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एक छोटा सा देश जो खिलाता है पूरी दुनिया को खाना, जानिए यहां की कृषि तकनीक के बारे में

लखनऊ। नीदरलैंड एक छोटा, घनी आबादी वाला देश है, जिसमें 1,300 से अधिक निवासी प्रति वर्ग किलोमीटर की दूरी पर रहते हैं। फिर भी मूल्य के आधार पर अगर देखा जाए तो यह निर्यातक देशों में दुनिया में नंबर 2 पर आता है। पहले नंबर पर संयुक्त राज्य अमेरिका आता है जिसके पास नीदरलैंड से 270 गुना ज़्यादा ज़मीन है। यह सोचने वाली बात है कि आखिर नीदरलैंड के लोगों ने यह कैसे किया?

नीदरलैंड किसी अन्य प्रमुख खाद्य उत्पादन वाले देश की तरह नहीं है - यहां छोटे - छोटे टुकड़ों में खेती होती है, ज़्यादातर कृषि व्यवसाय मानकों से छोटे होते हैं, शहर में कई छोटे छोटे उप नगर हैं। देश की आधे से ज़्यादा ज़मीन का इस्तेमाल कृषि और बागवानी के लिए किया जाता है। इस देश का उद्देश्य कम भूमि और संसाधनों के साथ अधिक भोजन का उत्पादन करना है और यह देश ऐसा इसलिए करना चाहता है क्योंकि दुनिया की आबादी 2050 तक 10 अरब तक पहुंच जाएगी, जो अभी 7.5 अरब है।

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इस छोटे से देश में कुछ ऐसा ख़ास है जो इसे निर्यात के मामले में दुनिया में दूसरे पायदान पर खड़ा करता है। इसे देखकर ऐसा लगता है जैसे किसी नदी के किनारे पर विशाल दर्पण लगे हुए हों और उन पर सूरज की रोशनी पड़ती हो जिससे वे तेज़ी से चमकने लगते हों। ये नीदरलैंड के अद्भुत ग्रीनहाउस परिसर हैं, जिन्होंने लगभग 175 एकड़ क्षेत्र को कवर कर रखा है। इन उच्च तकनीक उत्पादन उपायों को लगभग बीस साल पहले शुरू किया गया था, जब नीदरलैंड ने कई संसाधनों का उपयोग करके दो बार से ज्यादा भोजन उत्पादन के लक्ष्य से टिकाऊ कृषि के बारे में सोचा था।

यही नहीं नीदरलैंड पशु पालन के मामले में दुनिया के अग्रणी देशों में से एक है। दुनिया शीर्ष 40 खाद्य और पेय कंपनियां नीदरलैंड में हैं जिनमें से 12 के रिसोर्स और डेवलपमेंट केंद्र यहां हैं। कृषि-खाद्य उत्पादों के प्रसंस्करण के लिए मशीनरी जैसे, मांस को अलग करने वाली स्वचालित मशीन, स्वचालित ट्रैक्टर, ड्रोन, मिट्टी की उवर्रता, रसायन, नमी आदि का पता लगाने वाले क्वैडकॉप्टर, आलू प्रसंस्करण के लिए मशीन आदि का इस्तेमाल करने के मामले में यह देश आगे है, जो इसे निर्यात के मामले में दुनिया के अग्रणी देशों में एक बनाता है।

इस देश के किसानों का इसमें सबसे बड़ा योगदान रहा। यहां के लगभग आधे से ज़्यादा किसानों ने खेती के लिए पानी के इस्तेमाल में 90 प्रतिशत तक की कमी कर दी। उन्होंने ग्रीन हाउस में उगाए जाने वाले पौधों में रासायनिक कीटनाशकों का इस्तेमाल भी लगभग खत्म कर दिया। पशु पालन करने वाले किसानों ने भी इस दिशा में कदम आगे बढ़ाया और 2009 से डेयरी किसानों ने एंटीबायोटिक्स के इस्तेमाल में 60 प्रतिशत तक की कमी कर दी।

खेती के इस बदलाव में एक कृषि विश्वविद्यालय वेगानिगेंट यूनिवर्सिटी एवं रिसर्च सेंटर (डब्ल्यूयूआर)ने अग्रणी भूमिका निभाई। वैज्ञानिक और अनुसंधान उत्कृष्टता पर 300 से अधिक विश्वविद्यालयों की राष्ट्रीय ताइवान रैंकिंग के अनुसार, नीदरलैंड का वेगानिगेंट विश्वविद्यालय लगातार तीसरे वर्ष दुनिया में नंबर 1 कृषि विश्वविद्यालय चुना गया है।

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यह विश्वविद्यायल नीदरलैंड की फूड वैली (जिसे यहां की सिलिकॉन वैली कहा जाता है) के केंद्र में हैं, यहां कई खाद्य तकनीक के स्टार्टअप्स हैं। डब्ल्यूयूआर प्लांट साइंसेज ग्रुप के प्रबंध निदेशक अर्नस्ट वैन डेन एन्डे ने नेशनल ज्योग्राफिक को बताया कि मैं केवल एक कॉलेज डीन नहीं हूं। मैं संयंत्र विज्ञान पर काम करता हूं, इसके अलावा वाणिज्यिक अनुबंध अनुसंधान में शामिल नौ अलग व्यापार इकाइयों की देखरेख भी करता हूं। वह कहते हैं कि बस यही तरीका है जिससे हम दुनिया में आगे बढ़ने की चुनौती को पूरा कर सकते हैं।

नेशनल ज्योग्राफिक की एक रिपोर्ट के अनुसार, आर्कटिक र्स्कल से एक हज़ार मील की दूरी पर स्थित ये जलवायु नियंत्रित खेत हैं जो इस देश को दुनिया में टमाटर के निर्यात में नंबर एक पर खड़ा करते हैं। यही नहीं, इन्हीं ग्रीन हाउस परिसरों की बदौलत, डच (नीदरलैंड के लोगों को डच कहते हैं) आलू और प्याज़ के निर्यात के मामले में दुनिया में नंबर 1 पर हैं, व बाकी सब्जियों के निर्यात में नंबर दो पर हैं। दुनिया में एक तिहाई सब्ज़ियों के बीज नीदरलैंड में उगते हैं।

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