एग्रीकल्चर सेक्टर में प्रबंधन की डिग्री लेने वाला ये युवा क्यों बना किसान

एग्रीकल्चर सेक्टर में प्रबंधन की डिग्री लेने वाला ये युवा क्यों बना किसान

आगरा (उत्तर प्रदेश)। पहले खेती की पढ़ाई और फिर एग्रीकल्चर सेक्टर में ही प्रबंधन की डिग्री लेने वाले सौरभ आस्थाना अब पक्के किसान बन गए हैं। वो अपने गांव लौट आए हैं जैविक खेती करते हैं।

दिल्ली से करीब 250 किलोमीटर दूर उत्तर प्रदेश में आगरा के ऊंटगिर गांव के करने वाले सौरभ अस्थाना पंतजलि समेत कई कंपनियों में 7-8 साल से नौकरी कर रहे थे, उनका काम कंपनियों के उत्पादों की मार्केटिंग करना था, लेकिन एक दिन उन्होंने नौकरी छोड़ी और अपने गांव लौट गए, जहां अपने ढाई हेक्टेयर जमीन पर खेती शुरू कर दी।

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सौरभ बताते हैं, "मैं जिन भी कंपनियों में काम करता था, किसान और ग्रामीणों को जो उत्पाद बेचते वक्त हम दावा करते थे, वो हकीकत में जमीन पर उतने खरें नहीं उतरते थे। मुझे अंदर से ये धोखा लगा और मैंने नौकरी छोड़ दी।'

आगरा यूनिवर्सिटी से एमबीए करने वाले सौरभ अपनी बात को और सरल करते हुए वो फोन पर बताते हैं, "अब तक करीब 7 कंपनियों में नौकरियां की हैं, दिल्ली से लेकर राजस्थान तक कई राज्यों में रहा। सब कंपनियां खेती-किसानी से जुड़ी थी। लेकिन दावों में सबके खोखलापन था।'

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कुछ साल पहले सौरभ कृषि ऋषि कहे जाने वाले जीरो लागत खेती के प्रेरणा सुभाष पालेकर के संपर्क में आए और तभी से जैविक खेती करने की कोशिश में थे। इस बार उन्होंने 2 एकड़ जमीन पर जैविक तरीके से गेहूं बोया है। खेत में पहले पानी के साथ जीवामृत मिलाने का वीडियो बनाकर उन्होंने खेती-किसानी के ग्रुप पर भी पोस्ट किया है। जैविक खेती करने वाले किसानों की संस्था साकेत से जुड़े सौरभ आने वाले दिनों में खेती को और विस्तार देना चाहते हैं।

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