ओखी से चौपट हुई हजारों एकड़ फसल, महाराष्ट्र और तमिलनाडु समेत कई राज्यों में असर

ओखी से चौपट हुई हजारों एकड़ फसल, महाराष्ट्र और तमिलनाडु समेत कई राज्यों में असरचक्रवात का एक दृश्य।

ओखी चक्रवात का असर दक्षिण के राज्यों सहित देश के अन्य राज्यों पर देखने को मिल रहा है। तमिलनाडु, गुजरात, मध्य प्रदेश और राजस्थान की फसलों पर इसका व्यापाक असर हुआ है आज सुबह कई राज्यों में हल्की-फुल्की बरसात तो कई राज्यों में तेज़ बूंदा-बांदी हुई। मध्यप्रदेश के कई जिलों सहित इंदौर, भोपाल सहित कई और जिलों गरज़-बरस के साथ हल्के छींटे पड़े तो वहीं राजस्थान में कई जगह तेज बारिश हुई।

इस चक्रवात का सबसे ज्यादा असर महाराष्ट्र और तमिलनाडु पर पड़ा है। नासिक के निकलने वाली प्याज की खेप देश के अन्य हिस्सों के लिए नहीं निकल पा रही है। ऐसे में ये भी आशंका है कि प्याज के दाम एक बार फिर बढ़ेंगे। ऐसी आशंका व्यक्त की जा रही है कि कपास की खेती भी प्रभावित हुई है।

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तमिलनाडु में ओखी चक्रवात से रबर और केले की खेती की फसल बुरी तरह प्रभावित हुई है। केला और रबर की 3600 हेक्टेयर की खेती चक्रवात से प्रभावित हुई है। तमिलनाडु सरकार के कृषि सचिव गगनदीप सिंह ने बताया कि "कन्याकुमारी जिले से प्रशासन की ओर 75 और कृषि विभाग से 53 लोगों की टीम नुकसान का आंकलन कर रही है। हम दो से तीन बाद ही कुल नुकसान का सही अनुमान लगा पाएंगे।"

बेदी आगे कहते हैं " 400 एकड़ से ज्यादा में फैसले आरसू रबर की खेती पूरी तरह से बर्बार हो गई है। इसके अलावा नारीयल और गेहूं की फसलें भी चक्रवात के कारण नष्ट हो गई हैं। 3600 एकड़ में फैले रबर और केले की फसल पूरी जरह बर्बाद हो गई है। हमारे पास अभी इसी फसल का सही डाटा है।"

फिर महंगा होगा प्याज

चक्रवात की चपेट में महाराष्ट्र भी है। ऐसे में देश की सबसे बड़ी प्याज मंडी लासलगांव में प्याज के दाम फिर बढ़ने लगे हैं। पिछले दो सप्ताह में प्याज की कीमतें घट रही थीं। लेकिन मंगलवार को मंडी में प्याज का दाम बढ़ गया। नासिक के प्याज व्यापारी सोहनलाला भंडारी ने गाँव कनेक्शन को बताया " भारी बारिश के कारण मंगलवार को मंडी में सन्नाटा रहा। जो किसान आए भी तो उन्होंने 35 रुपए प्रति किलो से ज्यादा के हिसाब बेचा। ऐसे में प्याज की कीमतें एक दो दिन के लिए फिर बढ़ेंगी।

ओखी का फसलों पर असर

ओखी के असर से राजस्थान और मध्य प्रदेश भी अछूता नहीं रहा। मध्य प्रदेश भोपाल से कृषि वैज्ञानिक साधुराम शर्मा ने गाँव कनेक्शन को बताया "अगर थोड़ी बारिश हो जाए तो किसानों को फायदा होगा। रबी की फसलों को फायदा होगा। लेकिन अगर ऐसा मौसम ज्यादा दिनों तक रहता है दलहनों में कीट बीमारियों को असर बढ़ सकता है।

ऐसे में किसानों को तैयार रहना होगा। ज्यादा बादल होने से इल्ली का प्रकोप बढ़ जाता है। आलू, शिमला मिर्च, हरी मिर्च, बैंगन, फूल गोभी, टमाटर आदि फसलों पर इस मौसम का विपरीत असर पड़ेगा। अगर ज्यादा दिन तक बादल रहा तो अमरूद, पपीता, केला नीबू आदि पौधे पीले पड़ने लेंगेगे तो वहीं सूरज नहीं निकलने पर फसल को झुलसा रोग होने की भी आशंका है। गेहूं, सरसों, मटर और गोभी के पौधों को मजबूती मिलेगी और मशरूम का उत्पादन बेहतर होगा।"

महाराष्ट्र में कपास की खेती प्रभावित हुयी है। यहां के किसान कपास में लगे इल्ली से पहले से ही थे परेशान थे। ऐसे में जब धूप नहीं होगी तो कीड़ों का प्रकोप आैर ज्यादा बढ़ जाएगा। इस बारे में भीड जिले की किसान पूजा मोरे कहती हैं “ कपास के किसान तो पहले से ही परेशान थे। ऐसे में इल्ली का प्रकोप बढ़ गया है। चक्रवात के कारण धूप नहीं हो रही है। कपास के किसानों को भारी नुकसान हो रहा है।”

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महाराष्ट्र से सटे अन्य राज्यों के जिले भी इस चक्रवात से प्रभावित हुए हैं। मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा, बालाघाअ और सिवनी में सोमवार और मंगलवार को बारिश हुई। तापमान में गिरावाट भी दर्ज की गई। छिंदवाड़ा के किसा गणेश ढोके कहते हैं "धूप नहीं हो रही है। बादल ज्यादा होने से रबी फसलों पर इल्ली का प्रकोप देखा जा रहा है। मंडियों में रखी हमारी फसलें भीग गई हैं।"

वहीं राजस्थान के कोटा में भी अच्छी खासी बारिश हुई। किसान विषेक विश्नोई फोन पर बताते हैं "भामाशाह मंडी में खुले नीलामी स्थलों पर रखी विभिन्न कृषि जिंस भरी 1000 बोरी भीग गईं। कई ढेर भी भीग गए। ऐसे में किसानों को कम दाम में उपज बेचनी पड़ी। मंडी के कवर्ड नीलामी स्थलों पर अधिकांश जगह पर व्यापारियों की बोरियां रखी हुई हैं। कई व्यापारियों ने नीलामी स्थलों पर रखी बोरियों का उठाव नहीं किया। ऐसे में किसानों को खुले आसमान के नीचे उपज के ढेर करने पड़े। बरसात आने से उनकी उपज भीग गई। जबकि कहीं बाजरे की फसल को भी नुकसान हुआ है।"

ओखी को जानिए

ओखी' तूफान का नाम बांग्लादेश का दिया हुआ है, जिसका बंगाली में मतलब 'आंख' होता है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) और यूनाइटेड नेशंस इकोनॉमिक एंड सोशल कमिशन फॉर एशिया एंड द पैसिफिक (ESCAP) ने उष्णकटिबंधीय चक्रवातों का नाम रखना साल 2000 में शुरू किया था। दुनियाभर के चक्रवातों का नाम9 क्षेत्रों- उत्तरी अटलांटिक, पूर्वी-उत्तर प्रशांत, मध्य-उत्तर प्रशांत, पश्चिमी-उत्तरी प्रशांत, उत्तरी हिंद महासागर, दक्षिण-पश्चिमी हिंद महासागर, ऑस्ट्रेलियाई, दक्षिणी प्रशांत, दक्षिण अटलांटिक द्वारा दिया जाता है।

सभी देश एक-एक कर रखते हैं नाम उत्तरी हिंद महासागर के आठ देशों, भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका, थाईलैंड, म्यांमार, मालदीव और ओमन ने मिलकर 8 नाम दिए हैं जो चक्रवातों की 64 नामों की सूची में शामिल है। मई में पूर्वोत्तर भारत में आए तूफान मोरा का नाम थाईलैंड ने रखा था। 'मोरा' नाम का मतलब समुद्र का स्टार है और कीमती पत्थरों में से एक का नाम 'मोरा' भी है। अगले चक्रवाती तूफान का नाम भारत रखेगा जोकि अभी से तय कर लिया या है। अगले तूफान का नाम 'सागर' होगा।

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