बीएचयू की कहानी हज़ारों भारतीय छात्राओं की कहानी है

Khadim Abbas RizviKhadim Abbas Rizvi   27 Sep 2017 8:55 AM GMT

बीएचयू की कहानी हज़ारों भारतीय छात्राओं की कहानी हैप्रतीकात्मक तस्वीर।

मोहम्मद तारिक/स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय कभी भी छात्राओं के लिए सुरक्षित नहीं रहा है। बीएचयू में छात्राओं से छेड़खानी के बाद हुए बवाल के बाद जब गाँव कनेक्शन ने पूविवि का इतिहास खंगाला तो यहां भी कई बार छेड़खानी जैसे मामले होने की बात सामने आई। यहां तो छेड़खानी में वार्डेन और शिक्षक तक का नाम सामने आ चुका है। वहीं दो बार छात्रों पर छेड़खानी का आरोप लगा है। इतना ही नहीं छात्रा का एमएमएस बनाने का मामला भी प्रकाश में आ चुका है।

इन दिनों बीएचयू में छात्रा से छेड़खानी के बाद हुए प्रदर्शन और फिर छात्राओं पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में छात्राओं के पक्ष में छात्र भी उतर आए हैं। अब सवाल यह है कि क्या बीएचयू जैसा मामला रोकने के लिए जौनपुर जिले की एक मात्र विवि में भी कोई इंतजाम है कि नहीं। वैसे कागज पर देखें तो इंतजाम हैं, लेकिन छेड़खानी जैसे मामले यहां भी सामने आते रहते हैं। बता दें कि पांच वर्ष पहले 2012 में जनसंचार विभाग की एक छात्रा के साथ हॉस्टल से निकलते समय छेड़खानी का मामला सामने आया था। तब वार्डेन ने छात्रा से अश्लील बातें की थीं और नंबर बढ़ाने की बात कहकर छात्रा से ओछी बातें कीं। छात्रा ने जब इसकी शिकायत विभागाध्यक्ष से की तो मामला दबाया जाने लगा। इसके बाद वार्डेन ने माफी मांग ली और फिर मामला दब गया। दबाव में आकर छात्रा ने इस मामले कहीं लिखित शिकायत नहीं की। फिर करीब दो वर्ष पहले एक छात्रा का एमएमएस बनाने का मामला सामने आया।

इस मामले को भी विवि प्रशासन ने बहुत ही सावधानी के साथ संभाल लिया और आरोपी छात्र को फटकार लगाकर छोड़ दिया गया। इसके छह माह के बाद ही एक छात्रा से छेड़खानी विवि के मुख्यद्वार पर हुई। इस मामले में कुलपति ने छात्रा और आरोपी छात्र के परिजनों को बुलाया। आरोपी छात्र के परिजनों ने स्पष्टीकरण दिया कि उनका बेटा दोबारा ऐसी गलती नहीं करेगा। इसके बाद मामला वहीं रफा-दफा कर दिया गया। करीब छह माह पहले एक और मामले ने काफी तूल पकड़ा। इस बार दो छात्राओं का फोटो प्रबंध संकाय के एक शिक्षक ने अपने फेसबुक वॉल पर लगा दिया था। दोनों छात्राओं का फोटो प्रबंध संकाय में पानी पीने के दौरान का था।

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इसका छात्राओं ने कड़ा विरोध दर्ज कराया था। छात्र-छात्राओं ने इसकी शिकायत तत्कालीन वीसी से भी की थी। इस मामले में वीसी ने जांच के आदेश दिए थे। शिक्षक ने अपनी सफाई में कहा था कि उन्होंने छात्राओं का फोटो इसलिए वॉल पर लगाया था कि वह छात्राओं को यूनिफॉर्म पहनकर आने का सबक सिखाना चाहते थे। हालांकि इस मामले में कई दिनों की जांच के बाद क्या हुआ यह किसी को नहीं पता।

सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं

पूविवि में छात्राओं की सुरक्षा के मद्देनजर हॉस्टल में जगह-जगह सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। हॉस्टल के रास्ते से लेकर विवि में कंम्यूटर लैब और लाइ्ब्रेरी में सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। ताकि विवि में हो रही गतिविधियों पर नजर रखी जा सके। वहीं सोमवार को छात्रावास में तैनात लेडी होमागार्ड को चीफ सिक्योरिटी हेड ने सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद रखने के निर्देश दिया हैं। हालांकि यहां भी अवकाश घोषित कर दिया गया है।

बीएचयू जैसी घटनाओं को रोकने के लिए विश्वविद्यालय के पास पुख्ता इंतजाम हैं। छात्रावासों में सीसीटीवी कैमरे भी लग गए हैं। छेड़खानी जैसे मामलों से निपटने के लिए विश्वविद्यालय के पास पूरी तैयारी है।
डॉ.सुरजीत कुमार, चीफ प्रॉक्टर, पूर्वांचल विश्वविद्यालय

कानपुर विश्वविद्यालय का नजारा भी बदला

विश्वविद्यालय परिसर में जाने वाले गेट की सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। बिना पहचान पत्र के विश्वविद्यालय परिसर में इंट्री नहीं मिल रही है। वहीं कैंपस के हॉस्टल में रहने वाली छात्राओं के लिए भी नियमों का सख्ती से पालन करने के लिए आदेश जारी कर दिए गए हैं। कानपुर विश्वविद्यालय कैंपस पहले से ही सीसीटीवी कैमरे से लैस हैं। विश्वविद्यालय के प्रॉक्टर नीरज कुमार सिंह बताते हैं, “विश्व विद्यालय की सुरक्षा के लिए 80 होमगार्ड हर समय तैनात रहते हैं। जहां एक ओर विश्वविद्यालय परिसर में बिना पहचान पत्र के एंट्री बंद कर दी गई है वहीं प्रॉक्टर कमेटी के सदस्यों ने भी विश्वविद्यालय परिसर में गस्त बढ़ा दी है।

किसी भी बाहरी संदिग्ध व्यक्ति को परिसर में प्रवेश नहीं दिया जा रहा है साथ ही हॉस्टल वार्डन को भी यह निर्देश दे दिए गए हैं कि हॉस्टल के नियमों का सख्ती से पालन कराया जाए।” कानपुर विश्वविद्यालय प्रशासन हमेशा ही विश्वविद्यालय परिसर के अंदर छात्र-छात्राओं की सुरक्षा व्यवस्था के लिए जागरूक रहता है। विश्वविद्यालय के महिला छात्रावास में रहने वाली अंकिता सिंह बताती हैं, “कानपुर विश्वविद्यालय के परिसर में मैं अपने आप को सुरक्षित महसूस करती हूं, क्योंकि कैंपस सीसीटीवी कैमरों से लैस है। वहीं कैंपस में ही पुलिस चौकी भी है।”

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चौधरी चरण सिंह विवि के सभी हॉस्टल में लगे सीसीटीवी

मेरठ। बीएचयू में हुए बवाल के बाद प्रदेश की हर यूनिवर्सिटी में छात्राओं की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। मेरठ में छात्राओं के साथ छेड़खानी की घटनाएं आम हैं। हालाकि कैंपस परिसर में उतनी छेडखानी नहीं होती, जितनी सड़कों पर की जाती है। उसके लिए एंटी रोमियो स्कवायड से पहले भी मेरठ में शक्ति मोबाइल चालू थी। गाँव कनेक्शन टीम ने सोमवार को पड़ताल की तो सुरक्षा की कलई खुलकर सामने आई।

“पूरे कैंपस में सीसीटीवी लगे हैं, जिनके माध्यम से हर गतिविधि पर नजर रखी जाती है।”
प्रो. एनके तनेजा, कुलपति चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय

प्रो. एनके तनेजा आगे बताते हैं, “ विश्वविद्यालय में100 होमगार्ड तैनात हैं, इसके अलावा पुलिस चेकपोस्ट भी है। खराब कैमरों की जानकारी नहीं है, आज ही मुआयना कर उन्हें बदलवा दिया जाएगा। बीएचयू की घटना के बाद सुरक्षा और अलर्ट कर दी गई है।”

सुरक्षा एक नजर में

  • विवि में कुल होमगार्ड की तैनाती 100
  • कुल सीसीटीवी 130
  • गर्ल्स हॉस्टल में लगे कैमरे 12
  • खराब कैमरों की संख्या 32
  • हॉस्टल में खराब कैमरों की संख्या 5
  • कैंपस में पुलिस चेक पोस्ट 2
  • कैंपस में कुल हॉस्टल्स की संख्या 6
  • गर्ल्स हॉस्टल्स 2
  • ब्वायज हॉस्टल्स 4

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क्या कहती हैं छात्राएं

शोध छात्रा उर्मिला (बदला हुआ नाम) बताती हैं, “जब मैंने यूनिवर्सिटी में एमए में एडमीशन लिया था, उस वक्त एक बार मेरे साथ लड़के ने छेड़खानी की थी। इसके बाद उसने डिपार्टमेंट जाकर हेड से शिकायत की थी, जिस पर उस लड़के ने माफी मांग ली थी। उसके बाद पांच साल कैंपस में हो गए, सब ठीक है।” बीटेक करने वाली छात्रा अंशू बताती हैं, “मुझे यूनिवर्सिटी में किसी प्रकार का कोई भय नहीं है। पूरा टीचिंग स्टाफ और स्टूडेंट कोआपरेटिव नेचर के हैं।”

50 फीसदी कैमरे खराब

चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में दुर्गा भाभी और न्यू गर्ल्स नाम के दो गर्ल्स हॉस्टल हैं। साथ ही पांच ब्वायज हॉस्टल हैं। पड़ताल के बाद पता चला कि हॉस्टल में लगे पांच कैमरों में से तीन खराब पड़े हैं, जबकि न्यू गर्ल्स के भी सात कैमरों में से तीन कैमरों की हालत खस्ता है। इसके अलावा अन्य स्थानों पर लगे हुए भी कुछ कैमरों की वायर हटी हुई है। इससे पता चलता है कि विवि प्रशासन छात्राओं की सुरक्षा के लिए कितना अलर्ट है।

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