क्या होती है ये जैविक खेती, जिसकी हर जगह चर्चा रहती है, जानिए एक ग्रामीण महिला से

अगर आपको जैविक खेती के बारे में जानकारी नहीं है तो ये वीडियो देख लीजिए, झारखंड की इस ग्रामीण महिला के ज्ञान से आप भी प्रभावित हो सकते हैं।

सिल्ली (झारखंड)। अगर आप सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं, तो कुछ शब्द अक्सर सुनते और पढ़ते होंगे, जैविक खेती, जैविक उत्पाद। लेकिन होता क्या है, क्या होती है जैविक खेती, कौन करता है इस तरह से खेती, क्या होते हैं इसके फायदे?

जैविक खेती यानि जहर मुक्त खेती, जिसमें रासायनिक खादों और रासायनिक कीटनाशकों का उपयोग न किया गया हो। लेकिन ये होती कैसे, कौन करता है ये समझना जरुरी है। वैसे खेती-किसानी के जानकार, वैज्ञानिक लगातार इस पर लिखते रहे हैं, लेकिन गांव कनेक्शन आपको झारखंड की एक महिला से मिलवा रहा है, जिनके खेती किसानी और जैविक खेती के ज्ञान से आप को हैरानी होंगी।

"क्या जब अंग्रेजी दवाएं (कीटनाशक) नहीं थे तो क्या खेती नहीं होती थी?, होती थी न हमारे बाप-दादा ऐसी ही खेती करते थे, गोबर, नीम दूसरे देसी तरीकों से। अब हम लोग फिर से उसी तरह की खेती की तरफ लौट रहे हैं।' प्रभा देवी, महिला किसान, झारखंड

गांव कनेक्शन की टीम से बात करती प्रभा देवी।गांव कनेक्शन की टीम से बात करती प्रभा देवी।

झारखंड के सिल्ली प्रखंड के बाह्मनी गांव की प्रभा देवी खुद तो खेती करती ही हैं, दूसरी सैकड़ों महिलाओं को खेती के लिए प्रेरित भी करती हैं। सखी मंडल से जुड़ी प्रभा देवी एक कृषक मित्र हैं। वो कहती हैं, "जब ये डीएपी यूरिया नहीं थे जब हमारे इलाके में महिलाओं को बहुत कम कैंसर होते थे, लेकिन अब तो उनके गांव के आसपास कई महिलाओं को कैंसर है। क्योंकि हम जो जमीन में अंधाधुंध उर्वरक डालते हैं, वो मिट्टी में होकर हमारे खाने में पहुंच रही हैं।'

वो सवाल करती हैं, "क्या जब अंग्रेजी दवाएं (कीटनाशक) नहीं थे तो क्या खेती नहीं होती थी?, होती थी न हमारे बाप-दादा ऐसी ही खेती करते थे, गोबर, नीम दूसरे देसी तरीकों से। अब हम लोग फिर से उसी तरह की खेती की तरफ लौट रहे हैं।'

झारखंड स्टेट लाइवलीवुड प्रमोशनल सोसायटी के जरिए बनाए जा रहे सखी मंडलों की वो सक्रिय सदस्य हैं। उनकी प्रतिभा और खेती के प्रति लगन को देखते हुए जेएसएलपीएस ने उन्हें विशेष ट्रेनिंग भी दिलवाई हैं। उन्हें कई वर्कशॉप और कृषि से जुड़े आयोजनों में भेजा जाता है। जहां से मिली सीख और ज्ञान को वो दूसरी महिलाओं में बांटती हैं।

अपने आलू के खेत में काम करती प्रभा देवी बताती हैं, " रसायनिक तरीके से उगाई गई चीजें चमकदार होती हैं, एक तरह की होती है, लोग भी उन्हें खरीदते हैं, लेकिन वो नहीं जानते है कि उन्हें कैसे उगाया गया है।'

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