अधिक तापमान और महंगे बीज से आलू किसानों की बढ़ीं मुश्किलें

हर साल सितम्बर के आखिरी सप्ताह तक तापमान गिरने लगता है, उसी समय किसान अगेती आलू की बुवाई भी शुरू करते हैं, लेकिन इस बार तापमान ज्यादा ही रहा, जिसका असर आलू उत्पादन पर भी पड़ेगा।

Divendra SinghDivendra Singh   21 Oct 2020 4:39 AM GMT

अधिक तापमान और महंगे बीज से आलू किसानों की बढ़ीं मुश्किलें

इस समय ज्यादातर क्षेत्रों में अगेती आलू की बुवाई खत्म करके किसान पछेती आलू की बुवाई करने लगे हैं, लेकिन इस बार ज्यादा तापमान और महंगे बीज से काफी किसानों को नुकसान भी उठाना पड़ा है।

केंद्रीय आलू अनुंसधान संस्थान, मोदीपुरम के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. विजय कुमार गुप्ता कहते हैं, "अगेती आलू की खेती के लिए दिन का तापमान 34 और रात का तापमान 24 होना चाहिए, तो ये मानिए कि आप बुवाई कर सकते हैं। क्योंकि एक महीने बाद आलू बनना शुरू होता है तब रात का तापमान 20 के नीचे आने लगता है। लेकिन इस बार क्या हुआ कि अधिकतम तापमान जल्दी नीचे नहीं आए हैं, जबकि न्यूनतम तापमान नीचे आने लग गया। ये भी जलवायू परिवर्तन की ही असर है।"

उत्तर प्रदेश में सितम्बर के आखिरी सप्ताह में आलू की बुवाई शुरू हो जाती है। साल 2019 में सितम्बर के आखिरी सप्ताह और अक्टूबर के पहले सप्ताह में दिन का अधिकतम तापमान 33 और न्यूनतम तापमान 26 रहा जबकि रात का तापमान अधिकतम 24 और न्यूनतम 22 रहा। वहीं इस साल 2020 सितम्बर के आखिरी सप्ताह और अक्टूबर के पहले सप्ताह में दिन का अधिकतम 38 और न्यूनतम 29 रहा जबकि रात का तापमान 27 और 23 रहा।


"अगर आप ओवर ऑल न्यूनतम तापमान निकालेंगे तो अब ये तापमान बुवाई के लिए सही हो गया है। पिछले कुछ साल के मुकाबले इस बार आलू कुछ देर भी हुआ है। लेकिन अभी मौसम सही है। अगर मुख्य जो फसल है उसके लिए 20 और 30 होना चाहिए औसत 25 होना चाहिए। जो अगेती फसल है उसका 34-24 होना चाहिए।, डॉ. विजय कुमार गुप्ता ने आगे बताया।

उत्तर प्रदेश में आगरा, फिरोजाबाद, हाथरस, कन्नौज, फर्रूखाबाद, अलीगढ़, बदायूं, मैनपुरी, इटावा, मथुरा, कानपुर नगर, बाराबंकी, हरदोई, फतेहपुर, उन्नाव और गाजीपुर आलू के प्रमुख उत्पादक जिले हैं। जहां पर एक बड़े क्षेत्रफल में आलू की खेती होती है।

कई किसानों की आलू की फसल को भी नुकसान हुआ है। कृषि विज्ञान केंद्र, कन्नौज के कृषि वैज्ञानिक डॉ. अमर सिंह कहते हैं, "इस बार आलू की अगेती खेती काफी प्रभावित हुई है, सितम्बर के आखिरी सप्ताह और अक्टूबर के पहले सप्ताह में जिन किसानों ने आलू की फसल लगाई थी, उनके फसल में अंकुरण ही नहीं हुआ है। जब तापमान ज्यादा रहता है तो किसानों को साबुत आलू लगाने की सलाह दी जाती है, लेकिन कई किसानों बीज को काटकर ही लगाया, वो बीज खेत में सड़ गए हैं।"

इस बार सिर्फ मौसम की वजह से ही किसान परेशान नहीं है, पिछले बुवाई सत्र 2019-20 में भी मौसम की मार से किसानों को नुकसान हुआ था, जिसका असर इस बार भी बुवाई पर पड़ रहा है। सितम्बर 2019 में बुवाई के समय और फरवरी 2020 में आलू खुदाई के समय बारिश और ओलावृष्टि से काफी फसल बर्बाद हुई थी। इस वजह से इस बार बीज के दाम भी काफी बढ़ गए हैं।

उद्यान एवं प्रसंस्करण विभाग, उत्तर प्रदेश के निदेशक डॉ. एसबी शर्मा बताते हैं, "इस बार जिलों में भी कम आलू कम पहुंचा है, हर साल के मुकाबले तीन-चार हजार कुंतल आलू कम है, साल 2019-20 में 575 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में आलू बोया गया, पिछले साल एरिया भी कम था और मौसम और बारिश का भी असर रहा है। इस बार तो देश में ही आलू कम हुआ था। इस बार हमारी कोशिश है कि आलू का रकबा बढ़ाया जाए।"

फुटपाथ व कोल्ड स्टोरेज से पिछले वर्ष 400 रुपए कुंतल मिलने वाला बीज इस बार 1400 से 1500 सौ रुपए प्रति कुंतल मिल रहा है। आमतौर पर सितंबर के पहले सप्ताह के बाद अगेती आलू की फसल की बुवाई शुरू हो जाती है। सवा दो से ढाई माह में तैयार होकर फसल की खुदाई होने लगती है। दीपावली के करीब नया आलू बाजार में आ जाता है। बड़ी संख्या में किसान अगेती फसल की खेती करते हैं। कुछ किसान तो इसके बाद पक्की फसल भी कर लेते हैं। दूसरी ओर अगेती आलू के बाद गेहूं की फसल भी किसान करते हैं। बताया गया है कि पुखराज, ख्याती किस्म का आलू बीज 350 से 400 रुपए कुंतल था, लेकिन वर्तमान में 1400 से 1500 रुपए तक बाजार भाव है। तापमान देरी से नीचे आया है, इसलिए अब भी खेतों में कच्ची फसल का आलू बीज रखा जा रहा है।

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वो आगे कहते हैं, "पिछले साल सितम्बर में बारिश से नुकसान हुआ था, इस बार तो अभी ज्यादा आलू बोया ही नहीं गया था तो इसका ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। यूपी में वैसे भी सितम्बर में 10 प्रतिशत आलू बोया जाता है। इस बार दिक्कत नहीं है। पिछली बार अगेती भी नहीं हुई फरवरी में भी बारिश हुई उसका नुकसान किसानों को हुआ। कम से कम हमारे 10-12 लाख कुंतल आलू का उत्पादन कम हुआ था।


उद्यान विभाग के अनुसार इस बार आलू बुवाई के लिए 98.18 लाख मीट्रिक टन आलू स्टोर किया गया था, अक्टूबर 2020 के दूसरे सप्ताह तक कोल्ड स्टोर से 38.07 लाख मीट्रिक टन आलू रखे हुए हैं, इसमें से 20 टन आलू में बुवाई में प्रयोग किया जाएगा।

देश में सबसे ज्यादा आलू उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में होता है। एक मोटे अनुमान के मुताबिक ये दोनों राज्य देश के कुल आलू उत्पादन में करीब 50 फीसदी के आसपास योगदान करते हैं। इसके बाद मध्य प्रदेश, गुजरात और बिहार का नंबर आता है। भारत, चीन के बाद दुनिया में सबसे ज्यादा आलू उत्पादन करने वाला देश भी है।

आलू की फसल में देरी होने से इस बार बाजार में आलू भी देर से आएंगे, हर बार दीवाली तक आलू की नई फसल बाजार में आ जाती थी। इस बार बाजार में आलू का रेट काफी ज्यादा रहा और अगर ऐसा ही रहा तो आलू का दाम और भी ज्यादा बढ़ सकता है।

केंद्रीय आलू अनुंसधान संस्थान, के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. विजय कुमार गुप्ता बताते हैं, "इस बार आलू की बुवाई देर से हुई तो आलू भी देर में आएगा, जिसका असर बाजार पर पड़ेगा। अगर आलू की अगेती फसल के समय तापमान बहुत ज्यादा होता है तो आलू जब खेत में लगाते हैं उसके सड़ने का चांस होता है। लेकिन वो सड़ता तब है जब कल्ले न निकले हों, अगर पलेवा लगाकर आलू लगा भी लिया तो उसमें दूसरे कीड़े मकोड़े लगने लगते हैं। हॉपर और माइट पत्तियों के रस चूसने लगते हैं। इसलिए पानी जल्दी-जल्दी लगाना चाहिए।"

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