस वक्त आप के विधायक रहे नरेश यादव पर दंगे की साजिश रचने का आरोप भी लगा।

इस मामले के बारे में जानने के लिए गाँव कनेक्शन ने पंजाब के डीजीपी (लॉ एंड ऑर्डर) एचएस ढिल्लन से बात की तो उन्होंने बताया कि ये मामला किसी दंगे का नहीं था। बस एक समुदाय ने विधायक के घर पर हमला किया था, जिसकी रिपोर्ट लिखी गई थी।

पंजाब एक बहुत ही शांतिप्रिय राज्य है और यहां वर्षों से कोई छोटा - मोटा दंगा भी नहीं हुआ।
एचएस ढिल्लन, डीजीपी लाॅ एंड ऑर्डर, पंजाब

बाकी राज्यों का हाल

एक बात जो तीनों सालों में एक जैसी थी वो ये कि दंगों के सबसे ज़्यादा मामले इन तीन वर्षों में बिहार में ही दर्ज किए गए। 2014 में बिहार में ऐसे मामलों की संख्या 13566, 2015 में ये संख्या 13311 और 2016 में 11617 रही।

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2014 और 2015 में दंगे और उपद्रव के मामले में महाराष्ट्र दूसरे नंबर पर रहा। 2014 में महाराष्ट्र में 7760, 2015 में 8336 और 2016 में यहां 7898 मामले दर्ज किए गए। 2016 में उत्तर प्रदेश ने महाराष्ट्र को इस मामले में पीछे छोड़ दिया और यहां इस तरह की घटनाओं के 8018 मामले दर्ज किए गए, जबकि 2014 में 6438 और 2015 में 6813 मामले दर्ज किए गए थे। यानि 2016 में उत्तर प्रदेश में इस तरह के मामलों में बढ़ोतरी हुई।

इसके बाद नंबर आता है कर्नाटक का, जहां 2014 में दंगे या उपद्रव के 6520, 2015 में 6602 और 2016 में 6263 मामलों में एफआईआर लिखाई गई।

पश्चिम बंगाल के आंकड़ों पर गौर करें तो ये देखने में आता है कि वहां इस तरह के मामलों में काफी तेज़ी से कमी आई है। 2014 में पश्चिम बंगाल में ऐसे मामलों की संख्या 5345 थी वहीं 2015 में 1288 मामले कम दर्ज किए गए यानि ये संख्या 4057 पर पहुंच गई। 2016 में इसमें और सुधार हुआ और पश्चिम बंगाल में इस तरह के सिर्फ 2691 मामले दर्ज किए गए यानि 40 प्रतिशत से ज़्यादा की कमी। इससे ऐसा लगता है कि शायद अब पश्चिम बंगाल में माहौल पहले से बेहतर हो रहा है।

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नोट - एनसीआरबी की रिपोर्ट में यह आंकड़े हिंसक अपराधों की कैटेगरी में आते हैं। हालांकि यहां यह बताना ज़रूरी है कि श्रेणी में आने वाले दंगों में कोई हताहत हुआ हो ये ज़रूरी नहीं है। एनसीआरबी 'दंगा' श्रेणी में तीन उपश्रेणियां शामिल करता है। इसमें दंगा, ग़ैरकानूनी सभाएं, समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने वाले अपराध शामिल होते हैं।

2016 में हुए कुछ सामुदायिक दंगे

गृह मंत्रालय की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2016 के शुरुआती पांच महीनों में सबसे ज़्यादा सामुदायिक दंगे उत्तर प्रदेश (61) में हुए। इसके बाद कर्नाटक (40) में और महाराष्ट्र (40) का नंबर आता है। इसका एक बड़ा कारण यह भी माना गया कि यूपी में 2016 में विधानसभा चुनाव थे जिसके कारण यहां सामुदायिक दंगे बढ़े। गृह राज्य मंत्री किरन रिजिजू ने संसद में अपनी ब्रीफिंग के दौरान कहा था कि यूपी ने जनवरी से लेकर मई 2016 तक अकेले 61 सांप्रदायिक घटनाओं का सामना किया जिसके परिणामस्वरूप 13 लोगों की मौत हुई और 185 घायल हो गए।

2016 में सामुदायिक हिंसा की कुछ घटनाएं

माल्दा (पश्चिम बंगाल) 3 जनवरी 2016

6 जनवरी 2016 को स्क्रॉल और 10 जनवरी 2016 को टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी ख़बरों के मुताबिक, साल 2016 का पहला दंगा 3 जनवरी को पश्चिम बंगाल के माल्दा ज़िले में हुआ। इस दिन अंजुमन अहेले सुन्नतुल जमात ने हिंदू महासभा के नेता कमलेश तिवारी द्वारा की पैगम्बर मुहम्मद पर की गई टिप्पणियों के खिलाफ एक विरोध रैली का आयोजन किया। अचानक, यह विरोध एक क्रूर दंगा में बदल गया। प्रदर्शनकारियों ने दो दर्जन वाहनों में आग लगा दी, कालीचचक पुलिस स्टेशन पर हमला किया और क्षेत्र में कई घरों को आग लगा दी। घटना में दो लोग घायल हुए और क्षेत्र में धारा 144 को लगा दी गई।

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फतेहपुर, उत्तर प्रदेश, 15 जनवरी 2016

हिंदुस्तान टाइम्स में 15 जनवरी 2016 को छपी ख़बर के मुताबिक, कानपुर से 35 किलोमीटर दूर फतेहपुर ज़िले के जहानाबाद कस्बे में लगने वाले खिचड़ी मेले में दंगा भड़क गया। इस दंगे में लगभग 30 लोग घायल हुए और एक महिला की आंखों की रोशनी चली गई। वीएचपी अध्यक्ष प्रवीण तोगड़िया और केंद्रीय मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति के इस मेले में होने वाली एक सभा में आने से सिर्फ एक घंटा पहले ये दंगा भड़का। दंगे की शुरुआत तब हुई जब इस सभा में शामिल होने के लिए कुछ दक्षिणपंथी लोग हाथों में तलवार और भगवा झंडे लेकर आ गए।

जब जुलूस शहर के बीच से गुज़र रहा था उस वक्त आगे निकलने के लिए एक युवा बिजली का एक तार तोड़ दिया, जिससे कई लाउडस्पीकर बज रहे थे। जब मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों ने इस बात पर आपत्ति जताई तो समूह ने नारे लगाने शुरू कर दिए। जिसके बाद दोनों समुदायों में हिंसा भड़क गई। आगजनी हुई और एक दूसरे पर पत्थरबाज़ी भी। दंगे में दो डिप्टी एसपी भी घायल हो गए। हालांकि पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित कर लिया और इलाके को सील कर दिया।

हंगल (कर्नाटक) 29 फरवरी 2016

2 मार्च 2016 को इंडिया टुडे में छपी एक ख़बर के मुताबिक, कर्नाटक के हंगल में शिवाजी जयंती के जुलूस के दौरान क्रिकेट मैदान में दो समुदायों के बीच हिंसा भड़क गई। दो लोग मारे गए। शाम तक इस घटना ने सामुदायिक दंगे का रूप ले लिया था।

स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए प्रशासन ने तुरंत एक भारी पुलिस बल तैनात किया। 50 से अधिक लोगों के खिलाफ पुलिस ने मामला दर्ज किया। इस पूरी घटना में, दो दर्जन लोग घायल हुए थे।

इल्लम बाज़ार (पश्चिम बंगाल), 1 मार्च 2016

3 मार्च 2016 को इंडियन एक्सप्रेस में छपी ख़बर के मुताबिक, पैगंबर मुहम्मद के खिलाफ एक अपमानजनक फेसबुक पोस्ट के कारण महीने के पहले दिन इस इलाके में तनाव बढ़ गया। इसके बाद हुए दंगे में एक पुलिस स्टेशन क्षतिग्रस्त हो गया और पुलिस ने एक हमले में एक मस्जिद को निशाना बनाया। पुलिस और मुस्लिम समुदाय के बीच हुए इस दंगे में एक व्यक्ति मारा गया और तीन बुरी तरह घायल हुए।

बरेली, गोंडा, रायबरेली, सीतापुर, मऊ, पीलीभीत, गोरखपुर, चित्रकूट और प्रतापगढ़ (उत्तर प्रदेश) 12 अक्टूबर 2016

13 अक्टूबर 2016 को हिंदुस्तान टाइम्स में छपी ख़बर के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के बरेली, गोंडा, रायबरेली, सीतापुर, मऊ, पीलीभीत, गोरखपुर, चित्रकूट और प्रतापगढ़ ज़िलों में दंगे हुए। इन दंगों के भड़कने की वजह थी दुर्गा पूजा और मोहर्रम के जुलूस का एक ही दिन निकलना। इन दंगों में कई व्यक्ति घायल हुए और दर्जनों वाहनों को आग लगा दी गई।

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