ये आम हैं बहुत ख़ास, जानें किस राज्य में किस आम के स्वाद का है राज

ये  आम हैं बहुत ख़ास, जानें किस राज्य में किस आम के स्वाद का है राज

लखनऊ। हर किसी का अपना एक पसंदीदा आम होता है। यूपी वालों को दशहरी मन भाता है तो मुंबई वाले अलफांसो लुभाता है। दिल्ली वाले चौसा की मिठास के गाने गाते हैं तो बंगलुरू वालों को बंगनपल्ली का स्वाद दीवाना बनाता है। तेज़ गर्मी में आम का स्वाद इसके हर पसंद करने वाले को राहत दिलाता है। अब आपको कौन सा आम पसंद है यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप किस प्रांत से हैं और आपका बचपन कहां बीता।

उत्तर प्रदेश में इस समय मैंगो फूड फेस्टिवल चल रहा है। इस मैंगो फूड फेस्टिवल में आम से बने अलग-अलग व्यंजन परोसे जा रहे हैं। सिर्फ यूपी ही नहीं देश के और भी कई राज्यों के अपने कुछ खास 'आम' होते हैं। आप भी जानिए इन आम की इन किस्मों के बारे में…

दशहरी, चौसा, लंगड़ा -उत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश में दशहरी आम का बोलबाला है। इस प्रजाति की उत्पत्ति लखनऊ के पास दशहरी गाँव से हुई इसलिए इसे दशहरी नाम दे दिया गया। यहां सबसे ज़्यादा लोग दशहरी को ही पसंद करते हैं। इसके बाद नंबर आता है लंगड़ा आम का। लंगड़ा आम बनारसी मूल का है। लंगड़ा रेशेदार आम होता है, यह अपनी मिठास के लिए जाना जाता है। आम खाने वाले इसे इसलिए भी पसंद करते हैं क्योंकि इस आम की गुठली काफी छोटी है और गुदा ज़्यादा होता है।

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चौसा आम बाज़ार में आधी जुलाई बीत जाने के बाद आता है जब बाकी आमों की आवक कम हो जाती है। इस आम की खासियत है इसका रेशारहित गूदा और मिठास। ऐसा कहते हैं कि 1539 में बिहार के चौसा में शेरशाह सूरी ने हुमायूं से युद्ध जीतने के बाद इसे चौसा नाम दिया था। वैसे इसकी उत्पत्ति उत्तर प्रदेश के हरदोई ज़िले में हुई थी। सुनने में तो ये भी आता है कि मशहूर शायर मिर्ज़ा ग़ालिब के लिए भी यही आम सबसे खास था।

जर्दालू - बिहार

बिहार के भागलपुर में होने वाला जर्दालू आम 'आम' से लेकर 'खास' तक हर किसी को लुभाता है। इसका स्वाद ही कुछ ऐसा है कि एक बार जो इसे चख ले वह इसका दीवाना हो जाता है। यह आम आम जनता के साथ राजनीतिज्ञों के लिए भी खास रहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के निर्देश पर वर्ष 2006 से भागलपुर का जर्दालु सौगात के रूप में देश के महामहिम राष्ट्रपति, उप राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, गृहमंत्री, रक्षा मंत्री, कृषि मंत्री, सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश, दिल्ली के मुख्यमंत्री सहित अतिविशिष्ट अतिथियों को भेजा जाता रहा है। जर्दालु आम के पैकेट पर लिखा होता है 'मुख्यमंत्री नीतीश की भेंट'।

मनकुरद और मुसरद - गोवा

गोवा में मिलने वाले मनकुरद, मुसरद, नीलम और बाल आंबू जैसे आम यहां के लोगों को खास पसंद हैं। शुरुआती अप्रैल में बाज़ार में आ जाने वाले ये आम गर्मियों की शुरुआत को ही मीठ कर देते हैं। गोवा में मिलने वाले मनकुरद आम से यहां के लोग चटनी, हलवा, जैम के साथ अमेलची उद्दामेथी (आम से बनने वाला विशेष प्रकार का व्यंजन) जैसी डिशेज भी बनाते हैं।

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हिमसागर और मालदा - पश्चिम बंगाल

हिमसागर एक बहुत ही लोकप्रिय आम की किस्म है। यह भारत के पश्चिम बंगाल में और बांग्लादेश के राजशाही में मिलता है। पटना के दीघा घाट के मालदा आम की खुशबू और मिठास के दीवानें देश-विदेश तक फैले हैं। मालदा आम की मिठास और खुशबू की वजह से हर साल अमेरिका, यूरोप, दुबई, स्वीडन, नाइज़ीरिया, इंग्लैंड आदि देशों में रहने वाले लोग इसे वहां मंगवाते हैं। महाराष्ट्र, यूपी, गुजरात, पश्चिम बंगाल, दिल्ली, राजस्थान आदि राज्यों में भी मालदा आम के कद्रदानों की भरमार है।

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अलफांसो - महाराष्ट्र

अलफांसो आम देश के सबसे चर्चित आमों में से एक है। इसकी मिठास, स्वाद और सुगंध बाकी आमों से बिल्कुल अलग है। इसकी खासियत है पकने के एक हफ्ते बाद तक इसका ख़राब न होना। इस खास गुण के कारण ही देश से बाहर निर्यात किए जाने वाले आमों में अल्फांसो सब से ज्यादा निर्यात किया जाता है। कीमत के मामले में भी यह सब से महंगा होता है।

देश का यह पहला आम है, जो किलोग्राम के भाव नहीं दर्जन के भाव में बिकता है। थोक बाजार में इसकी कीमत 700 रुपये दर्ज़न है तो फुटकर बाज़ार में अलफांसो 2500 से 7000 रुपये प्रति दर्ज़न तक मिलता है। एक अलफांसो का वजन लगभग 150 ग्राम से 350 ग्राम तक होता है।

बंगनपल्ली - दक्षिण भारत

आंध्र प्रदेश के कुरनूर ज़िले में बंगनपल्ली के शाही परिवार ने इस आम का परिचय कराया था। हाल ही में इस आम को जियोग्राफिकल इंडिकेटर का टैग प्राप्त हुआ, जो बताता है कि किसी विशेष क्षेत्र के उत्पादन में ऐसे गुण होते हैं जो अकेले उस क्षेत्र के लिए विशिष्ट होते हैं।

इस आम से 'मैंगो मोर कुझाम्बू' नाम की तमिल स्टाइल कढ़ी भी बनाई जाती है। दही में बेसन मिलाकर उसमें आम के टुकड़े डालकर बनाई हुई ये कढ़ी अपने आप में खास होती है। इस आम के दीवाने तो यहां तक कहते हैं कि इसका छिलका तक इतना अच्छा और मीठा होता है कि मन करता है उसे भी खा जाएं।

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