बीमा का गड़बड़झाला : पिछले साल की फसल का नहीं मिला बीमा का पैसा, कैसे खेती करेगा किसान

बीमा का गड़बड़झाला : पिछले साल की फसल का नहीं मिला बीमा का पैसा, कैसे खेती करेगा किसानफोटो: गाँव कनेक्शन

लखनऊ। "मैंने पिछले खरीफ सीजन में धान की फसल का बीमा कराया, बीमा कंपनी ने प्रीमियम भी काटा, मगर फसल बर्बाद होने के बाद भी भुगतान नहीं किया गया। मैंने विभाग और बैंक में शिकायत भी की, मगर लंबे समय बाद भी कोई फायदा नहीं मिला और मैं सिर्फ इधर-उधर भटकता रहा। किसानों से बीमा का प्रीमियम तो ले लिया जाता है, मगर क्लेम का भुगतान जल्दी नहीं दिया जाता। ऐसे में फसल बीमा भला हमारे किस काम का है?" यह कहना है महाराजगंज जिले के गाँव गांगी के किसान कमल किशोर का।

भला किसान अगली फसल की कैसे करेगा तैयारी

सिर्फ कमल किशोर जैसे किसान ही नहीं, बल्कि देशभर में ऐसे बड़ी संख्या में किसान हैं, जो फसल बर्बाद होने की स्थिति में लंबे समय के बाद भी बीमा का भुगतान प्राप्त नहीं कर सके हैं। ऐसे में किसानों को अगर समय पर बीमा का लाभ नहीं मिलता है तो भला किसान अगली फसल के लिए कैसे तैयारी कर सकेगा।

अब तक 2,822 करोड़ रुपए के दावों का भुगतान नहीं

कृषि मंत्रालय के हाल में जारी किए आंकड़ों के अनुसार, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत देश में 2016-17 में खरीफ और रबी दोनों फसलों से बीमा कंपनियों ने कुल 22,344.93 करोड़ रुपए का प्रीमियम इकट्ठा किया। इसमें किसानों के लिए बीमा कंपनियों ने कुल 9,446.83 करोड़ रुपए के दावों को मंजूरी दे दी। इसमें रबी और खरीफ, दोनों फसलों के किसानों के प्रीमियम शामिल हैं। इसमें से बीमा कंपनियों ने 6,624.65 करोड़ रुपए का अब तक किसानों को भुगतान किया है। ऐसे में 2,822.18 करोड़ रुपए के दावों का भुगतान अब तक नहीं किया जा सका है। जबकि वर्ष 2016-17 में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत 5.74 करोड़ किसानों को कवर किया गया है।

इस तरह समझिए

  • वर्ष 2016-17 में कुल प्रीमियम इकट्ठा किया गया: 22,344 करोड़ रुपए
  • बीमा कंपनियों ने कुल इतने क्लेम को भुगतान की मंजूरी दी: 9,446.83 करोड़ रुपए
  • बीमा कंपनियों ने कुल क्लेम का भुगतान किया: 6,624.65 करोड़ रुपए
  • अभी भी कलेम का भुगतान किया जाना शेष: 2,822.18 करोड़ रुपए

किसानों की मुश्किलेंं कम होने की बजाए और बढ़ गईं

यानि लंबे समय के अंतराल के बावजूद किसानों की 2,822 करोड़ के बीमा क्लेम अटके हुए हैं और भुगतान नहीं हो सके हैं। ऐसे में किसानों को बीमा का समय पर भुगतान न किए जाने से किसानों की मुश्किलें कम होने की बजाए और बढ़ गईं है। ऐसे में अपनी फसल से नुकसान उठाने वाला किसान भला अगली फसल के लिए तैयारी कैसे कर सकेगा।

बीमा होना या न होना बराबर है

इस बारे में कृषि विशेषज्ञ रमनदीप सिंह मान बताते हैं, "देशभर में ऐसे कई किसान होंगे, जिन्हें पिछले साल की खरीफ फसलों का भी बीमा क्लेम का भुगतान नहीं किया गया है। ऐसे में करीब सात महीने के बाद भी किसानों को भुगतान होने वाली बड़ी राशि अटकी रही। ऐसे में जो बीमा योजना सात महीने तक भुगतान न कर सके, उससे तो बीमा होना या न होना बराबर है। यह किसानों के साथ अन्याय है क्योंकि किसान अभी भी बीमा क्लेम का भुगतान होने का इंतजार कर रहा है।"

मैंने पिछले साल अपनी फसल के लिए बीमा कराया था, मगर कोई फायदा नहीं मिला। बीमा कंपनियों ने ब्लाक और तहसील स्तर पर अपना कोई ऑफिस ही नहीं बनाया। ऐसे में किसान बीमा से अपनी फसल नुकसान का दावा लेने के लिए भटकते रहे। स्थिति यह है पिछले दो सालों में अभी तक बीमा कंपनियां किसानों के दावों का सही भुगतान कर रही हैं कि नहीं, इसकी क्रास चेकिंग के लिए कोई व्यवस्था ही नहीं हो पाई है।
रवींद्र कुमार, किसान, मथुरा

योजना में जमीनी स्तर पर कई खामियां

रमनदीप सिंह मान आगे कहते हैं, "प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में अभी भी जमीनी स्तर पर कई खामियां हैं और अगर किसानों को वास्तव में लाभ पहुंचाना है तो इन समस्याओं को जल्द से जल्द दूर करने की जरुरत है।" मथुरा के किसान रवींद्र कुमार बताते हैं, "मैंने पिछले साल अपनी फसल के लिए बीमा कराया था, मगर कोई फायदा नहीं मिला। बीमा कंपनियों ने ब्लाक और तहसील स्तर पर अपना कोई ऑफिस ही नहीं बनाया। ऐसे में किसान बीमा से अपनी फसल नुकसान का दावा लेने के लिए भटकते रहे। स्थिति यह है पिछले दो सालों में अभी तक बीमा कंपनियां किसानों के दावों का सही भुगतान कर रही हैं कि नहीं, इसकी क्रास चेकिंग के लिए कोई व्यवस्था ही नहीं हो पाई है।"

किसानों को कम देना था प्रीमियम

पूरे देश में जनवरी, 2016 में एक ही योजना प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना लागू की गई। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में प्रावधान है कि सभी खरीफ़ फसलों (जुलाई से अक्टूबर) के लिए किसानों को दो प्रतिशत और सभी रबी फसलों (अक्टूबर से मार्च) के लिए 1.5 प्रतिशत का प्रीमियम देना होता है, जबकि वार्षिक वाणिज्यिक और बागवानी फसलों के लिए पांच प्रतिशत प्रीमियम देना होता है। इसके अलावा केंद्र और राज्य सरकार शेष प्रीमियम का भुगतान करती है। इस महत्वाकांक्षी योजना में सरकारी बीमा कंपनियों की उपस्थिति नाममात्र की है, जबकि निजी बीमा कंपनियों ज्यादा हैं।

मगर फायदा सिर्फ बीमा कंपनियों का हुआ

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का फायदा किसानों को नहीं, बल्कि बीमा कंपनियों को मिल रहा है। कई निजी बीमा कंपनियां करोड़ों में मोटा मुनाफा कमा रही हैं। राज्यों के आंकड़ों से पता चलता है कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत जितना किसान भुगतान का दावा करते हैं, निजी बीमा कंपनियां उससे कम राशि अदा करती हैं। ऐसे में फायदा सिर्फ निजी बीमा कंपनियां उठा रही हैं। वर्ष 2016 में खरीफ सीजन में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के आंकड़ों पर गौर करें तो बीमा कंपनियों को इस सीजन में 9,081 करोड़ रुपए का प्रीमियम मिला, जबकि किसानों से 1,643 करोड़ रुपए प्रीमियम के रूप में प्राप्त हुआ, शेष केंद्र और राज्य सरकारों ने प्रीमियम अदा किया। वहीं किसानों ने इस सीजन में 2,725 करोड़ रुपए का बीमा क्लेम का दावा किया, मगर किसानों को 638 करोड़ रुपए अब तक धनराशि दी गई। ऐसे में बीमा कंपनियों को मोटा मुनाफा हो रहा है।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ किसानों को नहीं, बल्कि बीमा कंपनियों को मिल रहा है। सरकार इस योजना को किसानों पर थोपकर अपनी जिम्मेदारी से बच रही है।
अतुल कुमार अंजान, किसान नेता, स्वामीनाथन आयोग में कर चुके काम

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