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लॉकडाउन में आदिवासी बच्चों को पढ़ाने के लिए मोहल्ले-मोहल्ले चल रही पाठशाला

आदिवासी बाहुल्य धार जिले के एक शिक्षक सुभाष यादव इन दिनों गर्मी की छुट्टी नहीं मना रहे हैं। ये लॉकडाउन में अपने गांव कागदीपुरा में ग्रामीण बच्चों को पढ़ाने के लिए नई-नई कोशिश में जुटे हुए हैं। सुभाष के दिशा निर्देशन में कई और युवा आगे आये हैं जो बच्चों को रोजाना एक घंटे निशुल्क पढ़ा रहे हैं।

Prem VijayPrem Vijay   17 May 2020 7:13 AM GMT

लॉकडाउन में आदिवासी बच्चों को पढ़ाने के लिए मोहल्ले-मोहल्ले चल रही पाठशाला

भोपाल। लॉकडाउन में ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो इसलिए धार जिले के एक शिक्षक के दिशा निर्देशन में कई युवा मोहल्ले-मोहल्ले सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए बच्चों को पढ़ाने में जुटे हैं।

मध्य प्रदेश के पश्चिमी क्षेत्र के आदिवासी बाहुल्य धार जिले के नालछा विकासखंड के कागदीपुरा के राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त शिक्षक सुभाष यादव इन दिनों गर्मी की छुट्टी नहीं मना रहे हैं। ये लॉकडाउन में अपने गांव कागदीपुरा में ग्रामीण बच्चों को पढ़ाने के लिए नई-नई कोशिश में जुटे हुए हैं। सुभाष के दिशा निर्देशन में कई और युवा आगे आये हैं जो बच्चों को रोजाना एक घंटे निशुल्क पढ़ा रहे हैं।

सुभाष यादव ने बताया, "हम ऐसे युवाओं की खोज में लगे हैं जो रोज एक घंटे का समय निकालकर अपने आसपास के बच्चों को पढ़ा सकें। आदिवासी क्षेत्रों में मोबाइल से पढ़ाई कराना संभव नहीं है। इनके पास न हाई स्पीड इन्टरनेट डेटा अहि और न ही सबके पास स्मार्ट फोन। कुछ युवा अब जगह-जगह कुछ-कुछ बच्चों को पढ़ा रहे हैं।"

बच्चों को पढ़ाते सुभाष यादव.

मध्य प्रदेश सरकार चाहती है कि बच्चों का जो नुकसान हुआ है, वह किसी तरह से डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से पूरा हो सके। लेकिन इस डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पढ़ाई करना आसान नहीं है। आदिवासी अंचल में जिन लोगों के पास में खाने-पीने के मूलभूत साधनों की कमी है वहां पर स्मार्टफोन से लेकर इंटरनेट की फास्ट स्पीड को लेकर कई प्रश्न खड़े होते है।

पढ़ाई कार्य में युवाओं को मदद करने वाले रंजीत पटेल का कहना है, "शासकीय शिक्षक का जुनून देखकर हमें भी लगता है कि हमें भी अपने गांव के बच्चों के लिए कुछ करना चाहिए। सर ने जो मार्गदर्शन दिया है उसके अनुसार हम पढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। इसमें सोशल डिस्टेंस का पालन करते हुए बच्चों को पढ़ाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। घर पर ही 8 से 10 बच्चे एकत्रित हो जाते हैं रोजाना इनको एक घंटे का समय देकर पढ़ा रहे हैं।"

कोरोना वायरस के संक्रमण के चलते आने वाले समय में कब स्कूल खुलेंगे कुछ कहा नहीं जा सकता। सुभाष यादव के दिशा निर्देशन में कुछ युवा इन दिनों एक घंटे का समय निकालकर कागदीपुरा गाँव के बच्चों को पढ़ा रहे हैं। सुभाष यादव ने शिक्षा के क्षेत्र में कई व्यापक स्तर पर प्रयोग किए हैं। उसी का नतीजा है कि आज वे मध्यप्रदेश में ख्यात शिक्षक हैं। ये अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के माध्यम से हो रही गतिविधियों में भी सहयोग कर रहे हैं।

गाँव के एक युवा गजानंद परमार बताते हैं, "हमारे गांव के बच्चे शिक्षा की मुख्यधारा से जुड़े रहें तो अपने आप में महत्वपूर्ण होगा। आने वाले समय में स्कूल खोलने में क्या परेशानी आएगी और किस तरह से कोरोना वायरस संक्रमण के चलते दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा, यह कहा नहीं जा सकता। इसलिए जरूरी है कि इस तरह के प्रयोग से हम हमेशा के लिए बच्चों की हित की बात कर सकें।"

शासन के निर्देशानुसार मोबाइल पर सामग्री दी जा रही है। लेकिन व्यावहारिक रूप में यह एक भरा कदम है। वजह यह है कि बच्चों के माता-पिता के पास में बहुत ही उच्च गुणवत्ता के एंड्रॉयड फोन नहीं हैं। जिससे की डिजिटल प्लेटफॉर्म या मोबाइल के माध्यम से पढ़ाई करवाई जा सके। इसके अलावा कई गांव ऐसे हैं, जहां पर इंटरनेट कनेक्शन की समस्याएं हैं। साथ ही जो लोग मोबाइल का उपयोग कर रहे हैं, जरूरी नहीं है कि मोबाइल चलाने के लिए मोबाइल डाटा का अच्छा वाला पैकेज उपयोग करने में सक्षम हों।

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