रूठ गया मानसून, सामान्य से 25 प्रतिशत कम हुई बरसात

रूठ गया मानसून, सामान्य से 25 प्रतिशत कम हुई बरसातधान रोपाई की तैयारी करती महिला किसान

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में मानसून इस बार दगा दे गया है। तय समय से दस्तक देने बाद भी मानूसन में जो बारिश होनी चाहिए नहीं हो रही है। उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक डा1 राजेन्द्र कुमार ने बताया '' कृषि निदेशालय उत्तर प्रदेश के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के सभी 75 जिलों में 1 जून से लेकर 23 अगस्त तक मात्र 430.3 मिलीमीटर वर्षा हुई है जो सामान्य वर्षा 580.4 मिलीमीटर से 25.9 प्रतिशत कम है। ऐसे में नेपाल के पानी के कारण जहां प्रदेश के 25 जिलों मे बाढ‍़ के कहर से खेती बर्बाद हो रही है वहीं बाकी बचे 50 जिलों में सूखे का खतरा मंडरा रहा है। ''

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भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने इस साल 18 अप्रैल को मानसून के दीर्घावधि पुर्वानुमान को जार करते हुए सामान्य मानसून की घोषणा की थी। जिसमें बताया गया था कि इस साल अच्छी बरसात होगी लेकिन अभी तक के बरसात के देखते हुए मौसम का पूर्वानुमान गलत साबित हो रहा है।

मानसूनी बरसात के अभी तक के जो आंकड़े मिले हैं उसके मुताबिक प्रदेश के 75 में से दो जिलों श्रावस्ती और आजमगढ़ में ही सामान्य से अधिक बरसात हुई है, जबकि बाकी जिलों में सामान्य से कम बरसात हुई है। प्रदेश के तीन जिले गौतमबुद्ध नगर, गाजियाबाद और पीलीभीत में बहुत कम यानि सामान्य से 40 प्रतिशत कम बरसात हुई है।

नरेन्द्र देव कृषि एवं प्रोद्योगिकी विश्वविद्यालय के एग्रीकल्चर मेट्रोलाजी विभाग के वैज्ञानिक प्रोफेसर डा. ए.के. सिंह ने बताया '' मानसून जून में शुरू होता है और सितंबर तक सक्रिय रहता है। ऐसे में इस साल मानसून के तीन महीने लगभग बीतने की कगार पर हैं और बरसात सामान्य से कम हुई है जो कृषि क्षेत्र के अच्छे संकेते नहीं हैं। ''

उन्होंने बताया कि मानसून के दीर्घावधि पूर्वानुमान के दौरान मौसम विभाग कई पैमानों का इस्तेमाल कर इन चार महीनों के दौरान होने वाली मानसूनी बारिश की मात्रा को लेकर संभावना जारी करता है। पिछले साल मौसम विज्ञान विभाग ने मानसून के 106 प्रतिशत बारिश का भविष्यवाणी लेकिन वास्तविक बारिश 97 प्रतिशत हुई थी।

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बुधवार को उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद में मौसम आधारित राज्य स्तरीय कृषि परामर्श समूह की बैठक हुई। जिसमें किसानों के लिए सलाह जारी की है। जिसमें सूखे से खाद्यान्न फसलों में 2 प्रतिशत यूरिया और दलहनी फसलों में 2 प्रतिशत फास्फोरस का छिड‍़काव करने को कहा है। बाढ़ से प्रभावित और जलभराव वाले क्षेत्रों में देर से पकने वाली प्रजातियों की बुवाई करने की सलाह दी गई।

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मौसम आधारित कृषि परामर्श समूह की बैठक में प्रो. राजेन्द्र कुमार के अलावा, आंचलिक मौसम विज्ञान केन्द्र अमौसी के निदेशक जेपी गुप्ता सहित प्रदेश के कृषि विश्वविद्यालयों के मौसम विज्ञानी, पादप रोग वैज्ञानिक और दूसरे अधिकारी उपस्थित थे।

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