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बच्चे को स्तनपान करा सकती है कोविड पॉजिटिव मां, वैक्सीन से नहीं प्रभावित होती है प्रजनन क्षमता: विशेषज्ञ

महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान और बच्चे के जन्म के बाद सभी कोविड-उपयुक्त सावधानियों का उपयोग करना चाहिए क्योंकि यह उन्हें संक्रमण और संबंधित जटिलताओं से प्रभावित होने से बचा सकता है।

बच्चे को स्तनपान करा सकती है कोविड पॉजिटिव मां, वैक्सीन से नहीं प्रभावित होती है प्रजनन क्षमता: विशेषज्ञ

एक मां को बच्चे को स्तनपान कराते रहना चाहिए लेकिन उसे सलाह दी जाती है कि जब वह स्तनपान नहीं करा रही हो तो बच्चे से 6 फीट की दूरी बनाकर रखें। सभी फोटो: यूनिसेफ इंडिया/फ्ल्किर

कोविड-19 महामारी के दौरान स्तनपान करा रही मांओं और गर्भवती महिलाओं को लेकर तरह तरह की भ्रांतियां हैं कि उन्हें क्या करना चाहिए या क्या नहीं करना चाहिए। लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज, नई दिल्ली में प्रसूति एवं स्त्री रोग, की विभागाध्यक्ष डॉ. मंजू पुरी, गर्भावस्था के दौरान कोविड-19 टीकाकरण के निर्णय के बारे में और महिलाओं को खुद को व अपने बच्चे को कोविड-19 से बचाने के लिए क्या सावधानियां बरतनी चाहिए के बारे में बता रही हैं।

महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान भी कोविड-19 के टीके लगवाने की स्वीकृति दे दी गई हैं। ऐसे में यह कदम उनके लिए किस तरह मददगार साबित होगा? इस पर डॉ मंजू कहती हैं, "दूसरी लहर के दौरान, पहली लहर की तुलना में गर्भावस्था के दौरान महिलाएं कोविड-19 से संक्रमित हुई। यदि कोविड के गंभीर लक्षण है तो गर्भावस्था के दौरान काफी मुश्किलें हो सकती है, विशेष रूप से अंतिम तिमाही के दौरान क्योंकि गर्भाशय बड़ा हो जाता है और मध्यपट (diaphragm) पर दबाव पड़ता है, जिससे महिला के ऑक्सीजन संतृप्ति में गिरावट आने से उसकी क्षमता प्रभावित हो सकती है। इससे रक्त ऑक्सीजन संतृप्ति में अचानक गिरावट आ सकती है और मां व बच्चे दोनों के जीवन को खतरा हो सकता है। टीके गर्भवती महिलाओं में गंभीर बीमारी को रोकने में मदद करेंगे।

इसके अलावा, एक मां के द्वारा टीका लगवाने से नवजात को कुछ हद तक सुरक्षा मिलने की संभावना है क्योंकि टीकाकरण के बाद मां के शरीर में विकसित एंटीबॉडी उसके रक्त के माध्यम से विकासशील भ्रूण तक पहुंच जाएंगी। स्तनपान कराने वाली माताओं के मामले में, एक शिशु को ये एंटीबॉडी मां के स्तन के दूध के माध्यम से मिलती है।

लोगों में यह भी अफवाह फैल रही कि टीका लगाने से प्रजनन क्षमता प्रभावित हो सकती है, इस बारे में डॉ. पुरी ने कहा कि ये ऐसी अफवाहें हैं जो हर जगह सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रही हैं। गलत सूचनाएं वायरस से कहीं ज्यादा खतरनाक है।

हालांकि कोविड-19 के टीके अपेक्षाकृत नए हैं, लेकिन इन्हें समय-परीक्षित तकनीकों का उपयोग करके विकसित किया गया है। टीके शरीर को एक विशिष्ट रोगज़नक़ के खिलाफ प्रतिरक्षा विकसित करने में मदद करते हैं, यह शरीर के किसी अन्य ऊतक को प्रभावित नहीं करते हैं। वास्तव में, हम महिलाओं को और उनके अजन्मे बच्चे को विभिन्न बीमारियों से बचाने के लिए गर्भावस्था के दौरान भी कुछ टीके जैसे हेपेटाइटिस बी, इन्फ्लुएंजा, पर्टुसिस वैक्सीन दी जाती हैं।

इसके अलावा, हमारे नियामकों ने अपनी सुरक्षा के प्रति आश्वस्त होने के बाद ही गर्भावस्था के दौरान टीके लगाने को मंजूरी दी है। कोई वैज्ञानिक डेटा या अध्ययन नहीं है जो यह दर्शाता हो कि टीके महिलाओं की प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर सकते हैं। ये टीके किसी भी तरह से प्रजनन अंगों को प्रभावित नहीं करते हैं।

एक गर्भवती मां को अपने परिवार के सदस्यों के बीच घर पर रहते हुए भी मास्क पहनना चाहिए और सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखनी चाहिए।

कोविड महामारी के इस संकट में एक गर्भवती महिला को खुद को कोविड से बचाने के लिए क्या सावधानियां बरतनी चाहिए? के सवाल पर डॉ मंजू कहती हैं, "गर्भावस्था और प्रसव हमारे समाज में सामाजिक घटनाएं हैं। लेकिन महामारी के दौरान, इसका मतलब मां और बच्चे के संक्रमण की चपेट में आने से हो सकता है। हम अनुशंसा करते हैं कि एक गर्भवती मां को अपने परिवार के सदस्यों के बीच घर पर रहते हुए भी मास्क पहनना चाहिए और सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखनी चाहिए। ऐसा इसलिए, क्योंकि हो सकता है वह बाहर नहीं जा रही हो, लेकिन उसके परिवार के सदस्य काम के लिए बाहर जा रहे हैं और उनसे वह इस वायरस से संक्रमित हो सकती है।

इसलिए, महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान और बच्चे के जन्म के बाद सभी कोविड-उपयुक्त सावधानियों का उपयोग करना चाहिए क्योंकि यह उन्हें संक्रमण और संबंधित जटिलताओं से प्रभावित होने से बचा सकता है।

अगर गर्भवती महिला में कोविड-19 के लक्षण दिखें तो उसे क्या करना चाहिए?

सबसे पहले, यदि उनमें कोविड के कोई लक्षण हैं, तो उन्हें जल्द से जल्द अपना परीक्षण करवाना चाहिए, क्योंकि जितनी जल्दी हम बीमारी का पता लगाएंगे, उतना ही बेहतर हम बीमारी का प्रबंधन कर सकते हैं। गर्भावस्था के दौरान कोविड का प्रबंधन लगभग वैसा ही होता है जैसा कि दूसरों के लिए होता है, लेकिन इसे डॉक्टर की सख्त निगरानी में ही किया जाना चाहिए

एक महिला को खुद को अलग रखना चाहिए, खूब सारे तरल पदार्थ पीने चाहिए, हर 4-6 घंटे में अपना तापमान और ऑक्सीजन संतृप्ति की जांच करनी चाहिए। यदि पैरासिटामोल लेने के बाद भी तापमान कम नहीं होता है, तो उसे डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए; यदि ऑक्सीजन की मात्रा में गिरावट है या घटती प्रवृत्ति है, उदाहरण के लिए, सुबह 98, शाम को 97, और फिर अगले दिन और गिर जाती है, तो उसे अपने डॉक्टर से संपर्क करने की आवश्यकता है।

इसके अलावा, जिन महिलाओं को मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, मोटापा आदि जैसी बीमारियां हैं, उन्हें अधिक सावधान रहने की जरूरत है, क्योंकि उन्हें अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता हो सकती है। इसलिए, अपने चिकित्सक से परामर्श करें और पुनर्प्राप्ति अवधि के दौरान अपने चिकित्सक के संपर्क में रहें।

यह सुनिश्चित करने के लिए कि मां और भ्रूण ठीक हैं, हम कोविड से ठीक होने के बाद एक समग्र स्वास्थ्य जांच की पुरजोर सिफारिश करते हैं।

क्या मां से भ्रूण को कोविड-19 हो सकता है?

इस चिंता का समर्थन करने के लिए कोई सबूत नहीं है। हमने कुछ अध्ययन किए हैं और पाया है कि प्लेसेंटा, एक अंग जो गर्भाशय में बनता है जिसमें एक भ्रूण बढ़ता है, एक सुरक्षात्मक बाधा के रूप में कार्य करता है। ऐसे कुछ मामले हैं जहां नवजात संक्रमित पाए गए लेकिन हमें यकीन नहीं है कि उन बच्चों को मां के गर्भ में संक्रमण हुआ या जन्म के तुरंत बाद।

यह कहने के बाद, जैसा कि मैंने पहले भी समझाया है, गर्भवती महिलाओं को संक्रमण को रोकने के लिए हर संभव सावधानी बरतनी चाहिए क्योंकि कोविड-19 उन्हें और उनके बच्चे को कई अन्य तरीकों से प्रभावित कर सकता है।

15 दिनों के लिए आइसोलेशन हर किसी के लिए मुश्किल होता है, लेकिन गर्भवती महिलाओं और प्रसव के बाद की माताओं के लिए इससे भी ज्यादा। इस समय के दौरान, उसके बच्चे के स्वास्थ्य की चिंता उसकी मानसिक स्थिति को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है।

एक मां को बच्चे को स्तनपान कराते रहना चाहिए लेकिन उसे सलाह दी जाती है कि जब वह स्तनपान नहीं करा रही हो तो बच्चे से 6 फीट की दूरी बनाकर रखें। एक देखभाल करने वाला जिसका परीक्षण नकारात्मक है, वह भी नवजात शिशु की देखभाल करने में मदद कर सकता है। नवजात शिशु को स्तनपान कराने से पहले, महिलाओ को अपने हाथ धोने चाहिए, मास्क, फेस शील्ड जैसे सुरक्षा कवच पहनने चाहिए और अपने आस-पास के वातावरण को भी बार-बार सैनिटाइज करना चाहिए।

निश्चित रूप से, गर्भावस्था के दौरान और प्रसव के बाद महिलाओं में मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं में वृद्धि हुई है। ये ऐसे समय होते हैं जब एक महिला बहुत सारे हार्मोनल और शारीरिक परिवर्तनों से गुजरती है। इस वक़्त , उन्हे शारीरिक एवं मानसिक हालातो का सामना करने के लिए, सामाजिक समर्थन की आवश्यकता है। इस सामाजिक समर्थन के अभाव में, वह अकेला, असहाय और उदास महसूस कर सकती है।

15 दिनों के लिए आइसोलेशन हर किसी के लिए मुश्किल होता है, लेकिन गर्भवती महिलाओं और प्रसव के बाद की माताओं के लिए इससे भी ज्यादा। इस समय के दौरान, उसके बच्चे के स्वास्थ्य की चिंता उसकी मानसिक स्थिति को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है।

इसलिए, इस दौरान महिलाओं को निरंतर समर्थन और आश्वासन प्रदान करना महत्वपूर्ण है। परिवार को वीडियो कॉल के माध्यम से संपर्क में रहना चाहिए, और उसके मूड में किसी भी बदलाव का निरीक्षण करना चाहिए और अगर वह उदास दिखती है और महसूस करती है, तो चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।

हम हमेशा अपनी गर्भवती महिलाओं और माताओं से दो सामान्य जांच प्रश्न पूछते हैं: एक, क्या उसे अपने नियमित काम करने में बहुत कम या कोई दिलचस्पी नहीं है? और दूसरा, क्या उसे पिछले 2 हफ्तों में कभी भी बिना किसी विशेष कारण के उदास या रोने का मन किया है? यदि इनमें से किसी भी प्रश्न का उत्तर हाँ है, तो इसका अर्थ है कि उसे मनोवैज्ञानिक द्वारा और मूल्यांकन की आवश्यकता है। डॉक्टरों के साथ-साथ परिवार के सदस्यों को भी इस दौरान महिला के व्यवहार को ध्यान से देखने की जरूरत है।

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