एक युवा जो बनना चाहता था डॉक्टर अब कर रहा खेती, 42000 किसानों को कर चुका प्रशिक्षित

एक युवा जो बनना चाहता था डॉक्टर अब कर रहा खेती, 42000 किसानों को कर चुका प्रशिक्षितसहफसली खेती की तकनीक सिखाते आकाश चौरसिया (दाएं से पहले)

लखनऊ। एक युवा डॉक्टर बनकर लोगों की इलाज करना चाहता था लेकिन जब उसे ये समझ आया कि ज्यादातर लोग खानपान की वजह से बीमार हो रहे हैं, तो उसने अपना फैसला बदल लिया। वो लोगों का डॉक्टर न बनकर फसलों का डॉक्टर बन गया।

मध्यप्रदेश के सागर जिले के रेलवे स्टेशन से छह किलोमीटर दूर राजीव नगर तिली सागर के रहने वाले आकाश चौरसिया (28 वर्ष) गाँव कनेक्शन को फोन पर बताते हैं, "मेरा बचपन से सपना था कि बड़ा होकर डॉक्टर बनूंगा और लोगों का इलाज करूंगा लेकिन जैसे - जैसे मैं बड़ा हुआ मुझे समझ में आया कि ज़्यादातर बीमारियां ख़राब खान - पान की वजह से होती हैं।

इसकी वजह जाननी चाही तो पता चला कि लोगों को शुद्ध अनाज और सब्जियां खाने को नहीं मिल रही हैं जिसकी वजह से वो बीमार हो रहे हैं। आजकल किसान सब्जियों और अनाज में इतने कीटनाशक और रसायनिक उवर्रक इस्तेमाल करते हैं कि लोगों को इससे तमाम तरह की बीमारियां हो जाती हैं। मुझे लगा डॉक्टर बनकर इलाज़ करने से अच्छा है कि मैं खेती करके इन्हें शुद्ध भोजन उपलब्ध कराऊं जिससे ये बीमार ही न पड़ें और इलाज़ की नौबत ही न आए।"

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इसी सोच के साथ साल 2011 में आकाश ने 10 डिसमिल से जैविक खेती करनी शुरू की। आज आकाश पूरे देश में साढ़े छह हजार किसान और 250 युवाओं के सहयोग से 18 हजार एकड़ खेती जैविक ढंग से करा रहे हैं। आकाश एक अच्छे प्रशिक्षक हैं, और इनके इनकी मॉडल फॉर्मिंग की हर जगह चर्चा है। कृषि के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने के लिए इन्हें आठ राष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके हैं।

कम लागत में ज़्यादा मुनाफा

आकाश ने अपने तीन एकड़ खेत को मॉडल फॉर्म के रूप में विकसित किया है। एक साथ चार से पांच फसल लेकर लागत चार से पांच गुना कम करने के साथ ही मुनाफा में भी पांच गुना इजाफा किया है। ये वर्मी कम्पोस्ट से लेकर सभी जैविक खादें, डेयरी फॉर्म, मल्टीलेयर फ़ूड फॉर्मिंग खुद ही करते हैं। हर महीने की 27, 28 तारीख को पूरे देशभर के कई किसान इनके यहाँ निशुल्क प्रशिक्षण लेने आते हैं। देशभर में अब तक 50 से ज्यादा माडल फॉर्म बना चुके हैं। आकाश ने 42 हजार किसानों को प्रशिक्षण दिया जिसमे 33 हजार किसान और साढ़े सात हजार युवा इनके साथ जुड़े हैं। साढ़े छह हजार किसान और 250 युवा पूरी तरह से आकाश के बताये तौर तरीकों से 18 हजार एकड़ जमीन में खेती कर रहे हैं।

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सात साल में सिखा चुके हज़ारों किसानों को खेती की तकनीक

आकाश ने बताया, "हम सिर्फ ट्रेनिंग देने में विश्वास नहीं रखते हैं बल्कि किसान इसे खुद करें ये हमारी पूरी कोशिश रहती है, मुझे लगता है ट्रेनिंग के अलावा अगर किसानों के यहाँ जाकर उन्हें उसी ढंग से खेती कराई जाए तो उनके लिए ज्यादा उपयोगी होगी।" वो आगे बताते हैं, "मैं हर दिन खेती करने के नये तरीकों को खोजने की कोशिश करता हूँ जिससे किसानों को ज्यादा से ज्यादा लाभ हो सके, मुझे अभी सात साल ही खेती करते हुआ है पर पूरे देश के हजारों किसान और युवा हमारे बताये अनुसार खेती कर रहे हैं जिससे ये शुद्ध अनाज उत्पादन कर रहे हैं, ये मेरे लिए बहुत खुशी की बात है।"

ये तरीके अपनाते हैं आकाश

जब आकाश किसानों से मिले तो किसानों ने अपनी कई तरह की समस्याएं बताईं। आकाश ने इन समस्याओं के के समाधान के लिए एक लम्बा शोध किया, जिससे किसानो की समस्याओं का समाधान किया जा सके। आकाश ने बताया, "मै एक साथ एक ही जमीन पर चार से पांच फसलें लेता हूं जिससे लागत और समय दोनों की बचत होती है और अच्छा मुनाफा होता है, क्योंकि एक फसल से दूसरे फसल को खाद मिलती रहती है, फसलों में खरपतवार नहीं होता है, कीड़े नहीं लगते हैं।"

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म्यूजिक सुनाकर जल्दी तैयार करते हैं खाद

जैविक खाद और फसल को म्यूजिक सुनाकर अच्छा उत्पादन लेते हैं। जो केंचुआ की खाद 60 दिन में तैयार होती है म्यूजिक सुनाने के बाद ये 45 दिन में तैयार हो जाती है। अगर फसल की बात की जाए तो 90 दिन वाली फसल 70 से 75 दिन में तैयार हो जाती है। फसल की कटाई 15 से 20 दिन में होने के साथ ही उत्पादन में 25 प्रतिशत तक की बढ़ोत्तरी होती है। आकाश ने बताया, "म्यूजिक सुबह और शाम दो-दो घंटे सुनाना पर्याप्त हैं, रात में नहीं सुनाना चाहिए, क्लासिकल म्यूजिक हो जिसमें एक धुन हो, रिदम हो शब्द न हों, दोपहर में भी इसे सुनाया जा सकता है।"

साकेत संस्था के जैविक खेती के विशेषज्ञ डॉ जितेन्द्र सिंह ने बताया, "फसल को म्यूजिक सुनाने से फसल के उत्पादन में फर्क पड़ता है, संगीत के स्वर की आवृतियाँ वातावरण को प्रभावित करती हैं तो निश्चित तौर पर ये फसल को भी प्रभावित करती हैं। ब्रहम कुमारी में मंत्रोच्चार से वैदिक खेती होती है।"

खेत में होता है पानी रिचार्ज

खेत का पानी बरसात में बर्बाद न हो इसके लिए खेत में ही पानी रिचार्ज की सुविधा की। 10/10 का गढ्ढा खेत के लान वाली खोदतें हैं जिससे पूरा पानी इस गढ्ढे में आता है। इससे एक एकड़ खेत में आठ से 10 लाख लीटर पानी और दो ट्राली मिट्टी को बचाया जा सकता है। इस तरह किसान हजारों ट्राली मिट्टी बचाने के साथ ही करोड़ों लीटर पानी संरक्षित कर रहे हैं।

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कीटनाशक भी बनाते हैं घर पर

ये रासायनिक खादों की पूर्ति जैविक चीजों को मिलाकर जैविक खाद तैयार करते हैं जिससे मिट्टी को भरपूर पोषक तत्व मिल सकें। किसानों की बाजार से निर्भरता कम हो इसके लिए किसान खाद से लेकर कीटनाशक तक सभी खादें घर पर ही बनाते हैं। आकाश भारत की विलुप्त प्रजातियों को संरक्षित करने का भी काम कर रहे हैं। ये देशी तरीके से ग्रीन हाउस तैयार करते हैं जिससे फसल प्राकृतिक आपदा से बच सके। 6/6 की दूरी पर बांस लगाते हैं उसके ऊपर सूखी घास डालते हैं जिससे फसल को नुकसान न हो।

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