हजारों बच्चों की जान लेने वाल इंसेफ्लाइटिस आख़िरकार बना राष्ट्रीय मुद‌्दा  

हजारों बच्चों की जान लेने वाल  इंसेफ्लाइटिस आख़िरकार बना राष्ट्रीय मुद‌्दा  बीआरडी मेडिकल कॉलेज में इंसेफ्लाइटिस से बच्चे की मौत के बाद फर्श पर तौलिये से ढका शव। फोटो: दीपांशु मिश्रा

दीपांशु मिश्रा

गोरखपुर। पिछले चार दशकों में पूर्वांचल में दस हजार बच्चों की ज़िंदगियों को लीलने के बाद इंसेफ्लाइटिस को खत्म करने के लिए के गोरखपुर में 85 करोड़ की लागत से क्षेत्रीय शोध संस्थान बनेगा, जो बीमारियों के कारणों पर शोध करेगा।

गोरखपुर के बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज में 37 बच्चों की मौत के बाद रविवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने अस्पताल का दौरा किया। पत्रकारों से बात करते हुए योगी ने कहा, “दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा और बच्चों की मौतों पर कार्रवाई एक मानक बनेगी।“

ये भी पढ़ें- गोरखपुर में बने मस्तिष्क ज्वर अनुसंधान केंद्र: योगी

इस बीच, कारणों का पता लगाने के लिए दिल्ली से वरिष्ठ डॉक्टरों की टीम पहले ही गोरखपुर में कैंप किए हुए। मुख्यमंत्री ने कहा, “यहां की घटना से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बेहद दुखी हैं और केंद्र सरकार हमारी हर संभव मदद कर रही है। प्रदेश के सभी जिला अस्पतालों को उपचार के लिए निर्देश भी दिए हैं। ऐसे में केवल गोरखपुर ही नहीं, पूरे प्रदेश में कहीं भी इलाज में लापरवाही होती है तो सरकार दोषियों को बख्शेगी नहीं।” इंसेफ्लाइटिस से पूरे देश में 60 जिले प्रभावित हैं। पूर्वांचल में गोरखपुर और बस्ती डिवीजन सबसे ज्यादा प्रभावित है।

देशभर में इंसेफ्लाइटिस से होने वाली बच्चों की मौतों का 70 प्रतिशत अकेले पूर्वांचल में होती हैं। मुख्यमंत्री ने पूरे बीआरडी कॉलेज का दौरा करके हालात की समीक्षा की। उनके साथ गोरखपुर गए केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने कहा, “गोरखपुर में रिसर्च सेंटर बनाने का अप्रूवल मैं देकर आया हूं। इसके बनने से इस बीमारी से लड़ने में आसानी होगी।”

क्षेत्रीय शोध संस्थान के फैसले का स्वागत करते हुए इंसेफ्लाइटिस उन्मूलन अभियान के चीफ कैंपेनर डॉ. आरएन सिंह कहते हैं, “यह पूर्वांचल के लिए बड़ी उपलब्धि है, लेकिन सिर्फ इससे काम नहीं चलेगा, इसके लिए जनजागरुकता का एक अभियान चलाना पड़ेगा।”पूर्वांचल में बच्चों की मौतें जापानी इन्सेफ्लाइटिस और एक्यूट इन्सेफ्लाइटिस सिंड्रोन (जल जनित बीमारी) से होती हैं।

ये भी पढ़ें- गोरखपुर में बाल रोगों में गहन शोध के लिए रीजनल मेडिकल रिसर्च सेंटर बनेगा : नड्डा

डॉ. आरएन सिंह ने बताया, “टीका वर्ष 2006, 2010 और 2017 में जरूर लगा, लेकिन यह लगातार दो साल लगता तो सही रहता। इसका फायदा ही नहीं मिला। चीन से आने वाला टीका एक-एक साल के अंतराल पर लग जाना चाहिए था, भारत का टीका 14-14 दिन पर लगना चाहिए,”।

मुख्यमंत्री हुए भावुक

अस्पताल का दौरा करने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए योगी आदित्यनाथ भावुक हो गए। रूंधे गले से उन्होंने कहा, “मैं 1996 से सड़क से संसद तक इंसेफ्लाइटिस के खिलाफ लड़ाई लड़ रहा हूं, और इसकी पीड़ा को समझता हूं। गोरखपुर से जुड़े लोग जानते हैं कि हम इंसेफ्लाइटिस के खिलाफ लड़ाई शुरू से लड़ते रहे हैं। हम 38 जिलों में 90 लाख बच्चों को वैक्सीन देकर इंसेफ्लाइटिस के खिलाफ लड़ने की ओर बढ़े।”उन्होंने आगे कहा, “मैं चौथी बार बीआरडी अस्पताल पहुंचा हूं। इंसेफ्लाइटिस के ख़िलाफ़ अभियान तेज़ होगा। गोरखपुर में ही नहीं, पूरे यूपी में इंसेफ्लाइटिस से हुई मौतों की ज़वाबदेही तय होगी।”

प्रेस कांफ्रेंस में संबोधित करते सीएम योगी, साथ में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा।

डॉ. कफील हटाए गए

बीआरडी मेडिकल कॉलेज के इन्सेफेलाइटिस वार्ड के इंचार्ज डॉक्टर कफील पर योगी सरकार ने कड़ी कार्रवाई की है। डॉक्टर कफील खान को उनके पद से हटा दिया गया है। डॉक्टर कफील बीआरडी मेडिकल कॉलेज के बालरोग विभाग के अध्यक्ष थे। वह नीओनेटल इंटेंसिव केयर यूनिट (एनआईसीयू) के प्रमुख थे। उनकी जगह पर डॉक्टर महेश शर्मा को एनआईसीयू का नया प्रमुख बनाया गया है। डॉक्टर खान पर यह कार्रवाई सीएम योगी के बीआरडी अस्पताल के दौरे के बाद की गई है।

ये भी पढ़ें- गोरखपुर त्रासदी : जब मैंने अपनी तड़पती बेटी को देखने के लिए कहा तो नर्स बोली- इसका पर्चा लाओ निकालो बाहर

निरीक्षण के बाद मुख्यमंत्री ने दी सलाह

सीएम योगी ने कहा, “इस मामले में फेक रिपोर्टिंग नही, वास्तविक रिपोर्टिंग हो। सभी पत्रकार एक बार वार्ड में जाकर जरूर देखिए, वहां की वास्तविक स्थिति जानिए। आप लोगों को वार्ड में जाकर रिपोर्टिंग करनी चाहिए, बाहर से नहीं।“उन्होंने कहा कि मैं यह कहना चाहता हूँ कि मीडिया को सही तथ्यों को पता लगाकर ही रिपोर्टिंग करनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने मेडिकल कालेज में निरीक्षण के बाद कहा कि पत्रकारों को छूट है कि वह वार्डों में जाकर वस्तु स्थिति देखें। खुद पड़ताल करें।“

ताजा अपडेट के लिए हमारे फेसबुक पेज को लाइक करने के लिए यहां, ट्विटर हैंडल को फॉलो करने के लिए यहां क्लिक करें।

Share it
Top