एक इंजीनियर जो कबाड़ से कमाल की चीजें बना देता है

"देखिए कबाड़ नाम की कोई चीज़ होती ही नहीं। बस लोगों का नज़रिया होना चाहिए उसमें काम की चीज़ नजर आएगी। मुझे बचपन से पुरानी चीज़ों से लगाव था, फेंकने का मन नहीं करता था, अब उनसे कुछ न कुछ बना देता हूं।" गुरप्रीत सिंह

Arvind ShuklaArvind Shukla   10 Aug 2019 5:26 AM GMT

  • मोहाली (पंजाब)। हमारे आपके घरों में जब कोई सामान टूट जाता है या बेकार हो जाता है तो क्या करते हैं? ज़्यादातर लोगों के जवाब होंगे कि फेंक देते हैं, लेकिन पंजाब के मोहाली में रहने वाले गुरप्रीत सिंह ऐसी चीजों से कमाल करते हैं। उनकी नज़र में कोई भी चीज बेकार नहीं होती। पेशे से इंजीनियर गुरप्रीत सिंह कुछ से कुछ भी बना देने में माहिर हैं।

"हमारी मेड (बाई) से अगर घर का कोई सामान टूट जाता है तो वो कहती है, कोई बात नहीं, भैया (गुरप्रीत) इससे कुछ न कुछ बना ही लेंगे" कंवलदीप कौर, मुस्कुराते हुए पति गुरप्रीत सिंह की खूबी और उनके काम के प्रति घर में माहौल को बताती हैं।

टूटी-फूटी, बेकार कही जाने वाली चीज़ों से कुछ दोबारा इस्तेमाल किए जाने लायक रोचक, सजावटी सामान बनाने की इस प्रक्रिया को अंग्रेजी में अपसाइकलिंग कहते हैं। पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज, चंडीगढ़ के छात्र रहे और पंजाब पॉवर कॉरपोरेशन में इंजीनियर के पद पर कार्यरत गुरप्रीत (53 वर्ष) इसके माहिर हैं। मोहाली में बने उनके घर का डिज़ाइन और इंटीरियर (साज-सज्जा) चीज़ों को नया रूप देने के उनके हुनर की गवाही देते हैं।

कबाड़ी से बनी वस्तुओं के साथ गुरप्रीत सिंह

"देखिए कबाड़ नाम की कोई चीज़ होती ही नहीं। बस लोगों का नज़रिया होना चाहिए उसमें काम की चीज़ नजर आएगी। मुझे बचपन से पुरानी चीज़ों से लगाव था, फेंकने का मन नहीं करता था, अब उनसे कुछ न कुछ बना देता हूं। पुरानी चीज़ों को नया रूप देने में, दोबारा इस्तेमाल लायक बनाने में मेरी रुह को सुकून मिलता है,"गुरप्रीत सिंह, अपने बगल में रखे तरोई से तैयार एक लैंपशेड को दिखाते हुए कहते हैं।

अपने शौक के बारे में गुरप्रीत बताते हैं, "मेरी कुछ अजीब सी फितरत है। मैं बहुत जल्दी चीजों से ऊब जाता हूं। पांच-सात साल फोटोग्राफी की। फिर कुछ साल साइक्लिंग की, लेकिन मजा इस मिक्स मीडिया में आया। पत्थर और कबाड़ से कुछ बनाना ज्यादा चैलेजिंग है। हमेशा कुछ बन नहीं पाता। बन जाता है तो खुशी होती है, नहीं बनता तो फिर से नई कोशिश करता हूं।"

गुरप्रीत के घर में पुराने जूतों में फूल महकते हैं। पाईप, घी और रिफाइंड के डिब्बों में भी पौधे लगे हैं। पूरा का पूरा घर ऐसी ही चीजों से सजाया गया है।

"मेरे घर के इंटीरियर में कुछ भी बाज़ार से खरीदा नहीं है। ये जो लैंप रखा है, इसे मैंने पेंट की पुरानी प्लास्टिक वाली बाल्टी से बनाया है। आठ साल उस बाल्टी को पोछा लगाने वक़्त इस्तेमाल किया गया, जब तल्ला टूट गया, तो ये रूप दे दिया। बस यही करता हूं," गुरप्रीत बताते हैं।

गुरप्रीत कहते हैं, "इस आर्ट को अपसाइकलिंग कहा जाता है। अपसाइकिल मतलब किसी चीज़ को नए तरीके से इस्तेमाल करना, जबकि रिसाइकिल का आशय है उस चीज़ को उसी रूप में दोबारा इस्तेमाल करना।"

पुरानी और टूटी-फूटी चीजों को नया रूप देने के अलावा गुरप्रीत को पत्थरों से कलाकारी (पेबब्लर्ट) का भी बहुत शौक है। घर का एक पूरा कमरा पत्थरों से भरा है तो घर की दीवारें उनके जुनून की गवाही देती हैं।


"ये सारी डिज़ाइन (दिवार पर होली से लेकर मदर डे तक की डिज़ाइन को दिखाते हुए) मैंने सड़क से उठाए पत्थरों से बनाई हैं। मैं किसी पत्थर को तोड़ता नहीं हूं, जो जिस रूप में होता है उसी में कुछ पत्थर जोड़कर आकार देता हूं। दो-तीन साल से ये काम कर रहा हूं। इन्हीं पत्थरों से मैं तमाम त्योहार, कृष्ण जन्माष्टमी से लेकर होली जैसे त्योहारों को यादगार बनाने की कोशिश करता हूं," गुरप्रीत आंखों में चमक के साथ बताते हैं।

गुरप्रीत ने अपने घर की ऊपरी मंजिल को अपनी प्रयोगशाला बना डाला है। बालकनी के एक कमरे में लकड़ी का काम करते हैं तो अंदर पत्थर वाले कमरे को पत्थरों से पाट रखा है, इसे वो अपनी इबादतगाह कहते हैं।

"यहां बहुत कम लोगों को आने देता हूं, यहां मैं अपनी रूह से मिलता हूं। ये मेरे सुकून का कोना है। सूफी गाने लगाकर यहीं बैठ जाता हूं और फिर कुछ न कुछ बन ही जाता है," वो अपनी ही बात पर मुस्कुराते हैं।

सरकारी नौकरी की जिम्मेदारियां और अपने जुनून के बीच सामाजंस्य कैसे बिठाते हैं? इस सवाल के जवाब में गुरप्रीत कहते हैं, "मुझे लोगों के उत्साहवर्धन से हौसला मिलता है, मेरी कलाकारी लोगों को पसंद आती है। उनकी वाहवाही मुझे और अच्छा करने की प्रेरणा देती है। लेकिन मेरी सबसे बड़ी प्रेरणा मेरी पत्नी है, अगर उनका साथ न मिलता ये सब संभव न हो पाता। वो जॉब करते हुए घर की सारी जिम्मेदारियां भी संभालती हैं, ताकि मैं अपने इस शौक को समय दे पाऊं।"


गुरप्रीत की बात पर उनकी पत्नी कंवलदीप कौर कहती हैं, "मैं जानती हूं कि इन सब कामों में समय लगता है। इसीलिए कोशिश करती हूं घर का माहौल ऐसा रहे कि इन्हें आसानी हो। अब तो कई बार ये किसी प्रोजेक्ट का वीडियो बनाते हैं तो कैमरा मैं ही पकड़ लेती हूं, मुझे भी इन सब में मज़ा आने लगा है।"

"वैसे भी मेरी आदत में ये सब शामिल हो गया है, ये दूध और सब्जी लेने जाते हैं तो झोले में सब्जी-दूध कम पत्थर ज्यादा होते हैं। कई बार उन्हें फ्रिज तक में रख देते हैं,कंवलदीप कौर बताते हंसने लगती हैं।

गुरप्रीत सिंह की और कबाड़ से कलाकारी आप यहां देख सकते हैं

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