कैसे पहचाने जौ में मैग्नीशियम की कमी और क्या करें उसके उपाय में 

कैसे पहचाने जौ में मैग्नीशियम की कमी और क्या करें उसके उपाय में जौ की फसल।

जौ में पाए जाने वाले पोषक तत्वों के कारण आजकल देशी-विदेशी कंपनियों जौ से बने खाद्य पदार्थां को बाजार में उतार रही हैं। जिसके कारण जौ की मांग तेजी से बढ़ रही है, पिछले कुछ सालों में रबी की अन्य फसलों के मुकाबले जौ की कम पैदावार होने से किसानों का इसकी खेती से मोहभंग हो गया था और प्रदेश में जौ की खेती की रकबा लगातार घट रहा था, लेकिन बाजार में जौ की बढ़ती डिमांड ओर गेहूं के बदले इसको मिल रही अच्छी कीमत से किसानों ने फिर से जौ की खेती की तरफ रूख किया है।

पर कभी-कभी मैग्नीशियम की कमी से फसल भी ख़राब हो जाती है। केवीके अंबेडकरनगर के कृषि वैज्ञानिक डॉ रवि प्रकाश मौर्या ने इसके लक्षण और उपाय के तरीके बताए हैं।

जौ में मैग्नीशियम की कमी के लक्षण

  • पुरानी पत्तियों की शिराओं के अंदर हल्के हरे रंग के घब्बे या क्लोरोसिस से ग्रस्त आकृतियाँ दिखाई देती हैं, जो अक्सर किनारों के नज़दीक आरंभ होते हैं।
  • पत्तियों के किनारों पर लाल या भूरे रंग के धब्बे उभर सकते हैं।
  • बाद में, ये अत्यधिक क्लोरोसिस से ग्रस्त ऊतकों में गले हुए स्थानों के रूप दिखाई देने लगते हैं।
  • पत्तियों की समय से पूर्व मृत्यु और पत्तियों का शीघ्र गिरना।
  • जड़े की वृद्धि अवरोधित हो जाती है, जिसके परिणामस्वरूप पौधे की फीकी पड़ जाती है।

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कैसे कमी हो जाती है मैग्नीशियम की

डॉ रवि प्रकाश मौर्या बताते हैं, “कम पौषण एवं कम पानी जम़ा करके रखने की क्षमता वाली हल्की, रेतीली या अम्लीय मिट्टी में मैग्नीशियम की कमी एक आम समस्या है। उन मिट्टियों में, पौषक तत्व आसानी से घुलकर बह जाते हैं। जिन भूमियों में पोटेशियम या अमोनियम की मात्रा भरपूर होती है या इन पौषक तत्वों का अत्यधिक प्रयोग किया जाना, भी समस्याप्रद हो सकता है, क्योंकि वे भूमि में मैग्नीशियम के साथ प्रतियोगिता करते हैं।”

“मैग्नीशियम शर्करा के परिवहन में सहयोग करता है और यह क्लोरोफिल अणुओं का एक महत्वपूर्ण भाग होता है। मैग्नीशियम की पर्याप्त मात्रा के बिना, पौधे पुरानी पत्तियों में मौजूद क्लोरोफिल को घटाने लगते हैं ताकि उसे विकसित हो रही नई पत्तियों तक पहुँचाया जा सके। प्रकाश की तीव्रता लक्षणों के उत्पन्न होने को प्रभावित करती है। अधिक प्रकाश कमी के प्रभावों को और अधिक गंभीर बना देता है।”

उपाय

  • अगर अनुकूलतम अंतर प्राप्त करना आवश्यक है तो मिट्टी के चभ् और उसमे चूने की मौजूदगी की जाँच करें।
  • खेतों में पानी की निकासी की अच्छी योजना बनाएं और फसलों को आवश्यकता से अधिक पानी नही दें।
  • अधिक मात्रा में पोटाश उर्वरक नही डालें।
  • मिट्टी की नमी को बरकरार रखने के लिए जैविक गीली घास का प्रयोग करें।

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रासायनिक नियंत्रण

डॉ मौर्या बताते हैं, “मैग्नीशियम से युक्त मिट्टी या पत्तों पर छिड़के जाने वाले उर्वरकों का प्रयोग करें। मैग्नीशियम आक्साइड पौषक तत्वों को धीरे-धीरे छोड़ता है और इसे फसलों को तुरंत मैग्नीशियम की आपूर्ति करने के लिए मिश्रण में प्रयोग में लिया जाता है। मैग्नीशियम सल्फेट कई सप्ताह में मिट्टी में मैग्नीशियम को छोड़ता है और यह भूमि में मैग्नीशियम के शीघ्रता से जाने के संबंध में हमारी आवश्यकता की पूर्ति करता है।”

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