बेकार भूमि में होगा श्वेत झींगा पालन

बेकार भूमि में होगा श्वेत झींगा पालनफोटो: इंटरनेट

लखनऊ। देश में हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में लवणीय (क्षारीय) मृदा और लवणीय भूजल होने की वजह से इन जमीनों पर खेती नहीं हो पाती है, लेकिन अब इन बंजर जमीनों पर किसान समुद्री सफेद झींगा पालन करके लाभ कमा सकते हैं। यह जानकारी भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के मुंबई स्थित केन्द्रीय मात्स्यिकी शिक्षा संस्थान के वैज्ञानिकों ने दी। यहां वैज्ञानिकों ने लवणीय जल में श्वेत झींगा पालन की तकनीक विकसित की है।

इस तकनीक से संभव

इस बारे में जानकारी देते हुए यहां के निदेशक डॉ. गोपाल कृष्ण बताते हैं, “मात्स्यिकी शिक्षा संस्थान ने श्वेत झींगा पालन की जो तकनीक विकसित की है, उसकी सहायता से खारे पानी और लवणीय भूमि में श्वेत समुद्री झींगा पालन किया जा सकेगा।''

लगातार नई तकनीकों को विकसित करने में लगे

राजस्थान, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों के कुछ हिस्से खारे पानी और लवणीय भूमि की समस्या से लगातार जूझ रहे हैं। इन क्षेत्रों के लिए हरियाणा के करनाल स्थित केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान (सीएसएसआरआई) के वैज्ञानिकों ने लवणग्रस्त भूमि और खारे पानी वाले क्षेत्र में फसल, फल उत्पादन और मछली पालन कैसे किया जाए, इसके लिए लगातार नई तकनीकों को विकसित करने में लगे हुए हैं।

860 लाख हेक्टेयर भूमि खराब पड़ी

केंद्रीय योजना आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, देशभर में लगभग 860 लाख हेक्टेयर भूमि क्षार और लवणों की अधिकता के कारण खराब पड़ी है। देश के उत्तर-पश्चिमी राज्यों में 40 से 80 प्रतिशत भूजल की प्रकृति लवणीय है। ऐसे में इन जमीनों पर केन्द्रीय मात्स्यिकी शिक्षा संस्थान की झींगा पालन की नई तकनीक का उपयोग करके सफेद झींगा पालन किया जा सकता है।

अंतरराष्ट्रीय बाजारों में झींगा की बहुत ज्यादा मांग

अंतरराष्ट्री य बाजारों में झींगा की बहुत ज्यादा मांग है। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय भारत सरकार की रिपोर्ट के अनुसार भारत ने वर्ष 2016-17 में अबतक का सबसे ज्या्दा 5.78 अरब अमरीकी डॉलर (37,870.90 करोड़ रुपए) मूल्यै का 11,34,948 मीट्रिक टन सीफूड का निर्यात किया, जो एक साल पहले 9,45,892 टन और 4.69 अरब डॉलर था। अमरीका और दक्षिण पूर्व एशिया लगातार सबसे ज्यासदा आयात करने वाले देशों में रहे, जबकि यूरोपीय संघ से मांग में भी इस अवधि में इजाफा हुआ है। सीफूड में सबसे ज्यादा फ्रोजन झींगा निर्यात किया गया है, जो सभी निर्यात की जाने वाली चीजों में 38.28 प्रतिशत के साथ सबसे ऊपर रहा।

चीन के बाद दूसरे नंबर पर भारत

केंद्रीय कृषि मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, मछली उत्पादन में भारत, विश्व में चीन के बाद लगातार दूसरे नंबर पर बना हुआ है। देश में मात्स्यिकी एक बड़ा सेक्टेर है और लगभग 150 लाख लोग मत्स्य व्यवसाय से जुड़े हुए हैं। झींगा मछली में भारत विश्व में प्रथम स्थान रखता है और यह झींगा का सबसे बड़ा निर्यातक है। भारत जल कृषि से मछली उत्पा्दन करने वाला दूसरा सबसे बड़ा उत्पा दक देश है। वैश्विक जलकृषि उत्पाकदन में यह लगभग 6.3 प्रतिशत का योगदान करता है। पिछ्ले एक दशक मे जहां विश्व में मछ्ली एवं मत्स्य-उत्पादों के निर्यात की औसत वार्षिक विकास दर 7.5 प्रतिशत रही, वही भारतीय मत्स्य-उत्पादों के निर्यात मे 14.8 प्रतिशत की औसत वार्षिक विकास दर के साथ विश्वा में प्रथम स्थातन पर रहा।

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