कई साल से पढ़ाई कर रहे छात्रों को एक छोटी सी परीक्षा में फेल होने का डर क्यों?

कई साल से पढ़ाई कर रहे छात्रों को एक छोटी सी परीक्षा में फेल होने का डर क्यों?परीक्षार्थियों में फेल होने का डर।

सरकार ने बीते कुछ महीनों में कुछ विभागों की भर्ती से पहले एक और परीक्षा को अनिवार्य कर दिया है। शिक्षा विभाग, मेडिकल, लॉ सभी के एकेडमिक कोर्स के बाद अब एक और परीक्षा उत्तीर्ण करना जरूरी हो गया है। भले ही सरकार की मंशा इसके पीछे पारर्शिता लाना हो लेकिन छात्रों को ये बात पसंद नहीं आ रही।

अगर शिक्षा विभाग की बात करें तो अभी तक अध्यापक बनने के लिए बीएड, बीटीसी, डीएलएड जैसे कोर्स के बाद सिर्फ टीईटी की परीक्षा उत्तीर्ण करके भर्ती होती थी लेकिन अब ऐसा नहीं है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में ये फैसला लिया गया था कि टीईटी पास अभ्यर्थियों की अब सीधे भर्ती नहीं होगी, बल्कि उन्हें एक और लिखित परीक्षा भी देनी होगी, जिसके नम्बर मेरिट बनाते समय जोड़े जाएंगे।

इस आदेश पर जमकर बवाल हुआ था, विरोध के बाद भी इस नियम को लागू कर दिया गया। मेरठ जिले से बीटीसी कर चुके अंकुर यादव (25वर्ष) इस बारे में बताते हैं, “ये गलत तरीका है हम कितनी परीक्षा दें, दो साल में चार समेस्टर फिर टीईटी उसके बाद अब एक और परीक्षा ये नौकरी न देने के हथकंडे हैं।

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हालांकि सरकार ने इस फैसले के बाद ये स्पष्ट किया था कि सरकार स्कूलों में बच्चों को गुणवत्तापरक शिक्षा देने के लिए ऐसा कर रही है। उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी यूपी टीईटी 2017 में 88.89 फीसदी अभ्यर्थी फेल हो गए हैं। महज 11.11 फीसदी अभ्यर्थी ही इस परीक्षा को उत्तीर्ण कर सके हैं। बीते वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष रिजल्ट में और गिरावट (दशमलव के अंकों में) हुई है। 2016 में 11.14 फीसदी अभ्यर्थी सफल हो सके थे। अब इन उत्तीर्ण छात्रों को एक और परीक्षा पास करना होगा। वहीं बिहार TET के रिजल्ट में 83 फीसदी परीक्षार्थी फेल हो गए थे।

दूसरी परीक्षा की तैयारी कर रही प्रियंका रावत बताती हैं, “जिसने अपनी मेहनत से टीईटी पास किया होगा उसके लिए ये परीक्षा पास करना कठिन नहीं हेागा क्योंकि इसमें सवाल हाईस्कूल स्तर के होगें। थोड़ी मेहनत व फोकस की जरूरत है।”

टाॅपर को भी प्रतियोगी परीक्षाओं में फेल होने का डर।

हाल ही में देश भर के निजी डाक्टरों ने हड़ताल की थी जिसमें उनकी एक मांग ये भी थी नए मेडिकल कानून में डॉक्टर को एमबीबीएस की पढ़ाई के बाद एक और परीक्षा पास करने के बाद ही वो प्राइवेट प्रैक्टिस कर पाएंगें। इस पर डॉक्टरों ने जमकर विरोध किया था क्योंकि उन्हें फेल होने का डर है।

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दिल्ली से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे राकेश शुक्ला बताते हैं, ये नए नियम गलत है। हमारे अंदर काबिलियत है हम हर समेस्टर में टॉप करते हैं। एमबीबीएस के बाद एक और परीक्षा का क्या मतलब है।

लेकिन पांच साल एमबीबीएस की पढ़ाई करने के बाद आखिर डॉक्टरों को एक परीक्षा का डर क्यों है। इस बारे में लखनऊ की वरिष्ठ एमबीबीएस डॉक्टर पुष्पा जायसवाल बताती हैं, “ये डर सबको नहीं है उन्हीं मेडिकल छात्रों को है जिनका एडमिशन गलत तरीके से हुआ है। जो अपनी मेहनत से, टेस्ट क्लियर करके आए हैं, उन्हें ऐसी एक दो छोटी परीक्षाओं से कोई डर नहीं है।”

इसी तरह लॉ, कंपनी सेक्रेटरी सीए की परीक्षाओं में भी बदलाव किए गए हैं जिससे छात्रों को फेल होने का डर सताने लगा है। अब सोचने की बात ये है कि तीन, चार साल लगातार सारी परीक्षाएं पास करने वाले इन छात्रों को आखिर एक लिखित परीक्षा में फेल होने का डर क्यों है।

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Tags:    education system 
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