...तो अमेरिका, यूरोप और ईरान में नहीं बिकेगा आपका चावल

Ashwani NigamAshwani Nigam   9 July 2017 11:25 AM GMT

...तो अमेरिका, यूरोप और ईरान में नहीं बिकेगा आपका चावलज्यादा कीटनाशकों का बढ़ रहा उपयोग

लखनऊ। तयसीमा से अधिक कीटनाशकों के उपयोग के कारण यूरोपीय देशों के भारतीय बासमती पर रोक लगाने के बाद अब धान की फसलों पर भी संकट खड़ा हो गया है। ज्यादा कीटनाशकों के उपयोग करने पर किसानों का धान इन देशों में निर्यात नहीं हो सकेगा।

देश के किसानों की मेहनत और धान की उन्नत किस्मों से पिछले पांच सालों में भारत विश्व का सबसे बड़ा चावल निर्यातक देश बन गया है। मगर कुछ दिन पहले ही जहां यूरोपीय देशों ने तय सीमा से अधिक कीटनाशकों के इस्तेमाल के कारण भारतीय बासमती पर रोक लगा दी है, वहीं अब भारत के चावल को लेकर अमेरिका और ईरान जैसे देशों ने भी कड़ा रुख अपनाया है।

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जारी हुई एडवाइजरी

ऐसे में इस खरीफ सीजन में धान की बुवाई करने वाले किसान इस साल धान में प्रतिबंधित कीटनाशकों के इस्तेमाल से बचें और एक तय सीमा से अधिक कीटनाशक का इस्तेमाल न करें, इसको लेकर वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के तहत आने वाले कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण यानि एपीडा ने धान की फसल पर कीटनाशकों के उचित उपयोग पर एडवाइजरी जारी की है। एपीडा के सलाहकार विनोद कुमार कौल बताते हैं, ”धान की फसल में अधिकतम अवशेष सीमा यानि एमआरएल से अधिक कीटनाशकों के अवशेष पाए जाने से विश्व के विभिन्न बाजारों में भारतीय चावल निर्यातकों को समस्याओं को सामना करना पड़ रहा है।“

उन्होंने आगे बताया, “ऐसे में किसान कितना कीटनाशक इस्तेमाल करें, इसकी सलाह जारी की गई है।’’ उन्होंने बताया कि हाल में यूरोपीय संघ ने ट्राईसाइक्लाजोल की अवशेष सीमा 0.01 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम निर्धारित किया गया है। इसी तरह अमेरिका में 0.01 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम से अधिक कीटनाशकों की अनुमति नहीं दी है। साथ ही आईसोप्रोथिलेन और ब्यूप्रोफेजिन जैसे कीटनाशकों को प्रतिबंधित कर दिया है, लेकिन जानकारी के अभाव में भारतीय किसान धान की फसल पर इसका इस्तेमाल करते हैं और उसके बाद चावल निर्यात करने में समस्या आती है।

करीब 20 लाख किसानों पर सीधा असर

ऑल इंडिया राइस एक्पोटर्स एसोसिएशन की रिपोर्ट के अनुसार, भारत से हर साल 50 लाख मीट्रिक टन चावल विदेशों में निर्यात किया जाता है। ऐसे में अगर कीटनाशकों के अधिक इस्तेमाल के कारण अगर चावल निर्यात नहीं होगा तो 18 से लेकर 20 लाख किसानों पर इसका सीधा असर पड़ेगा। इसी को देखते हुए भारत में निर्यात के सबसे बड़े सरकारी संगठन एपीडा ने किसानों को कम से कम कीटनाशकों के इस्तेमाल की सलाह दी है।

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किसानों के लिए सलाह

एपीडा ने किसानों से कहा है कि किसान धान के खेत में उसी कीटनाशक का इस्तेमाल करें जो वहां के कृषि विश्वविद्यालयों की तरफ से धान की फसल में इस्तेमाल के अनुशंसित किए गए हैं। अगर किसान इसका पालन करेंगे तो उनके जरिए पैदा किया गया चावल विदेशी बाजार में मान्य होगा।

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