"जब पिता और बड़े भाई नशा करते हैं तो वो अपने बच्चों को कैसे रोक पाएंगे"

“हमारे गाँव में तो सब तम्बाकू खाते हैं पर इसे कोई नशा नहीं मानता। लोग कहते हैं सिर्फ तम्बाकू की तो खा रहे हैं इसमें कौन सा नशा होता है। लोग शराब पीने को ही नशा मानते हैं।" गौरा गाँव के एक युवा अकरम खान ने बताया।

Neetu SinghNeetu Singh   12 Oct 2019 1:00 PM GMT

"जब पिता और बड़े भाई नशा करते हैं तो वो अपने बच्चों को कैसे रोक पाएंगे"

बाराबंकी। गौरा गाँव के एक युवा सोनू सिंह को अपने गाँव में नशा कर रहे परिवारों की चिंता है वो कहते हैं, "जब पिता और बड़े भाई नशा करते हैं तो वो अपने बच्चों को कैसे रोक पाएंगे। गाँव में कुछ घरों को छोड़कर सब नशा करते हैं।"

सोनू (19 वर्ष) बाराबंकी जिला मुख्यालय से लगभग 38 किलोमीटर दूर फतेहपुर ब्लॉक के गौरा ग्राम पंचायत का रहने वाला है। सोनू ने बताया, "मेरे गाँव में कुछ ही हमारे हम उम्र लड़के हैं। एक बार दारू पीकर दो लोग गाड़ी चला रहे थे तो उनका एक्सीडेंट हो गया और वो तुरंत मर गये। इस घटना के बाद भी गाँव में कोई सुधार नहीं हुआ।"

जिस ग्राम पंचायत को लेकर सोनू चिंतित हैं वहां के प्रधान पति रकाबुल ने बताया कि उनके गाँव में 75 फीसदी लोग नशा करते हैं। रकाबुल कहते हैं, "आज से तीन-चार साल पहले गाँव के कई घरों में कच्ची शराब की भट्टियाँ जलती थीं जबसे हमारे घर प्रधानी आयी है हमने भट्टियाँ फुड़वाई। अब चोरी छुपे किसी के घर बनती हो तो पता नहीं बाकी सभी घरों में शराब बनना अब बंद है।" उन्होंने आगे बताया, "अब जिसको पीने के लिए मना करो वो गाली-गलौज और लड़ाई करता है। लोग कहते हैं अपनी कमाई का पीते हैं। अब किसको समझायें।"

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नशे की जड़ें अब ग्रामीण क्षेत्रों में अपने पैर पसार रही हैं। लोग इसकी गिरफ़्त से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। ग्रामीण नशे के दुष्परिणाम समझें और इसको छोड़ दें इस दिशा में गाँव कनेक्शन फाउंडेशन और राष्ट्रीय समाज रक्षा संस्थान (नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ सोशल डिफेंस) के साझा प्रयास से यूपी के 10 जिलों में 10 अक्टूबर से जागरुकता कार्यक्रम किया जा रहा है। पहला कार्यक्रम 10 अक्टूबर को लखनऊ जिले के एक गाँव में किया गया वहीं 11 अक्टूबर को बाराबंकी जिले के गौरा गाँव में दूसरा कार्यक्रम किया गया। इस कार्यक्रम में नुक्कड़ नाटक और कुछ सलाहकारों की मदद से ग्रामीणों को जागरूक किया गया।

नुक्कड़ नाटक के जरिए जब ग्रामीणों को ये बताया गया कि तम्बाकू का सेवन भी नुकसानदायक है तो इस पर गाँव के अकरम खान (23 वर्ष) ने कहा, "हमारे गाँव में तो सब तम्बाकू खाते हैं पर इसे कोई नशा नहीं मानता। लोग कहते हैं सिर्फ तम्बाकू की तो खा रहे हैं इसमें कौन सा नशा होता है। लोग शराब पीने को ही नशा मानते हैं।"

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अगर आंकड़ों पर गौर करें तो दुनिया में हर 6 सेकंड में 1 मौत तंबाकू सेवन की वजह से होती है। तंबाकू में कई केमिकल होते हैं, जिनमें निकोटिन प्रमुख है। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय भारत सरकार (2015-2016) की रिपोर्ट के अनुसार हमारे देश में प्रतिदिन 5500 से ज्यादा युवा तम्बाकू का सेवन शुरू करते हैं जबकि देश में प्रतिदिन 3500 से ज्यादा लोगों की इससे मौत होती है। भारत में कैंसर से मरने वाले 100 में से 40 रोगी तम्बाकू के प्रयोग के कारण मरते हैं। लगभग 95 प्रतिशत मुँह के कैंसर तम्बाकू के सेवन करने वाले व्यक्तियों में होते हैं। वर्ष 2015 में धूम्रपान से 65 लाख लोगों की मौत हुई है। तम्बाकू के सेवनकर्ता प्रतिवर्ष 22 प्रतिशत बढ़ रहे हैं। सेकेण्ड हैण्ड स्मोक के कारण प्रतिवर्ष छह लाख प्रत्यक्ष और एक करोड़ लोग गंभीर बीमारियों के शिकार हो जाते हैं।

नशा मुक्ति के इस जागरूकता कार्यक्रम में आए एक प्रगतिशील किसान ने ग्रामीणों से कहा, "नशा कोई नई चीज नहीं है ये पीढ़ियों से चलता आ रहा है। पहले लोग तम्बाकू और बीड़ी का नशा करते थे अब वही बढ़कर चिलम, गांजा, सिगरेट और शराब में तब्दील हो गया है। अगर आप नशे में रोजाना केवल 100 रुपए खर्च करते हैं तो महीने के 3000 हो गये। इस हिसाब से पूरे साल का निकाल लीजिए कि आप नशे में न्यूनतम कितना रुपया खर्च कर रहे हैं।"

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राष्ट्रीय अपराध ब्यूरो (NCB) के आंकड़ों के अनुसार भारत में हर दिन 10 लोग नशे की वजह से परेशान होकर आत्महत्या कर रहे हैं। पिछले 25 वर्षों से गायत्री परिवार से जुड़े नशा मुक्त के सलाहकार चक्रेश कुमार ने ग्रामीणों को बताया, "आप अपने बच्चों से भूलकर भी नशे का कोई सामान न मंगवाएं। बच्चों को पूरा समय दें उनकी आदतों पर गौर करते रहें। समय निकालकर उनसे बातचीत करें। अपने आपको व्यस्त रखें अच्छे कार्यों में अपना लग लगायें। अगर आप नशा छोड़ना चाहते हैं तो रोजाना अदरक का सेवन करें धीरे-धीरे आपके नशा करने की लत कम हो जाएगी।"

नुक्कड़ नाटक के जरिए इस नशामुक्त जागरूकता कार्यक्रम में ये दिखाया गया कि कैसे बच्चे मीठी सुपाड़ी खाना शुरू करते हैं और फिर धीरे-धीरे इसके लती हो जाते हैं। कार्यक्रम में आये एक शिक्षक योगेश मिश्रा ने कहा, "नुक्कड़ नाटक में आपने देखा कि एक पिता अपने बच्चे से गुटका मंगाता था बच्चे ने स्वाद चखने से शुरू किया और फिर उसकी ये रोज की आदत बन गयी। बच्चों के साथ बैठकर नशे पर खुलकर चर्चा करें बातचीत करें उन्हें मार्गदर्शन दें ये तभी सम्भव है जब आप नशा छोड़ देंगे या उनके सामने नहीं करेंगे।" इस कार्यक्रम में 200 से ज्यादा ग्रामीण शामिल थे। जिसमें बच्चे, युवा, माता-पिता, शिक्षक, नशामुक्त आन्दोलन के सलाहकार मौजूद रहे।

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